राजसमंद ACB की बड़ी कार्रवाई: पंचायत समिति रायपुर (ब्यावर) के AEN प्रदीप कुमार रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, घर से 5.23 लाख रुपये नकद बरामद
राजसमंद के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने ब्यावर जिले की पंचायत समिति रायपुर में तैनात सहायक अभियंता (AEN) प्रदीप कुमार को 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। बिल पास करने के बदले रिश्वत मांगने की शिकायत पर ट्रैप कार्रवाई हुई, जिसमें आरोपी के घर से 5 लाख 23 हजार रुपये नकद भी बरामद हुए। आरोपी महिला एवं बाल विकास विभाग का अतिरिक्त चार्ज भी संभाल रहा था। जांच में CDPO मनीष मीणा पर भी 1.80 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगा, लेकिन वह फरार हो गया।
राजसमंद जिले के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ी ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया है। पंचायत समिति रायपुर (ब्यावर) में तैनात सहायक अभियंता (AEN) प्रदीप कुमार को बिल पास करने के बदले 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए सरकारी आवास पर रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई के दौरान आरोपी के घर की तलाशी में 5 लाख 23 हजार रुपये नकद भी बरामद किए गए।
रिश्वत की मांग और सौदा
एसीबी के अनुसार, आरोपी प्रदीप कुमार, जो पंचायत समिति रायपुर में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत हैं और महिला एवं बाल विकास विभाग में अतिरिक्त चार्ज भी संभाल रहे थे, लंबे समय से एक परिवादी (शिकायतकर्ता) से रिश्वत की मांग कर रहे थे। परिवादी के लंबित बिलों की मेजरमेंट बुक भरने और बिल पास करने के एवज में उन्होंने पहले 21 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में दोनों पक्षों के बीच सौदा 15 हजार रुपये में तय हो गया।
परिवादी ने इस भ्रष्टाचार की शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में दर्ज कराई, जिसके बाद एसीबी टीम ने मामले की गहन जांच और सत्यापन किया। सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर तुरंत ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई गई।
ट्रैप कार्रवाई और गिरफ्तारी
कार्रवाई सोमवार रात (16 मार्च 2026) को अंजाम दी गई। राजसमंद एसीबी की टीम ने उप महानिरीक्षक पुलिस डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में और एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) हिम्मत चारण के नेतृत्व में जाल बिछाया। ट्रैप के दौरान आरोपी प्रदीप कुमार को परिवादी से 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। रिश्वत की राशि सरकारी आवास पर ही प्राप्त हुई, जहां आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा गया।
घर की तलाशी में लाखों का कैश
ट्रैप सफल होने के बाद एसीबी टीम ने आरोपी के मकान पर तलाशी ली। इस दौरान घर से 5 लाख 23 हजार रुपये की नकद राशि बरामद की गई। यह राशि संभवतः अन्य रिश्वतों या भ्रष्ट गतिविधियों से जमा की गई बताई जा रही है। एसीबी जांच में इस नकद की स्रोत की भी पड़ताल की जा रही है।
दूसरे अधिकारी पर भी आरोप
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। बदनोर (ब्यावर) के सीडीपीओ (चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर) मनीष मीणा पर भी उसी परिवादी से बिल पास करने के बदले 2 लाख 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगा। जांच में पता चला कि उन्होंने 1 लाख 80 हजार रुपये में सौदा तय किया था। हालांकि, ट्रैप की भनक लगने के कारण मनीष मीणा मौके पर गिरफ्तार नहीं हो सका और फरार हो गया। एसीबी ने उसके खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है और उसे जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही है।
अधिकारी का बयान
एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिम्मत चारण ने बताया कि आरोपी लंबे समय से परिवादी को परेशान कर रहा था और बिना रिश्वत के काम नहीं कर रहा था। शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है।