कोटा के रामगंजमंडी क्षेत्र में सरकारी स्कूल में महिला टीचर के साथ विवाद: प्रिंसिपल ने अंदर से ताला लगाकर 2 घंटे बाहर खड़ा किया, ग्रामीणों के विरोध के बाद मामला सुलझा
कोटा के रामगंजमंडी क्षेत्र के कुदायला सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल सत्यप्रकाश जोशी ने महिला टीचर कृष्णा मेहरड़ा को बिना लिखित आदेश के डेपुटेशन बताकर स्कूल में प्रवेश नहीं करने दिया और मुख्य गेट अंदर से ताला लगा दिया। टीचर 2 घंटे बाहर खड़ी रहीं। ग्रामीणों के विरोध पर ताला खोला गया और मौखिक रूप से आदेश वापस लेने का आश्वासन दिया। CBEO ने कहा कि प्रिंसिपल को डेपुटेशन का अधिकार नहीं, मामले की जांच होगी।
कोटा, राजस्थान: कोटा जिले के रामगंजमंडी क्षेत्र के कुदायला गांव में स्थित एक सरकारी स्कूल (कक्षा 12वीं तक) में सोमवार को एक महिला शिक्षिका के साथ हुई घटना ने स्थानीय स्तर पर खलबली मचा दी। स्कूल प्रिंसिपल ने कथित तौर पर महिला टीचर को स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया और मुख्य द्वार को अंदर से ताला लगा दिया। टीचर लगभग 2 घंटे तक स्कूल के बाहर खड़ी रहीं, जिसके बाद ग्रामीणों के विरोध और दबाव के चलते प्रिंसिपल ने ताला खोला और मौखिक रूप से डेपुटेशन आदेश वापस लेने का आश्वासन दिया।
घटना का पूरा विवरण
महिला शिक्षिका कृष्णा मेहरड़ा, जो इस स्कूल में सोशल साइंस विषय पढ़ाती हैं, सोमवार सुबह करीब 10 बजे स्कूल पहुंचीं। उन्होंने बताया कि जैसे ही वे स्कूल में प्रवेश करने लगीं, प्रिंसिपल सत्यप्रकाश जोशी ने उन्हें रोका और कहा कि उनका कार्य मुक्ति (डेपुटेशन) का आदेश जारी हो चुका है। प्रिंसिपल ने उन्हें 3 किलोमीटर दूर स्थित सातलखेड़ी स्कूल में जाकर जॉइनिंग देने के लिए कहा।
कृष्णा मेहरड़ा ने प्रिंसिपल से लिखित आदेश मांगा, क्योंकि उनके पास ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं था। लेकिन प्रिंसिपल नहीं माने और स्कूल के मुख्य गेट को अंदर से ताला लगा दिया। टीचर दोपहर 12 बजे तक बाहर खड़ी रहीं। इस दौरान उन्होंने CBEO (Chief Block Education Officer) कीर्ति मेहरोत्रा को फोन किया और स्थिति बताई। CBEO ने प्रिंसिपल से बात करने को कहा।
इसी बीच गांव के लोग मौके पर पहुंच गए और प्रिंसिपल के खिलाफ विरोध जताने लगे। ग्रामीणों के दबाव में प्रिंसिपल ने ताला खोला और 5-5 लोगों के समूह में उन्हें अंदर बुलाकर बातचीत की, ताकि बच्चों की पढ़ाई में कोई खलल न पड़े। अंत में प्रिंसिपल ने मौखिक रूप से डेपुटेशन आदेश वापस लेने का आश्वासन दिया।
प्रिंसिपल का पक्ष
प्रिंसिपल सत्यप्रकाश जोशी ने अपनी सफाई में कहा कि स्कूल का एक अन्य टीचर अमृत लाल सातलखेड़ी स्कूल में लगे हुए हैं, जो पांचवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा के प्रभारी हैं। बोर्ड परीक्षा आयोजन के लिए अमृत लाल को कुदायला बुलाया गया था, और बदले में कृष्णा मेहरड़ा का सातलखेड़ी में डेपुटेशन का आदेश जारी किया गया था।
उन्होंने आगे कहा कि टीचर के साथ बहुत सारे ग्रामीण आए थे, इसलिए सभी एक साथ स्कूल में न घुसें, इसीलिए अंदर से ताला लगाया गया था। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए सावधानी बरती गई। फिलहाल मौखिक आश्वासन दिया गया है कि आदेश वापस लिया जाएगा।
CBEO का बयान और जांच की बात
CBEO कीर्ति मेहरोत्रा ने स्पष्ट किया कि शिक्षण व्यवस्था सुचारू रखने के लिए महिला टीचर को सातलखेड़ी स्कूल में लगाया गया था, लेकिन प्रिंसिपल ने बाद में आदेश वापस ले लिया। उन्होंने महत्वपूर्ण बात कही कि स्कूल प्रिंसिपल को डेपुटेशन करने का कोई अधिकार नहीं है। अगर ऐसा हुआ है, तो वे मामले की जांच करेंगी। CBEO ने खुद भी डेपुटेशन नहीं किया है।
क्या है डेपुटेशन का नियम?
राजस्थान शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, टीचरों का डेपुटेशन (अस्थायी स्थानांतरण) केवल जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी या उच्च स्तर के अधिकारी ही कर सकते हैं। प्रिंसिपल स्तर पर ऐसा कोई अधिकार नहीं होता। इस घटना में प्रिंसिपल द्वारा बिना उचित प्रक्रिया और लिखित आदेश के डेपुटेशन बताने से विवाद बढ़ा।