जयपुर फैमिली कोर्ट ने 32 साल पुरानी शादी को रद्द किया: पत्नी द्वारा माता-पिता से अलग रहने का दबाव, संपत्ति लालच और लगातार मुकदमे दर्ज कराना माना गया मानसिक क्रूरता

जयपुर के फैमिली कोर्ट ने मानसिक-शारीरिक क्रूरता और 8 साल से अलग रहने के आधार पर 32 साल पुरानी शादी को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पत्नी द्वारा पति पर माता-पिता से अलग रहने का दबाव, संपत्ति में हिस्से की मांग और कई मुकदमे दर्ज कराने को क्रूरता माना। पति की याचिका स्वीकार की गई, जबकि पत्नी आरोपों का खंडन नहीं कर पाई। फैसला 30 जनवरी को सुनाया गया।

Feb 8, 2026 - 19:26
जयपुर फैमिली कोर्ट ने 32 साल पुरानी शादी को रद्द किया: पत्नी द्वारा माता-पिता से अलग रहने का दबाव, संपत्ति लालच और लगातार मुकदमे दर्ज कराना माना गया मानसिक क्रूरता

जयपुर के महानगर-प्रथम फैमिली कोर्ट-1 ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 32 साल पुरानी शादी को पूरी तरह रद्द (विवाह विच्छेद) कर दिया है। यह फैसला पति की ओर से दायर तलाक याचिका पर आधारित है, जिसमें मुख्य आधार मानसिक और शारीरिक क्रूरता तथा पत्नी द्वारा लंबे समय से अलग रहना (desertion) बताया गया। कोर्ट ने 30 जनवरी को यह आदेश जारी किया।

मामले की पृष्ठभूमि

सवाई माधोपुर के निवासी एक युवक और मुंबई की रहने वाली युवती की शादी वर्ष 1994 में हुई थी। पति के अनुसार, शादी के कुछ महीनों बाद ही पत्नी अपने मायके (मुंबई) चली गई। वापस आने के बाद उसने पति पर लगातार दबाव बनाना शुरू कर दिया कि वह उसके माता-पिता से अलग रहें।

पति ने बताया कि विवश होकर वह पत्नी को लेकर जयपुर शिफ्ट हो गए और वर्ष 2005 में खुद का मकान भी खरीदा। लेकिन पत्नी ने पारिवारिक संपत्ति में हिस्से की मांग जारी रखी। जब पति ने बात नहीं मानी, तो पत्नी ने बच्चों को जहर देकर आत्महत्या करने की धमकी दी। अंततः पति ने अपनी पैतृक संपत्ति के दो मकानों की पावर ऑफ अटॉर्नी पत्नी के नाम कर दी, जिसमें से पत्नी ने एक प्लॉट अपनी बहन को दे दिया।पति ने आरोप लगाया कि पत्नी ने उसके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज कराए, जो मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आते हैं। दोनों पिछले 8 साल से (अक्टूबर 2017 से) अलग-अलग रह रहे हैं और इस दौरान कोई दांपत्य संबंध भी नहीं बने।

पत्नी का पक्ष

पत्नी ने कोर्ट में दावा किया कि उसके सास-ससुर से मधुर संबंध थे। पति का अपने पिता से नहीं बनता था, इसलिए पति ने व्यवसाय में पिता को शामिल नहीं किया और सवाई माधोपुर छोड़कर जयपुर आ गए। उसने कभी सास-ससुर का अपमान नहीं किया, बल्कि सास-ससुर पति से ज्यादा उस पर विश्वास करते थे।

कोर्ट के प्रमुख अवलोकन और फैसला

जज ने फैसले में स्पष्ट कहा कि मानसिक क्रूरता के लिए कोई एक घटना पर्याप्त नहीं होती, बल्कि क्रमवार घटित घटनाओं के समग्र प्रभाव को देखा जाता है। इस मामले में निम्नलिखित बिंदु क्रूरता साबित करते हैं:पत्नी द्वारा पति पर माता-पिता से अलग रहने का लगातार दबाव बनाना।पारिवारिक संपत्ति में लालच और हिस्से की मांग।पति के खिलाफ अनेक मुकदमे (केस) दर्ज कराना, जो स्पष्ट रूप से प्रताड़ना का रूप है।कोर्ट ने पत्नी के विरोधाभास पर भी ध्यान दिया: एक तरफ वह कहती है कि सास से मधुर संबंध थे, लेकिन घरेलू हिंसा के मामले में सास के खिलाफ क्रूरता का आरोप लगाती है। अगर सास-ससुर उस पर ज्यादा विश्वास करते थे, तो उसे सास को साक्ष्य के रूप में पेश करना चाहिए था।पत्नी पति द्वारा लगाए गए आरोपों का प्रभावी खंडन नहीं कर पाई और न ही अपने पक्ष में कोई ठोस साक्ष्य पेश कर सकी। दोनों पक्षों ने अलग रहने की बात स्वीकार की है, और 8 साल से कोई दांपत्य जीवन नहीं बचा है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.