विधायक निधि घोटाला: खींवसर के भाजपा विधायक सहित राजस्थान के तीन विधायकों पर रिश्वत और कमीशन का आरोप, हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा शून्यकाल में उठाया मुद्दा

लोकसभा के शून्यकाल में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान के तीन विधायकों — खींवसर के भाजपा विधायक रेवंतराम डांगा, हिंडौन की कांग्रेस विधायक अनीता जाटव और बयाना की निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत — पर विधायक निधि से काम स्वीकृत करने के एवज में रिश्वत और कमीशन लेने का मामला उठाया। स्टिंग ऑपरेशन में रेवंतराम डांगा पर 10 लाख रुपये घर बुलाकर रिश्वत लेने का आरोप सबसे गंभीर है। बेनीवाल ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप कर इन भ्रष्ट विधायकों को बर्खास्त करने की मांग की और प्रधानमंत्री के ‘न खाऊंगा न खाने दूंगा’ वाले बयान पर सवाल उठाया।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
March 28, 2026 • 11:25 AM  19
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विधायक निधि घोटाला: खींवसर के भाजपा विधायक सहित राजस्थान के तीन विधायकों पर रिश्वत और कमीशन का आरोप, हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा शून्यकाल में उठाया मुद्दा
“विधायक निधि घोटाला: खींवसर के भाजपा विधायक सहित राजस्थान के तीन विधायकों पर रिश्वत और कमीशन का आरोप, हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा शून्यकाल में उठाया मुद्दा”
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विधायक निधि घोटाला: खींवसर के भाजपा विधायक सहित राजस्थान के तीन विधायकों पर रिश्वत और कमीशन का आरोप, हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा शून्यकाल में उठाया मुद्दा

राजस्थान की राजनीति में विधायक निधि (MLA-LAD फंड) से जुड़े भ्रष्टाचार का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। लोकसभा में आज शून्यकाल के दौरान नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने खींवसर के भाजपा विधायक रेवंतराम डांगा सहित तीन विधायकों द्वारा विकास कार्यों की अनुशंसा के एवज में रिश्वत/कमीशन लेने के गंभीर आरोपों को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की और ऐसे भ्रष्ट विधायकों को तुरंत बर्खास्त करने की अपील की।

स्टिंग ऑपरेशन में क्या सामने आया?

एक प्रमुख समाचार पत्र (दैनिक भास्कर) द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन में राजस्थान के तीन विधायकों को कैमरे में कैद किया गया, जहां वे विधायक निधि से राशि स्वीकृत कराने के बदले भारी कमीशन मांगते नजर आए। आरोपित विधायक इस प्रकार हैं:

रेवंतराम डांगा — भाजपा विधायक, खींवसर (नागौर)

अनीता जाटव — कांग्रेस विधायक, हिंडौन (करौली)

ऋतु बनावत — निर्दलीय विधायक, बयाना (भरतपुर)

स्टिंग में खींवसर विधायक रेवंतराम डांगा पर सबसे गंभीर आरोप है। उन्होंने स्टिंगर से 10 लाख रुपये घर बुलाकर रिश्वत के रूप में लेने की बात कही और 40% तक कमीशन की मांग की। एक करोड़ रुपये के काम पर 40 लाख रुपये कमीशन की डील का जिक्र भी सामने आया। अन्य विधायकों ने भी विकास कार्यों की अनुशंसा पत्र जारी करने के एवज में प्रतिशत आधार पर कमीशन की बात कही।

लोकसभा में हनुमान बेनीवाल का बयान

हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा शून्यकाल में सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जनता विधायकों और सांसदों को अपने प्रतिनिधि के रूप में चुनती है ताकि वे उनके अधिकारों की रक्षा करें और हितों के लिए कार्य करें। लेकिन जब जनप्रतिनिधि खुद भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाते हैं, तो यह लोकतंत्र की नींव को कमजोर करता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि ऐसे आचरण पर कठोर कार्रवाई नहीं की जाती, तो यह संदेश जाएगा कि भ्रष्टाचार को सहन किया जा सकता है। बेनीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "न खाऊंगा, न खाने दूंगा" वाले बयान का हवाला देते हुए पूछा कि जब उनकी ही पार्टी के विधायक ऐसे कृत्यों में संलिप्त पाए जाते हैं और उन पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं होती, तो जनता प्रधानमंत्री की मंशा पर सवालिया निशान क्यों न लगाए?

उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि इस मामले में हस्तक्षेप कर ऐसे भ्रष्ट विधायकों को बर्खास्त किया जाए, क्योंकि उन्होंने न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाई है, बल्कि जनता के विश्वास को भी गहरा आघात पहुंचाया है।

राजस्थान सरकार की कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद राजस्थान सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तीनों विधायकों के विधायक निधि खातों को फ्रीज करने के आदेश दिए और उच्च स्तरीय जांच (SIT) के निर्देश जारी किए। विधानसभा की सदाचार समिति (Ethics Committee) ने भी तीनों विधायकों को तलब किया और उनका बयान दर्ज किया।

भाजपा ने अपने विधायक रेवंतराम डांगा को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जबकि कांग्रेस ने भी अपनी विधायक अनीता जाटव से स्पष्टीकरण मांगा। हालांकि, विपक्षी दलों और जनता में इस बात को लेकर नाराजगी है कि भ्रष्टाचार के ऐसे खुले सबूतों के बावजूद कार्रवाई अभी पर्याप्त नहीं दिख रही है।

लोकतंत्र पर सवाल

यह मामला विधायक निधि के दुरुपयोग की पुरानी समस्या को फिर से उजागर करता है। जनप्रतिनिधियों द्वारा जनता के विकास के लिए आवंटित फंड को व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल करना न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि नैतिक रूप से भी अक्षम्य है। हनुमान बेनीवाल के लोकसभा में मुद्दा उठाने से अब यह मामला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है और केंद्र से सख्त हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है।जनता अब सख्त कार्रवाई और दोषियों पर कानूनी शिकंजा कसने की उम्मीद कर रही है, ताकि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके और भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त न किया जाए।

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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