जालोर के बहुचर्चित गणपत सिंह हत्याकांड में बड़ा खुलासा: ब्लैकमेलिंग के कारण की गई हत्या, तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया
जालोर के मांडोली गांव में 27 अगस्त 2024 को किराना व्यापारी गणपत सिंह की कीचड़ में मिली लाश के मामले में 18 महीने बाद पुलिस ने बड़ा खुलासा किया। अवैध संबंधों को लेकर ब्लैकमेलिंग के कारण हत्या हुई। पड़ोसी गजेंद्र सिंह, लच्छुदेवी और वागाराम ने मिलकर साजिश रची; लच्छुदेवी ने सुनसान जगह पर बुलाकर हत्या की। तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। परिवार की 80 वर्षीय मां हवा कंवर लंबे समय से भूख हड़ताल पर थीं, गिरफ्तारी के बाद न्याय मिलने की बात कही और फांसी की मांग की। विधायक रविंद्र भाटी ने चेतावनी दी थी कि जल्द कार्रवाई न हुई तो बड़ा चक्काजाम होगा।
जालोर जिले के मांडोली गांव में 27 अगस्त 2024 को हुए किराना व्यापारी गणपत सिंह की हत्या का मामला अब तक परिवार के लिए एक बड़ा दर्द बना हुआ था। लगभग 18 महीने बाद पुलिस ने इस हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। पुलिस ने अवैध संबंधों और ब्लैकमेलिंग को हत्या का मुख्य कारण बताते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें एक महिला भी शामिल है।
हत्या का मोटिव और साजिश
जालोर के एसपी शैलेंद्र सिंह इंदोलिया ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गणपत सिंह (उम्र 42 वर्ष) अपने पड़ोसी गजेंद्र सिंह के पिता सुरेंद्र सिंह और लच्छुदेवी के बीच चल रहे अवैध संबंधों के बारे में जानते थे। गणपत सिंह इस संबंध को लेकर लगातार ब्लैकमेल कर रहा था, जिससे परेशान होकर गजेंद्र सिंह ने हत्या की साजिश रची।गजेंद्र सिंह ने लच्छुदेवी और अपने यहां काम करने वाले वागाराम के साथ मिलकर योजना बनाई।लच्छुदेवी ने गणपत सिंह को किसी सुनसान जगह पर बुलाया और वहां उसकी हत्या कर दी गई।तीनों आरोपियों—गजेंद्र सिंह, लच्छुदेवी और वागाराम—को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
घटना का क्रम और शव मिलना
27 अगस्त 2024 की शाम को गणपत सिंह अपनी दुकान से घर के लिए निकले थे, लेकिन रात तक नहीं पहुंचे। उनके बड़े भाई अभय सिंह ने रामसीन थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। अगले दिन 28 अगस्त को रामसीन थाना क्षेत्र के मांडोली गांव सिकवाड़ा रोड पर कीचड़ में उनकी डेड बॉडी मिली। शव पर सिर में गहरी चोट के निशान थे और पास में उनकी बाइक गिरी हुई थी। पुलिस ने शुरुआत में ही हत्या की आशंका जताई थी।
परिवार पर लगातार शक और जांच की चुनौतियां
परिवार को शुरू से ही गजेंद्र सिंह पर शक था। पुलिस ने भी गजेंद्र सिंह से कई बार पूछताछ की। जांच के दौरान गजेंद्र सिंह और दो अन्य संदिग्धों का नार्को टेस्ट कराने का प्रयास हुआ, लेकिन गजेंद्र ने परिवार के लिए 3 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) करवाने की बात कहकर टेस्ट से इनकार कर दिया। यह मामला कोर्ट में चल रहा है। परिवार का मानना था कि जांच में देरी हो रही है और कोई बड़ा दबाव काम कर रहा है।
बुजुर्ग मां की भूख हड़ताल और परिवार का लंबा संघर्ष
हत्या के बाद से परिवार न्याय की मांग को लेकर लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहा था।17 नवंबर 2025 को परिवार ने पहली बार 9 दिनों तक धरना दिया, जिसमें गणपत सिंह की 80 वर्षीय मां हवा कंवर भी शामिल हुईं।27 फरवरी 2026 से हवा कंवर फिर से भूख हड़ताल पर बैठ गईं। इस दौरान गणपत की पत्नी, बच्चे, भाई अभय सिंह और भाभी भी धरने में शामिल रहे। अन्य सदस्यों ने क्रमिक अनशन किया, लेकिन बुजुर्ग मां लगातार भूख हड़ताल पर डटी रहीं।गिरफ्तारियों के बाद हवा कंवर ने कहा, "अब हमें न्याय मिल चुका है।" उन्होंने आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की है।
विधायक रविंद्र भाटी की चेतावनी और समर्थन
शिव विधायक रविंद्र भाटी ने परिवार के संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाई। दो दिन पहले उन्होंने हवा कंवर से मुलाकात की और चेतावनी दी कि अगर जल्द गिरफ्तारियां नहीं हुईं तो वे जालोर जिले के इतिहास का सबसे बड़ा चक्काजाम करवाएंगे। गिरफ्तारियों से ठीक पहले भाटी धरना स्थल पर पहुंचे थे और परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया था। उनकी इस चेतावनी और समर्थन ने मामले को तेजी से सुलझाने में मदद की।