अमेरिका में साइलेंट हार्ट अटैक से राजस्थानी युवक की दर्दनाक मौत: विपिन चौधरी का शव तीन दिन बाद भारत लाने की उम्मीद
राजस्थान के अलवर जिले (खैरथल-तिजारा) के जाट बहरोड़ गांव के 24 वर्षीय विपिन चौधरी की अमेरिका के जॉर्जिया में 30 दिसंबर 2025 को साइलेंट हार्ट अटैक से मौत हो गई। वे 29 दिसंबर की रात माता-पिता से वीडियो कॉल पर बात करने के बाद सोए थे और अगले दिन नहीं उठे। दोस्त ने अस्पताल पहुंचाया जहां मृत घोषित कर दिया गया। डेढ़ बीघा जमीन बेचकर जून 2024 में अमेरिका गए विपिन शॉपिंग मॉल में बिलिंग का काम करते थे। मौत को तीन दिन बीत चुके हैं, पोस्टमॉर्टम अभी नहीं हुआ और शव पुलिस स्टेशन में रखा है। इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड व राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका की मदद से शव भारत लाने की प्रक्रिया चल रही है। चचेरा भाई संदीप जॉर्जिया पहुंच गए हैं और तीन दिन में शव भारत आने की उम्मीद है।
अमेरिका के जॉर्जिया राज्य में एक युवा भारतीय की अचानक मौत ने पूरे परिवार को शोक में डुबो दिया है। राजस्थान के अलवर जिले (खैरथल-तिजारा क्षेत्र) के जाट बहरोड़ गांव निवासी 24 वर्षीय विपिन चौधरी की साइलेंट हार्ट अटैक (मौन हृदयाघात) से मौत हो गई। विपिन पिछले साल जून 2024 में सपनों की तलाश में अमेरिका गए थे, लेकिन महज डेढ़ साल बाद ही यह दुखद हादसा हो गया। घटना 29-30 दिसंबर 2025 की है, और अब परिवार बेटे के शव के अंतिम दर्शन के इंतजार में बैठा है।
मौत की रात: मां-पिता से वीडियो कॉल पर बात कर सोया था विपिन विपिन चौधरी अपने परिवार से नियमित संपर्क में रहते थे। 29 दिसंबर की रात को उन्होंने घर पर वीडियो कॉल के जरिए मां-पिता से लंबी बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें नींद आ रही है और वे सोने जा रहे हैं। अगले दिन 30 दिसंबर को जब वे सुबह नहीं उठे, तो उनके रूममेट या दोस्तों ने उन्हें जगाने की कोशिश की। जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो दोस्त उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, मौत का कारण साइलेंट हार्ट अटैक था, जो बिना किसी पूर्व चेतावनी के आता है और अक्सर युवाओं में भी घातक साबित हो रहा है।
अमेरिका जाने के लिए बेची थी डेढ़ बीघा जमीन विपिन चौधरी एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे। बेहतर जीवन और रोजगार की तलाश में उन्होंने अपनी करीब डेढ़ बीघा जमीन बेचकर अमेरिका जाने का फैसला किया। जून 2024 में वे जॉर्जिया पहुंचे और वहां एक शॉपिंग मॉल में बिलिंग का काम करने लगे। परिवार को उम्मीद थी कि विपिन जल्द ही अपनी मेहनत से घरवालों की स्थिति सुधारेंगे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
शव भारत लाने में देरी: पोस्टमॉर्टम और छुट्टियों की वजह से अटकी प्रक्रिया मौत को अब तीन दिन से ज्यादा बीत चुके हैं (घटना 30 दिसंबर की है और आज 2 जनवरी 2026), लेकिन अभी तक शव का पोस्टमॉर्टम भी पूरा नहीं हो सका है। अमेरिका में नए साल की छुट्टियों के कारण सरकारी कार्यालय बंद होने से प्रक्रिया में देरी हो रही है। शव फिलहाल पुलिस स्टेशन या संबंधित अथॉरिटी के पास ही रखा हुआ है।विपिन के चचेरा भाई संदीप चौधरी, जो अमेरिका में ट्रक ड्राइवर हैं, तुरंत जॉर्जिया पहुंच गए हैं। वे वहां स्थानीय प्रक्रियाओं को पूरा करने में जुटे हैं। संदीप ने परिवार को बताया कि छुट्टियों के कारण दो दिन का डिले हो गया है। अब सोमवार या मंगलवार (5-6 जनवरी) तक पोस्टमॉर्टम और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने की उम्मीद है। उसके बाद शव को भारत भेजा जा सकेगा। कुल मिलाकर, शव के भारत पहुंचने में अभी तीन दिन और लग सकते हैं।
मदद में जुटी इंडियन कम्युनिटी: राना और दूतावास से संपर्क परिवार ने मदद के लिए राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (राना) न्यूयॉर्क के अध्यक्ष प्रेम भंडारी से संपर्क किया। प्रेम भंडारी लगातार भारतीय दूतावास के अधिकारियों से बात कर रहे हैं और शव repatriation (भारत लाने) की प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश कर रहे हैं। इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड (ICWF) की मदद से शव को भारत लाने की व्यवस्था की जा रही है। यह फंड विदेश में फंसे या दिवंगत भारतीयों की मदद के लिए भारतीय दूतावास द्वारा संचालित किया जाता है।परिवार के लोग दूतावास अधिकारियों से भी निरंतर संपर्क में हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही सभी औपचारिकताएं पूरी हो जाएंगी और विपिन का शव उनके पैतृक गांव जाट बहरोड़ पहुंचेगा, जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा।