नीना गुप्ता: बिन ब्याही मां से रूढ़ियों को चुनौती, कहानी को नया मोड़ - साहस और प्रतिभा की अभिनेत्री

1980 में सिंगल मदर बनकर समाज को चुनौती दी और 60 की उम्र में बधाई हो जैसी फिल्मों से करियर की नई ऊंचाइयां छूकर साबित किया कि प्रतिभा की कोई उम्र नहीं होती। उनकी आत्मकथा सच कहूं तो और बोल्ड फैशन ने उन्हें एक प्रेरणा का प्रतीक बनाया।

Jul 14, 2025 - 17:00
नीना गुप्ता: बिन ब्याही मां से रूढ़ियों को चुनौती, कहानी को नया मोड़ - साहस और प्रतिभा की अभिनेत्री

भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री नीना गुप्ता ने अपनी प्रतिभा, साहस और ईमानदारी से न केवल सिल्वर स्क्रीन पर बल्कि समाज में भी एक अलग पहचान बनाई है। 1980 के दशक में जब भारत में सिंगल मदरहुड को सामाजिक रूप से स्वीकार नहीं किया जाता था, नीना ने वेस्ट इंडीज के क्रिकेट दिग्गज विव रिचर्ड्स के साथ अपने रिश्ते से जन्मी बेटी मसाबा गुप्ता को अकेले पालने का साहसिक निर्णय लिया। उस समय समाज के तीखे तानों और आलोचनाओं का सामना करते हुए भी नीना ने अपने फैसले पर अडिग रहकर एक मिसाल कायम की।

करियर की चुनौतियां और राष्ट्रीय पुरस्कार

नीना गुप्ता ने 1994 में फिल्म वो छोकरी के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता, लेकिन इसके बावजूद उन्हें लंबे समय तक पेशेवर ठहराव का सामना करना पड़ा। उन्हें अक्सर "मां के किरदार" या सहायक भूमिकाओं में बांध दिया गया। एक समय ऐसा भी आया जब उनके पास काम की कमी हो गई। नीना ने इस बारे में खुलकर बात की, जो उस दौर के फिल्म उद्योग में अपनी तरह की एक दुर्लभ ईमानदारी थी।

सोशल मीडिया से बदली किस्मत

साल 2017 में नीना ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा कर सभी का ध्यान खींचा। उन्होंने लिखा, "मैं मुंबई में रहती हूं और काम कर रही हूं। मैं एक अच्छी अभिनेत्री हूं और अच्छे किरदार निभाने के लिए तलाश कर रही हूं।" इस पोस्ट की सादगी और साहस ने लोगों का दिल जीत लिया। इसके तुरंत बाद, उन्हें फिल्म बधाई हो (2018) में एक महत्वपूर्ण भूमिका मिली, जिसने उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। इस फिल्म में उनकी शानदार अभिनय ने दर्शकों और समीक्षकों को समान रूप से प्रभावित किया।

दूसरी पारी में चमक

60 की उम्र पार करने के बाद भी नीना गुप्ता ने साबित किया कि प्रतिभा की कोई उम्र नहीं होती। बधाई हो, शुभ मंगल ज्यादा सावधान, पंगा और वेब सीरीज पंचायत जैसी परियोजनाओं में उनकी गहरी और प्रभावशाली भूमिकाओं ने उन्हें एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया। नीना की यह दूसरी पारी न केवल उनके अभिनय कौशल को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ कोई भी नई शुरुआत संभव है।

अभिनय से परे: लेखिका और फैशन आइकन

नीना गुप्ता केवल एक अभिनेत्री तक सीमित नहीं हैं। उनकी आत्मकथा सच कहूं तो को उनकी बेबाकी और हास्य के लिए खूब सराहा गया। इसके अलावा, नीना अपनी बोल्ड और सुरुचिपूर्ण फैशन पसंद के लिए भी जानी जाती हैं। रेड कार्पेट से लेकर फैशन वीक तक, वह अपनी अनूठी शैली और आत्मविश्वास के साथ हर किसी का ध्यान खींचती हैं।

प्रेरणा का प्रतीक

नीना गुप्ता की कहानी साहस, ईमानदारी और आत्मविश्वास की कहानी है। उन्होंने सामाजिक बंधनों को तोड़ा, अपने करियर को फिर से परिभाषित किया और यह दिखाया कि उम्र केवल एक संख्या है। वह न केवल भारतीय सिनेमा की एक चमकती हुई मिसाल हैं, बल्कि उन सभी के लिए प्रेरणा हैं जो अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहते हैं।

Yashaswani Journalist at The Khatak .