15 करोड़ का झांसा और जाली MOU का खेल: क्या राजस्थान विधायक के बेटे ने किया करोड़ों का घोटाला? जानें ठगी की पूरी कहानी

"खादी की आड़ में साज़िश या फिर करोड़ों का व्यापारिक खेल? राजस्थान के एक रसूखदार विधायक के बेटे पर लगा है असम सरकार के नाम पर महाठगी का आरोप। 4.81 करोड़ की इस 'यूनिफॉर्म मिस्ट्री' ने जयपुर से गुवाहाटी तक हड़कंप मचा दिया है। आखिर क्या है उस फर्जी MOU का सच?"

Mar 18, 2026 - 17:44
15 करोड़ का झांसा और जाली MOU का खेल: क्या राजस्थान विधायक के बेटे ने किया करोड़ों का घोटाला? जानें ठगी की पूरी कहानी

भीलवाड़ा/जयपुर। राजस्थान की राजनीति में 'सत्ता और रसूख' के दुरुपयोग का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) से भाजपा विधायक गोपाल खंडेलवाल के बेटे मुकेश खंडेलवाल पर एक कपड़ा कारोबारी से 4.81 करोड़ रुपये की ठगी करने का संगीन आरोप लगा है। इस पूरे खेल में 'असम सरकार' के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेजों का ऐसा जाल बुना गया, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है।

यूनिफॉर्म का झांसा और फर्जी MOU का खेल

अहमदाबाद के पीड़ित कारोबारी अनिल कुमार देवासी ने मुख्यमंत्री कार्यालय और पुलिस को दी गई शिकायत में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आरोप है कि साल 2022 में मुकेश खंडेलवाल ने खुद को रसूखदार बताते हुए कारोबारी को झांसा दिया कि वह उसे असम सरकार से 15 करोड़ रुपये का स्कूल यूनिफॉर्म का टेंडर दिला सकता है।

भरोसा जीतने के लिए कारोबारी को गुवाहाटी बुलाया गया। वहां कथित तौर पर असम सरकार के फर्जी लेटरहेड, जाली मुहरें और जाली MOU (करारनामा) तैयार कर व्यापारी से हस्ताक्षर कराए गए। कारोबारी को लगा कि उसे एक बड़ा सरकारी प्रोजेक्ट मिल गया है, लेकिन उसे भनक भी नहीं थी कि वह एक सोची-समझी साजिश का शिकार हो रहा है।

दो चरणों में हुई 'महाठगी'

शिकायत के अनुसार, ठगी को बड़ी चालाकी से दो हिस्सों में अंजाम दिया गया:

  1. कमीशन और दलाली: टेंडर पक्का कराने और 'सेटिंग' के नाम पर करीब 2.15 करोड़ रुपये कथित तौर पर हवाला के जरिए लिए गए।

  2. माल की सप्लाई: झांसे में आकर कारोबारी ने जनवरी 2023 में 2.66 करोड़ रुपये की तैयार यूनिफॉर्म के दो बड़े कंसाइनमेंट बताए गए पते पर भेज दिए।

जब महीनों बाद भी भुगतान नहीं हुआ, तो पीड़ित ने असम के संबंधित सरकारी विभाग में जाकर जांच की। वहां पता चला कि ऐसा कोई टेंडर कभी जारी ही नहीं हुआ था और जो दस्तावेज उसे दिखाए गए थे, वे पूरी तरह फर्जी थे।

विधायक पिता से मिलवाकर जीता 'भरोसा'?

पीड़ित अनिल कुमार देवासी का सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब उसने अपने पैसे वापस मांगे, तो उसे जयपुर बुलाया गया। वहां उसे कथित तौर पर विधायक गोपाल खंडेलवाल से मिलवाया गया ताकि उसे सुरक्षा का अहसास हो और वह कानूनी कार्रवाई न करे। कारोबारी का दावा है कि विधायक के सामने उसे भुगतान का आश्वासन दिया गया, लेकिन आज तक उसे एक रुपया भी वापस नहीं मिला।

आरोपी का पक्ष: 'यह केवल व्यापारिक विवाद है'

दूसरी ओर, आरोपी मुकेश खंडेलवाल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है:

"मैंने कोई ठगी नहीं की है। हमारे बीच एक वैध व्यापारिक एग्रीमेंट हुआ था। अधिकांश रकम पहले ही लौटाई जा चुकी है। यह केवल लेनदेन का आपसी विवाद है जिसे ठगी का रूप दिया जा रहा है।"

जांच के घेरे में 'सत्ता की हनक'

फिलहाल, पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें खोलने में जुटी है। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी दस्तावेजों के साथ इतनी बड़ी जालसाजी बिना किसी बड़े संरक्षण के संभव है? क्या यह वाकई एक 'व्यापारिक चूक' है या फिर सत्ता की हनक में बुना गया 'फर्जीवाड़े का फंदा'?

जांच की आंच अब मांडलगढ़ से लेकर जयपुर और गुवाहाटी तक फैलने की उम्मीद है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground