बंगाल में BJP सरकार बनते ही चर्चा में आया राजस्थान से जुड़ा ये चेहरा, आखिर कौन हैं नए कैबिनेट मंत्री अशोक कीर्तनिया?
पश्चिम बंगाल में BJP सरकार के गठन के बाद एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है—अशोक कीर्तनिया। राजस्थान से गहरा नाता रखने वाले इस नेता को सुवेंदु अधिकारी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। आखिर कौन हैं अशोक कीर्तनिया और क्यों मानी जा रही है उनकी जीत भाजपा के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में 9 मई 2026 का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल आर. एन. रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। राज्य में पहली बार भाजपा सरकार बनने के साथ ही कई नए चेहरे चर्चा में आए, लेकिन राजस्थान से जुड़े एक नेता ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं। यह नाम है अशोक कीर्तनिया।
सुवेंदु अधिकारी सरकार में अशोक कीर्तनिया को महत्वपूर्ण कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके बाद राजस्थान से लेकर पश्चिम बंगाल तक लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर अशोक कीर्तनिया कौन हैं और उनका राजस्थान से क्या संबंध है।
राजस्थान से जुड़ी हैं जड़ें
अशोक कीर्तनिया भले ही बंगाल की राजनीति का बड़ा चेहरा बन चुके हों, लेकिन उनकी पारिवारिक जड़ें राजस्थान से जुड़ी हुई हैं। वे उन प्रवासी राजस्थानी परिवारों में शामिल हैं, जो वर्षों पहले व्यापार और रोजगार के सिलसिले में राजस्थान से पश्चिम बंगाल जाकर बस गए थे। राजनीतिक रूप से बंगाल में सक्रिय रहने के बावजूद उनका राजस्थान की संस्कृति और सामाजिक परंपराओं से जुड़ाव आज भी बना हुआ है। यही कारण है कि उनकी सफलता को राजस्थान में भी गर्व के साथ देखा जा रहा है।
बंगाल में लगातार दूसरी बड़ी जीत
अशोक कीर्तनिया ने पहली बार 2021 में बनगांव उत्तर (SC) सीट से जीत हासिल की थी। इसके बाद 2026 के चुनाव में उन्होंने और भी बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने अपनी सीट को 40,670 वोटों के बड़े अंतर से जीतकर यह साबित कर दिया कि इलाके में उनकी मजबूत पकड़ है।
मतुआ समुदाय में मजबूत पकड़
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अशोक कीर्तनिया की सबसे बड़ी ताकत मतुआ समुदाय के बीच उनकी लोकप्रियता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में उनका प्रभाव काफी मजबूत माना जाता है। भाजपा की पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत के पीछे मतुआ वोट बैंक को एकजुट करने में अशोक कीर्तनिया की अहम भूमिका मानी जा रही है।
व्यवसायी से मंत्री बनने तक का सफर
करीब 52 वर्षीय अशोक कीर्तनिया राजनीति के साथ-साथ व्यवसाय से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय के दीनबंधु महाविद्यालय से B.A. की पढ़ाई की है। उनकी व्यवसायिक पृष्ठभूमि ने उन्हें संगठन प्रबंधन और लोगों से जुड़ने की समझ दी, जिसका फायदा भाजपा को संगठन विस्तार में मिला।
भाजपा की रणनीति में राजस्थान फैक्टर
इस चुनाव में भाजपा ने रणनीतिक रूप से राजस्थान से जुड़े 9 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। इनमें से 5 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। राजनीतिक जानकार इसे भाजपा की बड़ी रणनीतिक सफलता मान रहे हैं। इससे यह भी साफ हो गया कि बंगाल में प्रवासी राजस्थानी समुदाय अब राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाने लगा है।
राजस्थान से जुड़े भाजपा के 5 विजयी उम्मीदवार
- विजय ओझा – जोड़ासांको – 5797 वोट
- भरत कुमार झंवर – बेलडांगा – 13208 वोट
- अजय कुमार पोद्दार – कुल्टी – 26498 वोट
- राजेश कुमार – जगद्दल – 20909 वोट
- अशोक कीर्तनिया – बनगांव उत्तर – 40670 वोट
अशोक कीर्तनिया की जीत सिर्फ एक राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में प्रवासी राजस्थानियों के बढ़ते प्रभाव का संकेत भी मानी जा रही है। भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने के बाद अब उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।