राजस्थान की सियासत में बढ़ती तल्खी: ‘काम’ से ज्यादा ‘बयानों’ पर सियासी घमासान

राजस्थान की सियासत में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच बयानबाजी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मानसरोवर सभा में दिए गए मुख्यमंत्री के बयान पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पद की गरिमा के खिलाफ बताया और माफी की मांग की है। वहीं मुख्यमंत्री ने अपने दिल्ली दौरों का बचाव करते हुए पिछली सरकार पर भ्रष्टाचार और कुर्सी बचाने की राजनीति का आरोप लगाया। इस पूरे विवाद ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है और अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या असली मुद्दे पीछे छूटते जा रहे हैं।

Mar 18, 2026 - 14:54
राजस्थान की सियासत में बढ़ती तल्खी: ‘काम’ से ज्यादा ‘बयानों’ पर सियासी घमासान

राजस्थान की राजनीति इन दिनों एक नए दौर से गुजर रही है—जहां कभी विकास, योजनाओं और जनहित के मुद्दों पर बहस हुआ करती थी, वहीं अब नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी सुर्खियों में है। हालिया विवाद ने सियासत को और गरमा दिया है, जिसमें मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma और पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot आमने-सामने नजर आ रहे हैं।

‘दिल्ली दौरों’ से शुरू हुआ विवाद

विवाद की शुरुआत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ‘दिल्ली दौरों’ को लेकर हुई। विपक्ष लगातार इन दौरों पर सवाल उठाता रहा है, वहीं मुख्यमंत्री का दावा है कि उनके दिल्ली दौरे राज्य के हित में हैं और वे हर बार “ठोस परिणाम” लेकर लौटते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकार के दौरों का मकसद केवल सत्ता बचाना था।

मानसरोवर की सभा और बढ़ा विवाद

मामला उस वक्त और भड़क गया जब जयपुर के मानसरोवर में एक सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि “कुछ लोग होटलों में समय बिताते थे और काम के लायक नजर नहीं आते थे।” इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया और विपक्ष ने इसे व्यक्तिगत हमला करार दिया।

टीकाराम जूली का सीधा हमला

नेता प्रतिपक्ष Tika Ram Jully ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए बयान को “बेहूदा” और “असंवेदनशील” बताया। जूली ने कहा कि यह बयान मुख्यमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ है और इससे उनकी हताशा साफ झलकती है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के शुरुआती वर्षों में ही संतुलन खोते नजर आ रहे हैं और अब प्रशासनिक स्तर पर भी उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

माफी की मांग और बढ़ती सियासी तनातनी

टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करती है और राजनीतिक संवाद की मर्यादा को गिराती है।

सरकार का पलटवार

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने बयान और कार्यशैली का बचाव करते हुए कांग्रेस सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने जल जीवन मिशन में कथित भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को उठाते हुए कहा कि पिछली सरकार ने प्रदेश को इन समस्याओं में धकेला।

मुद्दों से भटकती सियासत?

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या राजस्थान की सियासत अब केवल आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाजी तक सिमटती जा रही है?जहां एक ओर प्रदेश पानी, रोजगार और बुनियादी विकास जैसे अहम मुद्दों से जूझ रहा है, वहीं राजनीतिक दलों के बीच शब्दों की मर्यादा को लेकर जंग छिड़ी हुई है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.