गिरल आंदोलन में 30 दिन से डटे रविंद्र सिंह भाटी की बड़ी जीत... पीड़ित परिवार को ₹37 लाख मुआवजा और 3 सरकारी नौकरियां मंजूर!
बाड़मेर में गिरल लिग्नाइट माइन्स विवाद और मोर्चरी के बाहर चल रहा धरना आखिरकार समाप्त हो गया है।
राजस्थान के बाड़मेर जिले में पिछले कई दिनों से गरमाया हुआ गिरल लिग्नाइट माइन्स विवाद और मोर्चरी के बाहर चल रहा धरना आखिरकार बड़े समझौते के साथ समाप्त हो गया है। प्रशासन, जनप्रतीनिधियों और पीड़ित पक्ष के बीच हुई मैराथन वार्ता के बाद सहमति का रास्ता साफ हुआ, जिसके बाद प्रशासन और पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है।
मंत्री के.के. विश्नोई और विधायक आदूराम मेघवाल ने निभाई मुख्य भूमिका
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार के मंत्री के.के. विश्नोई ने इस पूरे घटनाक्रम में सक्रिय मध्यस्थता की। उनके साथ ही चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल की मौजूदगी में हुई वार्ता सफल रही। जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हुए इस समन्वय के बाद ही धरने पर बैठी संघर्ष समिति और परिजनों ने मांगों पर सहमति जताई।
पीड़ित परिवार के लिए ₹37 लाख का मुआवजा और 3 नौकरियां
समझौते के तहत पीड़ित परिवार को संबल देने के लिए बड़े पैकेज की घोषणा की गई है:
सरकारी और उपक्रम स्तर पर: मृतक के आश्रितों को ₹27 लाख का नकद मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही परिवार के तीन सदस्यों (मृतक की पत्नी और उनके दो बेटों) को सरकारी उपक्रम में योग्यता अनुसार नौकरी दी जाएगी।
विधायक रविंद्र सिंह भाटी का बड़ा ऐलान: शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने अपनी संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित परिवार को निजी तौर पर ₹10 लाख की अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।
55 दिन पुराना मजदूरों का आंदोलन भी समाप्ति की ओर
इस मुख्य समझौते के साथ ही पिछले 55 दिनों से गिरल लिग्नाइट माइन्स के बाहर अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे मजदूरों का गतिरोध भी टूटने की कगार पर है। गौरतलब है कि इस आंदोलन को धार देने के लिए शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी खुद पिछले 30 दिनों से मजदूरों के साथ जमीन पर धरने पर बैठे हुए थे।
आज रात 8:30 बजे गिरल लिग्नाइट माइन्स के बाहर आंदोलनरत मजदूरों के प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच एक और अंतिम दौर की वार्ता तय की गई है। इस वार्ता के सकारात्मक परिणाम आने की पूरी उम्मीद है, जिसके बाद पिछले करीब दो महीने से चला आ रहा यह बड़ा गतिरोध पूरी तरह समाप्त हो जाएगा