चुनाव से पहले ममता बनर्जी का बड़ा दांव: 23 पदों से इस्तीफा, क्या ‘दीदी’ का मास्टरस्ट्रोक?

चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने 23 अहम पदों से इस्तीफा देकर सियासी हलचल तेज कर दी है। इस फैसले को चुनावी रणनीति और ‘मास्टरस्ट्रोक’ के तौर पर देखा जा रहा है।

Mar 25, 2026 - 14:32
चुनाव से पहले ममता बनर्जी का बड़ा दांव: 23 पदों से इस्तीफा, क्या ‘दीदी’ का मास्टरस्ट्रोक?
चुनाव से पहले ममता बनर्जी का बड़ा दांव: 23 पदों से इस्तीफा, क्या ‘दीदी’ का मास्टरस्ट्रोक?

जब भी कोलकाता का नाम आता है, तो जेहन में कई तस्वीरें उभरती हैं—पीली टैक्सी, हावड़ा ब्रिज और एक सादा सफेद साड़ी में तेज़ कदमों से चलतीं ममता बनर्जी। अब वही ‘दीदी’ एक बार फिर सुर्खियों में हैं—और वजह है उनका बड़ा सियासी फैसला। बंगाल में चुनावी सरगर्मियों के बीच ममता बनर्जी ने एक झटके में 23 अहम पदों से इस्तीफा देकर सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। यह कदम ऐसे समय आया है जब राज्य में चुनावी ‘खेला’ अपने चरम पर है।

कौन-कौन से पद छोड़े?

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ममता बनर्जी ने कई महत्वपूर्ण संस्थाओं और समितियों से खुद को अलग कर लिया है, जिनमें शामिल हैं—

  • राज्य स्वास्थ्य मिशन
  • इको-टूरिज्म एडवाइजरी बोर्ड
  • वेस्ट बंगाल उर्दू अकादमी
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस 125वीं जयंती समारोह समिति

यह सिर्फ एक औपचारिक कदम नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे बड़ी रणनीति की चर्चा तेज है।

चुनावी रण और रणनीति

इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।
भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला उनके पूर्व सहयोगी और अब भाजपा नेता सुभेंदु अधिकारी से माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि—
 दीदी अब पूरी तरह चुनावी मैदान पर फोकस करना चाहती हैं
 प्रशासनिक जिम्मेदारियों से खुद को अलग कर ‘ग्राउंड कनेक्ट’ मजबूत करना चाहती हैं

मास्टरस्ट्रोक या मजबूरी?

इस फैसले को लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं—

  • क्या यह जनता के बीच ‘सिर्फ सेवा’ का संदेश देने की कोशिश है?
  • या फिर विपक्ष के ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ के आरोपों से बचने की रणनीति?
  • या फिर यह पूरी तरह चुनावी फोकस का संकेत है?

राज्य के गृह विभाग ने भी निर्देश जारी कर दिए हैं कि उनके सभी इस्तीफे तुरंत प्रभाव से स्वीकार किए जाएं, और यदि कोई पद छूट गया हो तो उसे भी रिक्त माना जाए।

सियासत में हलचल

दिल्ली से लेकर कोलकाता तक, इस फैसले की चर्चा जोरों पर है।
विशेषज्ञ इसे चुनाव से पहले एक बड़ा ‘सियासी दांव’ मान रहे हैं, जो आगामी परिणामों पर असर डाल सकता है।

निष्कर्ष

ममता बनर्जी का यह कदम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। अब सवाल यही है—
क्या यह फैसला उन्हें चुनावी मैदान में बढ़त दिलाएगा?
या फिर विपक्ष इसे नया मुद्दा बना देगा?

एक बात तो तय है—बंगाल का ‘खेला’ अब और दिलचस्प हो गया है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground