राजस्थान में बजरी खनन बंद... कोर्ट के फैसले ने बढ़ाई ठेकेदारों की टेंशन
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में बजरी खनन से जुड़ी सभी माइनिंग लीज और एलओआई धारकों की गतिविधियों पर 20 जुलाई तक रोक लगा दी है।
राजस्थान में बजरी खनन को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में सभी माइनिंग लीज धारकों और एलओआई (लेटर ऑफ इंटेंट) धारकों की खनन गतिविधियों पर 20 जुलाई तक रोक लगा दी है। इस आदेश के बाद प्रदेश के कई बड़े बजरी खनन क्षेत्रों में काम पूरी तरह ठप हो गया है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश जारी किया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार का बजरी खनन नहीं किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई अब 20 जुलाई को होगी।
सुनवाई में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान एलओआई धारकों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वे केवल आवंटी हैं और अभी तक उन्होंने खनन कार्य शुरू नहीं किया है। इसलिए उनके आवंटन को यथावत रखा जाए।
वहीं दूसरी ओर माइनिंग लीज धारकों के वकीलों ने कहा कि वे केवल एलओआई धारक नहीं बल्कि पिछले छह महीनों से नियमित रूप से खदानों का संचालन कर रहे हैं। उनका कहना था कि बिना पक्ष सुने अचानक खदानें बंद कर दी गईं, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। खनन बंद होने के कारण करीब 20 हजार टन बजरी खदान क्षेत्रों में बेकार पड़ी हुई है।
हालांकि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल किसी को राहत नहीं दी और 20 जुलाई तक रोक जारी रखने का फैसला किया।
किन जिलों में सबसे ज्यादा असर?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सीधा असर भीलवाड़ा, अजमेर, टोंक और सवाईमाधोपुर जिलों में देखने को मिलेगा। इन जिलों में बजरी की एक भी लीज पर फिलहाल खनन नहीं हो सकेगा।
राजस्थान में निर्माण कार्यों के लिए बजरी एक महत्वपूर्ण संसाधन मानी जाती है। ऐसे में खनन बंद होने से आने वाले समय में निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
क्यों दायर हुई थी एसएलपी?
यह पूरा मामला राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच के 20 जनवरी के फैसले से जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट ने खनिज विभाग द्वारा बजरी प्लॉट्स की नीलामी को निरस्त करते हुए जमा राशि लौटाने के आदेश दिए थे।
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की गई। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए मामले से जुड़े प्रतिवादी ‘बृजमोहन सपूत कला संस्कृति सेवा संस्थान’ समेत अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
क्या है पूरा विवाद?
बृजमोहन सपूत कला संस्कृति सेवा संस्थान ने आरोप लगाया था कि बजरी लीज आवंटन में सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों की अनदेखी की गई। संस्थान का कहना था कि जिन क्षेत्रों में पहले से खनन हो रहा था, उन्हीं स्थानों पर दोबारा लीज आवंटित कर दी गई।
संस्थान की अपील पर राजस्थान हाईकोर्ट ने खनिज विभाग के आवंटन पर रोक लगाते हुए सभी लीज और एलओआई धारकों की जमा राशि लौटाने के निर्देश दिए थे। बाद में दायर पुनर्विचार याचिका को भी हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
प्रदेश के राजस्व और निर्माण कार्यों पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई तक यह रोक जारी रहती है तो राज्य सरकार के राजस्व पर बड़ा असर पड़ सकता है। साथ ही सड़क, भवन और निजी निर्माण परियोजनाओं की गति भी प्रभावित हो सकती है।
निर्माण क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि खनन बंद रहने से बजरी की उपलब्धता घटेगी और कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है। फिलहाल अब सभी की नजरें 20 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।