ड्रीम प्रोजेक्ट में आग के बाद सियासत गरमाई, सांसद का बड़ा हमला—क्या सरकार से हुई गंभीर चूक?
एक बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट में आग लगने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्ष ने सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी तैयारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं
राजस्थान के बहुचर्चित पचपदरा रिफाइनरी प्रोजेक्ट में आगजनी की घटना के बाद प्रदेश की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। इस घटना ने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि इसे लेकर सियासी आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं।
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक और सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने इसे केवल एक हादसा मानने से इनकार करते हुए सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक और संभावित लापरवाही करार दिया है।
पीएम दौरे से पहले उठे गंभीर सवाल
हनुमान बेनीवाल ने कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री का दौरा प्रस्तावित हो और उससे ठीक पहले इतनी संवेदनशील औद्योगिक परियोजना में आग लग जाए, तो इसे सामान्य घटना नहीं माना जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की पर्याप्त समीक्षा की थी या पूरी तैयारियां केवल दिखावे तक सीमित थीं।
उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधे तौर पर पूछा कि इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और जिम्मेदारी किसकी तय होगी। बेनीवाल ने कहा कि यह घटना केवल एक तकनीकी विफलता नहीं बल्कि एक गंभीर चेतावनी है।
सरकार की तैयारियों पर हमला
सांसद ने आरोप लगाया कि रिफाइनरी जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की सुरक्षा को लेकर सरकार लापरवाह रही है। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में बड़े निवेश और औद्योगिक विकास की बात की जाती है, तब इस तरह की घटनाएं निवेशकों के भरोसे को भी कमजोर करती हैं।
बेनीवाल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री दौरे को लेकर तैयारियां जल्दबाजी में की गईं, जिससे सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई।
मुख्यमंत्री से सार्वजनिक जिम्मेदारी की मांग
हनुमान बेनीवाल ने मांग की है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस पूरे मामले की सार्वजनिक जिम्मेदारी लें। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री स्वयं इस कार्यक्रम की निगरानी कर रहे थे, तो इस चूक की जवाबदेही भी उन्हीं की बनती है।
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल और तेज हो गई है और यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या आगामी कार्यक्रमों से पहले सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव किया जाएगा।
सियासी असर बढ़ा
यह घटना अब केवल एक औद्योगिक हादसा नहीं रह गई है, बल्कि इसे प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा माना जा रहा है। आगामी चुनावों से पहले इस तरह की घटनाएं सरकार के लिए चुनौती बन सकती हैं।