16 दिन बाद खुलेगा साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का राज, आज पुलिस करेगी बड़ा खुलासा...
जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत मामले में करीब 16 दिन चली जांच के बाद अहम खुलासा सामने आया है। पुलिस जांच, पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट में शरीर में किसी भी प्रकार के जहर या आपराधिक साजिश के प्रमाण नहीं मिले। प्रारंभिक जांच के अनुसार मौत की वजह अस्थमा अटैक के कारण सांस रुकना मानी जा रही है। अंतिम निष्कर्ष मेडिकल बोर्ड की पूरी रिपोर्ट के बाद जारी किया जाएगा।
जोधपुर (राजस्थान):- जोधपुर में पिछले करीब 16 दिनों से चर्चा और सवालों के घेरे में रही साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के मामले में अब जांच एजेंसियों की रिपोर्ट से बड़ी और अहम तस्वीर सामने आई है। शुरुआत में इस मौत को लेकर कई तरह की आशंकाएं और चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन मेडिकल और फॉरेंसिक जांच के बाद पुलिस अब मामले के अंतिम निष्कर्ष के करीब पहुंच चुकी है।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
28 जनवरी 2026 को जोधपुर के बोरानाडा थाना क्षेत्र के पाल गांव स्थित आरती नगर आश्रम में रहने वाली साध्वी प्रेम बाईसा की अचानक तबीयत बिगड़ गई। आश्रम से जुड़े लोगों के अनुसार उन्हें पहले से सांस संबंधी बीमारी (अस्थमा) की समस्या थी। उस दिन उन्हें तेज सर्दी-जुकाम और सांस लेने में परेशानी की शिकायत हुई।
स्थिति गंभीर होने पर इलाज के लिए स्थानीय स्तर पर एक कंपाउंडर/नर्सिंगकर्मी को बुलाया गया। बताया गया कि उन्हें राहत देने के लिए इंजेक्शन लगाया गया, लेकिन कुछ ही समय बाद उनकी हालत और बिगड़ गई। तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मौत के बाद क्यों बढ़ा विवाद?
मौत के तुरंत बाद मामला सामान्य नहीं रहा। कई कारणों से यह केस चर्चा में आ गया—
इंजेक्शन लगाने के बाद तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई
सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे और आशंकाएं वायरल होने लगीं
श्रद्धालुओं और समाज के लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग की
मौत को संदिग्ध बताते हुए साजिश या गलत इलाज की संभावना जताई गई
इन परिस्थितियों में पुलिस पर सच्चाई सामने लाने का दबाव बढ़ गया।
पुलिस ने कैसे की जांच?
मामले की गंभीरता को देखते हुए जोधपुर पुलिस ने जांच को कई स्तरों पर आगे बढ़ाया—
आश्रम में मौजूद लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ
इंजेक्शन देने वाले व्यक्ति से विस्तृत बयान
इलाज से जुड़े दस्तावेजों की जांच
पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड से करवाया गया
विसरा सुरक्षित रखकर फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजा गया
जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि मौत प्राकृतिक कारण से हुई या इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या आपराधिक साजिश शामिल थी।
FSL और मेडिकल जांच में क्या सामने आया?
सबसे अहम कड़ी रही फॉरेंसिक रिपोर्ट। जांच में सामने आया—
शरीर में किसी भी प्रकार के जहर या विषैले तत्व के प्रमाण नहीं मिले
बाहरी चोट या हिंसा के स्पष्ट संकेत नहीं पाए गए
प्रारंभिक मेडिकल राय के अनुसार मौत सांस रुकने से जुड़ी मानी जा रही है
अस्थमा अटैक और अचानक स्वास्थ्य बिगड़ना मुख्य कारण माना जा रहा है
इस रिपोर्ट के बाद हत्या या जहर देने की आशंका काफी हद तक कमजोर पड़ गई।
इंजेक्शन को लेकर क्या स्थिति?
जांच में यह भी देखा गया कि इंजेक्शन के बाद हालत बिगड़ने की बात जरूर सामने आई, लेकिन अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि इंजेक्शन ही मौत की सीधी वजह बना। मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर अस्थमा अटैक में मरीज की स्थिति अचानक तेजी से बिगड़ सकती है।
हालांकि पुलिस ने मेडिकल प्रोटोकॉल और इलाज की प्रक्रिया की भी जांच की है ताकि किसी प्रकार की लापरवाही की संभावना को पूरी तरह खारिज या स्पष्ट किया जा सके।
पुलिस का अब तक का निष्कर्ष
अब तक की जांच के आधार पर:
मौत में जहर या आपराधिक साजिश के प्रमाण नहीं मिले
मामला प्राकृतिक स्वास्थ्य कारणों से जुड़ा प्रतीत हो रहा है
अंतिम रिपोर्ट मेडिकल बोर्ड की राय के बाद जारी की जाएगी
पुलिस का कहना है कि सभी तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही आधिकारिक क्लोजर या अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक किया जाएगा।
क्यों बना यह मामला चर्चा का केंद्र?
यह मामला इसलिए भी सुर्खियों में रहा क्योंकि:
साध्वी प्रेम बाईसा का धार्मिक और सामाजिक प्रभाव था
अचानक हुई मौत ने लोगों को चौंका दिया
सोशल मीडिया पर कई अपुष्ट दावे तेजी से फैल गए
जांच एजेंसियों ने इन्हीं अफवाहों को रोकने और तथ्य सामने लाने के लिए वैज्ञानिक जांच पर जोर दिया।
करीब 16 दिनों तक रहस्य बने रहे इस मामले में अब तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है। जांच रिपोर्टों के अनुसार साध्वी प्रेम बाईसा की मौत प्राकृतिक स्वास्थ्य कारण, विशेष रूप से गंभीर अस्थमा अटैक और सांस रुकने से जुड़ी मानी जा रही है। हालांकि पुलिस अंतिम मेडिकल राय आने के बाद ही आधिकारिक रूप से केस का पूरा निष्कर्ष जारी करेगी।