बाड़मेर नगर परिषद कंगाल: दावों के 'महल' गिरे, 20 करोड़ का बजट फाइलों में दफन; क्या सिर्फ नेताओं की गलियां चमकेंगी?

"बाड़मेर नगर परिषद का खजाना खाली, 20 करोड़ का बजट फाइलों में दबा! 54 सड़कों में से 15 VIP गलियां तो चुन ली गईं, लेकिन मार्च बीतने के बाद भी बजट का अकाल। देखिए बाड़मेर के विकास की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।"

Mar 18, 2026 - 17:28
Mar 18, 2026 - 17:31
बाड़मेर नगर परिषद कंगाल: दावों के 'महल' गिरे, 20 करोड़ का बजट फाइलों में दफन; क्या सिर्फ नेताओं की गलियां चमकेंगी?
बाड़मेर नगर परिषद कंगाल: दावों के 'महल' गिरे, 20 करोड़ का बजट फाइलों में दफन; क्या सिर्फ नेताओं की गलियां चमकेंगी?

बाड़मेर। "दावे करोड़ों के, खजाना खाली... और विकास सिर्फ फाइलों में आली!" यह पंक्तियाँ आज बाड़मेर नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सटीक बैठती हैं। जहाँ एक ओर सरकार ने बजट का ढिंढोरा पीटा, वहीं दूसरी ओर हकीकत यह है कि शहर की सड़कें अब राजनीति की धूल फांक रही हैं। भ्रष्टाचार और बंदरबांट के गड्ढों में विकास का रास्ता कहीं खो गया है।

VIP सड़कों का गणित और जनता का दर्द

पूरा मामला साल 2025-26 के बजट से जुड़ा है। राज्य सरकार ने बाड़मेर के लिए 20 करोड़ रुपए की सड़कों की सौगात दी थी। नगर परिषद ने आनन-फानन में 54 सड़कों की एक विस्तृत सूची तैयार की। लेकिन इस लिस्ट के पीछे का गणित चौंकाने वाला है। 54 में से 15 सड़कें विशेष रूप से भाजपा नेताओं के मोहल्लों और कॉलोनियों के लिए चुनी गईं। इन 'VIP सड़कों' पर 5 करोड़ 5 लाख रुपए से अधिक की राशि खर्च होनी प्रस्तावित है।

टेंडर के 4 महीने बाद भी 'फूटी कौड़ी' नहीं

हैरानी की बात यह है कि घोषणा के एक साल बाद और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के 4 महीने बीत जाने के बावजूद, राज्य सरकार ने नगर परिषद को एक रुपया भी जारी नहीं किया है। 20 अगस्त 2025 को स्वीकृत हुए इस 20 करोड़ के बजट का हाल यह है कि:

  • कुल सड़कें: 54

  • काम शुरू: केवल 11 सड़कों पर

  • काम ठप: 43 सड़कें बजट के अभाव में अधर में

ठेकेदारों ने खड़े किए हाथ, अधिकारी बेबस

नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि काम 5 फेज में शुरू किया गया था और सरकार ने आश्वासन दिया था कि 50% बजट मार्च से पहले मिल जाएगा। लेकिन मार्च बीतने को है और खजाना अब भी खाली है। बिना भुगतान के ठेकेदारों ने अब काम करने से साफ मना कर दिया है।

सवाल प्रशासन और सरकार से

आज बाड़मेर की जनता पूछ रही है कि जब जेब में पैसे नहीं थे, तो विकास के ये हवाई किले क्यों बनाए गए? क्या बाड़मेर का विकास सिर्फ 'चुनिंदा रसूखदारों' की गलियों तक सीमित रहेगा? एक तरफ नेताजी अपने इलाकों में चमकती सड़कें बनवाकर वाहवाही लूटने की तैयारी में हैं, तो दूसरी तरफ आम नागरिक टूटी सड़कों पर हिचकोले खाने को मजबूर है।

अब देखना यह होगा कि क्या सरकार अपनी नींद से जागकर इस कंगाली की हालत में डूबी नगर परिषद को उबारेगी, या बाड़मेर की जनता को अभी और धूल फांकनी पड़ेगी।

Kashish Sain Bringing truth from the ground