RCA एडहॉक कमेटी में बड़ा फेरबदल: BJP विधायक के बेटे बने कन्वीनर, मंत्रियों-सांसदों के परिजनों को मिली जगह; 9वीं बार बढ़ा कार्यकाल
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की एडहॉक कमेटी में बड़ा फेरबदल करते हुए भाजपा विधायक के बेटे मोहित यादव को कन्वीनर बनाया गया है, जबकि मंत्रियों और सांसदों के परिजनों को सदस्य नियुक्त किया गया है। सरकार ने कमेटी का कार्यकाल नौवीं बार बढ़ाते हुए इसे तीन महीने का विस्तार दिया है। इस दौरान लंबित RCA चुनाव करवाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी, लेकिन नियुक्तियों को लेकर सियासी विवाद भी तेज हो गया है।
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) की एडहॉक कमेटी को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार ने कमेटी में बड़ा बदलाव करते हुए कई प्रभावशाली नेताओं के परिजनों को शामिल किया है। इस फेरबदल के तहत भाजपा विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव को एडहॉक कमेटी का नया कन्वीनर नियुक्त किया गया है।
इसके साथ ही कमेटी में नए चेहरों को भी जगह दी गई है। इनमें स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह खींवसर, पूर्व मंत्री चंद्रराज सिंघवी के पोते अरिष्ट सिंघवी, भाजपा सांसद घनश्याम तिवाड़ी के बेटे आशीष तिवाड़ी और हनुमानगढ़ से विधायक संजीव बेनीवाल के बेटे अर्जुन बेनीवाल को सदस्य बनाया गया है। इन नियुक्तियों के बाद RCA के भीतर राजनीतिक प्रभाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
9वीं बार बढ़ाया गया एडहॉक कमेटी का कार्यकाल
राज्य सरकार पिछले करीब दो वर्षों से RCA की निर्वाचित कार्यकारिणी भंग होने के बाद एडहॉक कमेटी के जरिए ही कामकाज चला रही है। इसी क्रम में अब एक बार फिर कमेटी का कार्यकाल बढ़ाया गया है—यह लगातार नौवीं बार है जब एडहॉक कमेटी को एक्सटेंशन दिया गया है।इस दौरान RCA के चुनाव लगातार लंबित हैं, जिससे संगठन की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं।
पुराने पदाधिकारियों की छुट्टी
नए बदलाव के तहत मौजूदा कन्वीनर दीनदयाल कुमावत को पद से हटा दिया गया है। साथ ही भाजपा प्रदेश प्रवक्ता पिंकेश जैन को भी एडहॉक कमेटी से बाहर कर दिया गया है। यह कदम संगठन में नए संतुलन और नेतृत्व बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
नई कमेटी को 3 महीने का कार्यकाल
सरकार द्वारा गठित इस नई एडहॉक कमेटी का कार्यकाल 3 महीने तय किया गया है। इस अवधि में कमेटी के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी RCA के लंबे समय से लंबित चुनाव करवाने की होगी।
सियासी बहस और संभावित विवाद
कमेटी में नेताओं के परिजनों को जगह देने को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे भाजपा की अंदरूनी राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं, तो वहीं सरकार इसे प्रशासनिक पुनर्गठन और चुनावी प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश बता रही है।