जयपुर में NSUI का 'अरावली बचाओ' पैदल मार्च: हनुमान बेनीवाल की आपत्ति के बाद मंच शिफ्ट, सचिन पायलट सहित कई नेता होंगे शामिल

जयपुर में NSUI द्वारा 26 दिसंबर 2025 को 'अरावली बचाओ-भविष्य बचाओ' पैदल मार्च आयोजित किया गया, जिसमें सचिन पायलट सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च का उद्देश्य अरावली पर्वतमाला के संरक्षण की मांग करना था। पहले हनुमान बेनीवाल के सरकारी आवास के सामने मंच लगाया गया था, लेकिन उनकी आपत्ति पर इसे 200 मीटर आगे शिफ्ट किया गया। यह मार्च अरावली की नई परिभाषा और खनन विवाद के खिलाफ चल रहे व्यापक आंदोलन का हिस्सा है।

Dec 26, 2025 - 12:38
जयपुर में NSUI का 'अरावली बचाओ' पैदल मार्च: हनुमान बेनीवाल की आपत्ति के बाद मंच शिफ्ट, सचिन पायलट सहित कई नेता होंगे शामिल

जयपुर। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) राजस्थान ने पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर बड़ा कदम उठाते हुए 26 दिसंबर 2025 (शुक्रवार) को जयपुर में 'अरावली बचाओ-भविष्य बचाओ' अभियान के तहत पैदल मार्च का आयोजन किया है। इस मार्च का मुख्य उद्देश्य अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण की मांग करना है, जो उत्तर भारत की पर्यावरणीय जीवनरेखा मानी जाती है। मार्च में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शामिल होंगे। NSUI प्रदेश अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में यह पैदल मार्च जालूपुरा थाने के सामने से शुरू होकर जयपुर कलेक्ट्रेट पर समाप्त होगा। मार्च की अनुमानित दूरी लगभग ढाई किलोमीटर है। आयोजकों का कहना है कि इस मार्च के जरिए राज्य सरकार से मांग की जाएगी कि अरावली की सभी पहाड़ियों को नोटिफाइड क्षेत्र घोषित कर पूर्ण संरक्षण प्रदान किया जाए। NSUI ने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आमजन से अपील की है कि वे इस शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होकर एकजुटता दिखाएं।

मंच शिफ्ट का विवाद इस कार्यक्रम की तैयारी के दौरान एक विवाद भी सामने आया। जालूपुरा क्षेत्र में नागौर सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के नेता हनुमान बेनीवाल के सरकारी आवास के ठीक सामने कार्यक्रम के लिए मंच लगाया गया था। बेनीवाल ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद आयोजकों ने मंच को करीब 200 मीटर आगे शिफ्ट कर दिया। इस बदलाव से कार्यक्रम की तैयारियां प्रभावित नहीं हुईं, और मार्च निर्धारित समय पर आयोजित होगा।

अरावली संरक्षण अभियान का व्यापक संदर्भ यह पैदल मार्च अरावली पर्वतमाला को बचाने के चल रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले और केंद्र सरकार की प्रस्तावित नीतियों के बाद अरावली की परिभाषा को लेकर विवाद गहरा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो थार मरुस्थल को आगे बढ़ने से रोकती है, भूजल रिचार्ज करती है, जैव विविधता को संरक्षण देती है और दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत की हवा को शुद्ध रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।राजस्थान में अरावली का बड़ा हिस्सा फैला हुआ है, और अवैध खनन तथा निर्माण गतिविधियों से इसकी पहाड़ियां खतरे में हैं। कांग्रेस सहित विपक्षी दल केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों पर खनन माफिया को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहे हैं। सचिन पायलट ने इस मुद्दे पर सक्रियता दिखाते हुए कहा है कि अरावली को बचाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। NSUI का यह मार्च अभियान को नई धार देने वाला साबित हो सकता है।इसके अलावा, कांग्रेस पार्टी ने 27 दिसंबर से प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान की घोषणा की है, जिसमें सभी जिला मुख्यालयों पर पैदल मार्च और प्रदर्शन होंगे। अन्य सामाजिक संगठन और पर्यावरणविद् भी अलग-अलग जगहों पर विरोध जता रहे हैं। कुल मिलाकर, अरावली संरक्षण अब राजस्थान में एक बड़ा राजनीतिक और पर्यावरणीय मुद्दा बन चुका है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.