NEET UG 2025 स्ट्रे वैकेंसी राउंड: MCC ने जारी की अंतिम क्लोजिंग रैंक्स, AIIMS मदुरै बना कैंडिडेट्स की आखिरी पसंद
एमसीसी ने NEET UG 2025 के स्ट्रे वैकेंसी राउंड की अंतिम क्लोजिंग रैंक्स जारी की; जनरल में MBBS AIQ 27,332 और AIIMS 16,728 तक बंद, AIIMS मदुरै रहा कैंडिडेट्स की आखिरी पसंद।
कोटा, 15 नवंबर 2025: मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने NEET UG 2025 के स्ट्रे वैकेंसी राउंड का प्रोविजनल सीट अलॉटमेंट रिजल्ट जारी कर दिया है। यह राउंड उन सीटों के लिए आयोजित किया गया था, जो राउंड-1, राउंड-2, राउंड-3 और स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड में भी खाली रह गई थीं। इस अंतिम राउंड में ऑल इंडिया कोटा (15% AIQ) के तहत MBBS, AIIMS संस्थानों और कुछ BDS सीटों का आवंटन हुआ।करियर काउंसलिंग विशेषज्ञ पारिजात मिश्रा ने बताया कि इस राउंड में AIIMS मदुरै कई कैंडिडेट्स की लास्ट चॉइस बना रहा। कारण साफ है—देश के टॉप AIIMS जैसे दिल्ली, भोपाल, जोधपुर, रायपुर, पटना आदि की सीटें पहले ही भर चुकी थीं। ऐसे में तमिलनाडु का नया AIIMS मदुरै ही एकमात्र विकल्प बचा था।
ऑल इंडिया कोटा (15% AIQ)
– MBBS क्लोजिंग रैंक्सस्ट्रे वैकेंसी राउंड में ऑल इंडिया 15% कोटा के तहत MBBS सीटों की अंतिम क्लोजिंग रैंक इस प्रकार रही:जनरल कैटेगरी; 27,332, EWS; 30,862, OBC; 27,307, SC; 1,38,863, ST; 1,64,804
प्रमुख बातें:जनरल और OBC की क्लोजिंग रैंक में महज 25 अंकों का अंतर।,EWS कैटेगरी में रैंक थोड़ी ऊंची (30,862) रही, यानी सीटें कम थीं।, SC/ST में क्लोजिंग रैंक 1.38 लाख और 1.64 लाख तक पहुंची, जो दर्शाता है कि आरक्षित वर्गों में भी सीमित सीटें ही बची थीं।
AIIMS संस्थानों में क्लोजिंग रैंक्स; जनरल;16,728, EWS;19,825, OBC;26,016, SC;1,04,477, ST; 1,63,006
खास बातें:AIIMS में जनरल की क्लोजिंग रैंक 16,728 रही, जो AIQ MBBS (27,332) से काफी कम है। यानी AIIMS में प्रवेश के लिए टॉप रैंक जरूरी थी।,AIIMS मदुरै इस राउंड में अंतिम विकल्प बना। कई स्टूडेंट्स ने इसे इसलिए चुना क्योंकि अन्य AIIMS की सीटें पहले ही अलॉट हो चुकी थीं।, OBC में AIIMS की क्लोजिंग रैंक 26,016 रही, जो AIQ MBBS से करीब समान है।
BDS कोर्स की स्थिति: रिपोर्ट में BDS की अलग क्लोजिंग रैंक का उल्लेख नहीं है, लेकिन कुछ सरकारी डेंटल कॉलेजों की BDS सीटें इस राउंड में भरी गईं।,सामान्यतः BDS की क्लोजिंग रैंक MBBS से अधिक होती है। कुछ राज्यों में BDS की रैंक 50,000 से 1 लाख तक भी जा सकती है।