रूस में ड्रोन हमले में ओडिशा के मजदूर की मौत: बहनों की शादी के लिए लिया था कर्ज, अब परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

रूस में कंस्ट्रक्शन साइट पर हुए यूक्रेनी ड्रोन हमले में ओडिशा के मजदूर रमैया की मौत हो गई।

May 29, 2026 - 11:56
रूस में ड्रोन हमले में ओडिशा के मजदूर की मौत: बहनों की शादी के लिए लिया था कर्ज, अब परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

ओडिशा के गंजाम जिले के एक छोटे से गांव माधबांधा में इन दिनों मातम पसरा हुआ है। परिवार के जवान बेटे रमैया की मौत ने पूरे घर की जिंदगी बदल दी है। रमैया रूस में कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करता था, जहां यूक्रेन के ड्रोन हमले में उसकी जान चली गई। परिवार अभी तक इस सदमे से बाहर नहीं निकल पाया है।

आखिरी कॉल में कहा था- पैसे भेज रहा हूं

16 मई की रात रमैया ने अपने बड़े भाई गणेश को फोन किया था। उसने बताया कि वह घर खर्च के लिए 22 हजार रुपए भेज रहा है। उसने मां से भी बात की और कहा कि नाइट ड्यूटी पर जाने की तैयारी कर रहा है। परिवार को क्या पता था कि यह उसकी आखिरी बातचीत होगी।

अगली सुबह करीब 5 बजे रमैया के रूम पार्टनर देवेंद्र का फोन आया। उसने बताया कि जिस कंस्ट्रक्शन साइट पर वे काम कर रहे थे, वहां यूक्रेन की ओर से कई ड्रोन हमले किए गए। रमैया भी उसी हमले की चपेट में आ गया।

कुछ ही घंटों बाद उसकी मौत की खबर परिवार तक पहुंच गई।

बहनों की शादी के लिए लिया था 30 लाख का कर्ज

रमैया बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखता था। परिवार में माता-पिता और भाई-बहन सभी दिहाड़ी मजदूरी करते थे। बहनों की शादी के लिए परिवार ने करीब 30 लाख रुपए का कर्ज लिया था। इसी कर्ज को चुकाने के लिए रमैया रूस कमाने गया था।

वह मॉस्को में तुर्की की ऑयल एंड गैस कंपनी में स्टील इरेक्टर के तौर पर काम कर रहा था। हर महीने करीब 42 हजार रुपए कमाता था, जिसमें से 35 हजार रुपए घर भेज देता था।

बड़े भाई गणेश बताते हैं कि रमैया परिवार का सबसे बड़ा सहारा था। फरवरी में वह छुट्टी लेकर गांव आया था और फिर 22 मार्च को वापस रूस चला गया था।

मां बोलीं- अब कौन सहारा देगा

रमैया की मां बेटे को याद कर फूट-फूटकर रो पड़ती हैं। वे कहती हैं-

“हम मजदूरी करके मुश्किल से 200-500 रुपए कमा पाते हैं। कई दिन काम नहीं मिलता तो भूखे सोना पड़ता है। रमैया ही घर का सहारा था। अब हमारा क्या होगा?”

मां बताती हैं कि रमैया कहता था कि अब माता-पिता को मजदूरी नहीं करने देगा। वह गांव लौटकर छोटा-मोटा कारोबार शुरू करना चाहता था और शादी की भी तैयारी कर रहा था, लेकिन उससे पहले ही यह हादसा हो गया।

ड्रोन हमले में दो और ओडिशा के मजदूर घायल

इस हमले में केवल रमैया ही नहीं, ओडिशा के दो और युवक खेतराबासी रेड्डी और तेजेश्वर रेड्डी भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। दोनों मॉस्को के अस्पताल में भर्ती हैं।

खेतराबासी की पत्नी ने बताया कि उनके पति के चेहरे और गर्दन पर गंभीर चोटें आई हैं। परिवार के पास उन्हें भारत लाने तक के पैसे नहीं हैं, इसलिए कंपनी वहीं इलाज करा रही है।

खेतराबासी ने फोन पर बताया कि 17 मई को कुल सात ड्रोन हमले हुए थे, जिनकी चपेट में करीब 15 लोग आए। हमले में अजरबैजान का एक मजदूर भी मारा गया।

वहीं तेजेश्वर रेड्डी की मां ने बताया कि उनका बेटा फिलहाल बोलने की हालत में नहीं है। सिर्फ वीडियो कॉल पर परिवार को देख पाता है।

66 लाख मुआवजे का दावा, परिवार बोला- अब तक नहीं मिला

रमैया को रूस भेजने वाली एजेंसी मायकोन इंजीनियरिंग ट्रेनिंग एंड टेस्टिंग सेंटर के मालिक बासुदेव रेड्डी ने बताया कि कंपनी ने परिवार को 66 लाख रुपए मुआवजा देने का आश्वासन दिया है।

हालांकि परिवार का कहना है कि अभी तक पूरी राशि नहीं मिली है। डेथ सर्टिफिकेट और जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया भी अधूरी है।

परिवार ने प्रधानमंत्री कार्यालय से भी मदद मांगी, लेकिन अब तक कोई ठोस सहायता नहीं मिली।

विदेशों में जान गंवा रहे भारतीय मजदूर

भारत से हर साल लाखों मजदूर बेहतर कमाई की उम्मीद में विदेश जाते हैं। लेकिन कई बार यह सफर जानलेवा साबित हो जाता है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2021 से 2025 के बीच विदेशों में काम करने गए 37,740 भारतीय मजदूरों की मौत हुई है। यानी हर दिन औसतन 20 से ज्यादा भारतीय कामगार विदेश में जान गंवा रहे हैं।

सिर्फ 2025 में ही 7,854 भारतीय मजदूरों की मौत दर्ज की गई। इनमें सबसे ज्यादा मौतें यूएई और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों में हुईं। वहीं पिछले एक साल में रूस में 26 भारतीयों की मौत की पुष्टि हुई है।

गांवों से रूस जाने की बढ़ती मजबूरी

ओडिशा के गंजाम और केंद्रापाड़ा जिले से बड़ी संख्या में युवा रूस जा रहे हैं। गरीबी, बेरोजगारी और गांवों में काम की कमी उन्हें हजारों किलोमीटर दूर खतरनाक इलाकों में काम करने को मजबूर कर रही है।

रमैया के चाचा नारायण कहते हैं-

“अगर गांव में रोजगार मिलता तो कोई अपनी जान जोखिम में डालकर रूस क्यों जाता? अब बूढ़े मां-बाप की देखभाल कौन करेगा?”

रमैया की मौत सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उन हजारों भारतीय मजदूरों की कहानी है, जो बेहतर जिंदगी की तलाश में विदेश तो जाते हैं, लेकिन कई बार उनकी वापसी सिर्फ ताबूत में होती है।

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