मोती डूंगरी गणेश मंदिर में ‘आरोग्य प्रसाद’: 42 साल पुरानी परंपरा में च्यवनप्राश का भोग, भक्तों में बांटा गया स्वास्थ्य का वरदान

जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में पुष्य नक्षत्र पर 42 साल पुरानी परंपरा के तहत च्यवनप्राश का भोग लगाकर श्रद्धालुओं में ‘आरोग्य प्रसाद’ वितरित किया गया।

Mar 28, 2026 - 14:38
मोती डूंगरी गणेश मंदिर में ‘आरोग्य प्रसाद’: 42 साल पुरानी परंपरा में च्यवनप्राश का भोग, भक्तों में बांटा गया स्वास्थ्य का वरदान
मोती डूंगरी गणेश मंदिर में ‘आरोग्य प्रसाद’: 42 साल पुरानी परंपरा में च्यवनप्राश का भोग, भक्तों में बांटा गया स्वास्थ्य का वरदान

जयपुर। जयपुर के प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर में इस बार आस्था के साथ ‘सेहत का आशीर्वाद’ भी बरस रहा है। पुष्य नक्षत्र के शुभ संयोग पर मंदिर में 42 साल पुरानी परंपरा को दोबारा जीवंत किया गया है।

251 किलो दूध से महा-अभिषेक

शनिवार सुबह भगवान गणेश का भव्य महा-अभिषेक किया गया।

  • 251 किलो दूध
  • 21 किलो दही
  • घी, शहद और 21 किलो बूरा से तैयार पंचामृत
  • केसरिया गुलाब जल से विशेष स्नान

इसके बाद भगवान को स्वर्णमयी पोशाक पहनाकर आकर्षक श्रृंगार किया गया।

‘च्यवनप्राश भोग’ की खास परंपरा

मंदिर में भगवान को च्यवनप्राश का भोग लगाया गया, जिसे प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। मंदिर के महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि यह परंपरा उनके पिता वैद्य राधेश्याम शर्मा ने शुरू की थी।

हर भक्त को ‘आरोग्य प्रसाद’

हर श्रद्धालु को 250 ग्राम च्यवनप्राश का पैकेट दिया जा रहा है। खास बात यह है कि बुजुर्गों को इसमें प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि उन्हें स्वास्थ्य लाभ मिल सके।

35 जड़ी-बूटियों से तैयार

यह च्यवनप्राश औषधीय गुणों से भरपूर है, जिसमें शामिल हैं—

  • 60 किलो ताजे आंवले
  • 30 किलो मिश्री
  • 150 ग्राम केसर
  • अश्वगंधा, गिलोय, शतावरी, ब्राह्मी सहित 35 जड़ी-बूटियां

इसे विशेष रूप से ऐसी तासीर में तैयार किया गया है कि इसे किसी भी मौसम में सेवन किया जा सके। आस्था और आयुर्वेद का यह अनोखा संगम जयपुर के इस मंदिर को एक बार फिर श्रद्धालुओं के लिए खास बना रहा है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground