राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने नीरज डांगी पर दोबारा जताया भरोसा, नामांकन दाखिल... दलित वोट बैंक पर फोकस

कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में नीरज डांगी को लगातार दूसरी बार उम्मीदवार बनाया है। डांगी ने नामांकन दाखिल कर दिया है, इस दौरान गहलोत, डोटासरा और टीकाराम जूली मौजूद रहे।

Jun 5, 2026 - 14:42
राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने नीरज डांगी पर दोबारा जताया भरोसा, नामांकन दाखिल... दलित वोट बैंक पर फोकस

राजस्थान में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस ने एक बार फिर मौजूदा सांसद नीरज डांगी पर भरोसा जताते हुए उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है। नीरज डांगी ने विधानसभा में रिटर्निंग ऑफिसर के सामने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।

नामांकन के दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली शामिल रहे। हालांकि इस मौके पर सचिन पायलट की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी रही।

कांग्रेस की रणनीति

कांग्रेस ने नीरज डांगी को दोबारा मैदान में उतारकर दलित वोट बैंक को साधने की रणनीति अपनाई है। पार्टी का मानना है कि डांगी का सामाजिक आधार और संगठन में अनुभव कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार, डांगी को दोबारा मौका देने में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अहम भूमिका रही है। बताया जा रहा है कि गहलोत और खड़गे दोनों के समर्थन से उनका नाम फाइनल हुआ।

विधानसभा संख्या बल से कांग्रेस को बढ़त

राजस्थान विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के अनुसार कांग्रेस की एक राज्यसभा सीट पर जीत लगभग तय मानी जा रही है। कांग्रेस के पास करीब 67 विधायकों का समर्थन है, जिससे वह एक सीट आसानी से जीत सकती है।

नीरज डांगी का राजनीतिक सफर

नीरज डांगी रेवदर विधानसभा सीट से लगातार तीन बार चुनाव हार चुके हैं (2003, 2008 और 2018)। इसके बावजूद पार्टी ने उन पर भरोसा बनाए रखा।

वे यूथ कांग्रेस से राजनीति में सक्रिय हुए और संगठन में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। 2020 में उन्हें पहली बार राज्यसभा भेजा गया था और अब उन्हें लगातार दूसरी बार मौका दिया गया है। उनके पिता दिनेशराय डांगी भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं और विधायक व मंत्री पद पर रह चुके हैं।

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने अनुभवी और संगठन से जुड़े चेहरों पर दांव लगाया है। नीरज डांगी की दोबारा उम्मीदवारी को दलित वोट बैंक और संगठनात्मक संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है।

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