होर्मुज पार कर आया भारतीय एलपीजी टैंकर 'शिवालिक': 46,000 टन गैस लेकर मुंद्रा पहुंचा, ईरान-इजरायल-अमेरिका जंग के बीच गैस संकट टला – 32.4 लाख घरेलू सिलेंडरों की आपूर्ति सुनिश्चि

ईरान-इजरायल-अमेरिका जंग के बीच होर्मुज पार कर भारतीय टैंकर 'शिवालिक' मुंद्रा पहुंचा। 46,000 टन एलपीजी (32.4 लाख सिलेंडर बराबर) लेकर आया। दूसरे टैंकर 'नंदा देवी' भी रास्ते में। कूटनीतिक प्रयासों से संकट टला, घरेलू गैस आपूर्ति सुरक्षित।

Mar 17, 2026 - 13:41
होर्मुज पार कर आया भारतीय एलपीजी टैंकर 'शिवालिक': 46,000 टन गैस लेकर मुंद्रा पहुंचा, ईरान-इजरायल-अमेरिका जंग के बीच गैस संकट टला – 32.4 लाख घरेलू सिलेंडरों की आपूर्ति सुनिश्चि

मुंद्रा (गुजरात)/नई दिल्ली, 17 मार्च 2026: मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी, लेकिन भारतीय प्रयासों से बड़ा राहत भरा समाचार आया है। भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर 'शिवालिक' (Shivalik) सोमवार 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंच गया। यह टैंकर कतर से लगभग 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) लेकर आया है, जो करीब 32.4 लाख घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के बराबर है। इससे देश में गैस की बढ़ती कमी का खतरा काफी हद तक टल गया है।

'शिवालिक' के मुंद्रा पहुंचने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। टैंकर की लंबाई करीब 225 मीटर है और यह शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) का जहाज है। इसमें से 20,000 मीट्रिक टन गैस मुंद्रा में उतारी जाएगी, जबकि बाकी 26,000 मीट्रिक टन मंगलौर बंदरगाह पर पहुंचाया जाएगा। शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि 'शिवालिक' के अलावा दूसरा भारतीय टैंकर 'नंदा देवी' (Nanda Devi) भी होर्मुज पार कर चुका है और कल (17 मार्च) तक कांडला पहुंच सकता है। दोनों जहाजों में कुल 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी है।

यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि पिछले दो हफ्तों से ईरान ने होर्मुज में कई देशों के जहाजों को रोक रखा था। जंग के कारण वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो रही थी और भारत जैसे देशों में एलपीजी की कमी महसूस होने लगी थी। भारत हर साल कतर और अन्य खाड़ी देशों से करोड़ों टन एलपीजी आयात करता है। घरेलू उत्पादन सीमित होने के कारण 70% से ज्यादा गैस विदेश से आती है। युद्ध शुरू होने के बाद कई भारतीय जहाज फंस गए थे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय के प्रयासों से ईरान ने भारतीय जहाजों को विशेष छूट दे दी। ईरान के भारत में राजदूत मोहम्मद फतहाली ने कहा कि दोनों देशों के बीच अच्छे संबंधों के कारण यह संभव हुआ।

भारतीय नौसेना ने भी सुरक्षा के लिए युद्धपोत तैनात किए थे। टैंकर के सुरक्षित पार होने पर नौसेना की निगरानी में यह यात्रा पूरी हुई। मुंद्रा बंदरगाह पर प्राथमिकता से बर्थिंग दी गई और डॉक्यूमेंटेशन तुरंत पूरा किया गया। अब गैस को देशभर के वितरण केंद्रों पर भेजा जाएगा। इससे आम घरों में सिलेंडर की कमी नहीं होगी। विशेष रूप से रमजान और गर्मियों के मौसम में गैस की मांग बढ़ती है, ऐसे में यह आपूर्ति बड़ी राहत है।

यह घटना भारत की ऊर्जा सुरक्षा की मजबूती दिखाती है। शिपिंग मंत्रालय ने कहा कि बाकी 22 भारतीय जहाजों (जिनमें कुछ एलपीजी और क्रूड कैरियर हैं) को भी निकालने के लिए ईरान से बातचीत जारी है। विदेश सचिव ने कहा, “हमारी कूटनीति काम कर रही है। ऊर्जा आपूर्ति बाधित नहीं होगी।”कुल मिलाकर 'शिवालिक' का आगमन सिर्फ एक जहाज की सफल यात्रा नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक सफलता का प्रतीक है। घरेलू उपभोक्ताओं को अब सिलेंडर की कतारों से राहत मिलेगी। फैंस और व्यापारियों ने भी राहत की सांस ली। आने वाले दिनों में और जहाजों के आने की उम्मीद है। यह घटना याद दिलाती है कि जंग के समय भी सही कूटनीति और सुरक्षा व्यवस्था से आपूर्ति चेन बरकरार रखी जा सकती है

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.