जयपुर जिला कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी को मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025: राजस्थानी कहानी संग्रह ‘भरखमा’ को सर्वोच्च राजकीय सम्मान
जयपुर जिला कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी को उनकी राजस्थानी कहानी संग्रह 'भरखमा' के लिए वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार मिलने की घोषणा हुई है। यह सम्मान राजस्थानी भाषा में उत्कृष्ट साहित्य के लिए दिया जाता है, जिसमें 1 लाख रुपये, प्रशस्ति-पत्र और प्रतीक चिह्न शामिल हैं। डॉ. सोनी प्रशासक होने के साथ-साथ हिंदी-राजस्थानी में सक्रिय लेखक हैं, जिनकी 15+ पुस्तकें प्रकाशित हैं। इससे पहले उन्हें 2016 में 'रणखार' के लिए साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार मिल चुका है। यह उपलब्धि राजस्थानी साहित्य और राजस्थान के लिए गौरव की बात है।
जयपुर। राजस्थान के प्रशासनिक क्षेत्र में अपनी कुशलता के लिए जाने-माने जयपुर जिला कलक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने साहित्य के क्षेत्र में भी एक नया इतिहास रच दिया है। उनकी राजस्थानी भाषा में लिखित चर्चित कहानी संग्रह ‘भरखमा’ को वर्ष 2025 के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा हुई है। यह भारत का सर्वोच्च राजकीय साहित्यिक सम्मान माना जाता है, जो साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा 24 मान्यता प्राप्त भारतीय भाषाओं में प्रकाशित उत्कृष्ट कृतियों को प्रतिवर्ष दिया जाता है।
इस पुरस्कार के तहत विजेता को एक लाख रुपये की सम्मान राशि, प्रशस्ति-पत्र और प्रतीक-चिह्न प्रदान किया जाता है। डॉ. सोनी की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत साहित्यिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देती है, बल्कि राजस्थानी भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा को भी नई ऊँचाई प्रदान करती है। राजस्थानी साहित्य जगत में इस घोषणा के साथ ही हर्ष और उत्साह का माहौल छा गया है। विभिन्न साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, पाठकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने डॉ. सोनी को बधाई देते हुए इसे राजस्थान के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है।
प्रशासनिक दायित्वों के बीच साहित्य सृजन की साधना
डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी एक सफल आईएएस अधिकारी होने के साथ-साथ एक संवेदनशील और प्रतिबद्ध साहित्यकार भी हैं। व्यस्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने साहित्य रचना को कभी नहीं छोड़ा। उनकी लेखनी में समाज, लोकजीवन, मानवीय संवेदनाएँ और समकालीन यथार्थ का सशक्त चित्रण मिलता है। वे राजस्थानी और हिंदी दोनों भाषाओं में सक्रिय हैं और कहानी, कविता, डायरी लेखन तथा अनुवाद के क्षेत्र में निरंतर सृजनरत हैं। अब तक उनकी 15 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिन्हें पाठकों और समीक्षकों से व्यापक सराहना मिली है।
उनकी रचनाओं में लोक संस्कृति की गहरी समझ, मानवीय संबंधों की सूक्ष्म संवेदनाएँ और सामाजिक यथार्थ का जीवंत चित्रण झलकता है। ‘भरखमा’ संग्रह राजस्थानी साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियों में शुमार है। इसकी कहानियाँ ग्रामीण परिवेश, मानवीय रिश्तों, जीवन संघर्ष और सांस्कृतिक मूल्यों को मार्मिक एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती हैं। इस कृति की लोकप्रियता का प्रमाण यह है कि इसी पर आधारित राजस्थानी फिल्म ‘भरखमा’ का निर्माण हो चुका है, जिसने क्षेत्रीय सिनेमा और साहित्य दोनों को नई पहचान दी है।
पूर्व सम्मान और साहित्यिक यात्रा
डॉ. सोनी को इससे पहले भी कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। वर्ष 2016 में उनकी राजस्थानी कविता संग्रह ‘रणखार’ को साहित्य अकादमी का युवा पुरस्कार प्राप्त हुआ था। इसके अलावा हिंदी कविता संग्रह ‘रेगमाल’ के लिए राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर का ‘सुधींद्र पुरस्कार’ तथा ‘भरखमा’ के लिए राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर का ‘मुरलीधर व्यास राजस्थानी कथा साहित्य पुरस्कार’ सहित अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
29 नवंबर 1981 को हनुमानगढ़ जिले के ग्राम धन्नासर में जन्मे डॉ. सोनी वर्तमान में जयपुर के जिला कलक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी प्रमुख प्रकाशित कृतियों में शामिल हैं: उम्मीदों के चिराग,रेगमाल (हिंदी कविता संग्रह),रणखार (राजस्थानी कविता संग्रह),एडियोस (हिंदी कहानी संग्रह),भरखमा (राजस्थानी कहानी संग्रह),यादावरी (हिंदी डायरी),ओकुहेपा (हिंदी यात्रा वृत्तांत),लगमात (राजस्थानी डायरी),म्हारै पांती रा पाना (पंजाबी से राजस्थानी अनुवाद),देहरा में आज ई उगै है आपणा रूंख (अंग्रेजी से राजस्थानी अनुवाद),भणाई रो मारग (गुजराती से राजस्थानी अनुवाद),निर्वाण (पंजाबी से हिंदी अनुवाद),शब्दों की सीप, अड़तालीस कदम तथा सनागत (संपादन)।
राजस्थान और राजस्थानी साहित्य के लिए मील का पत्थर
डॉ. सोनी की यह उपलब्धि जयपुर जिले के साथ ही पूरे राजस्थान के लिए गौरव का विषय है। यह सम्मान राजस्थानी भाषा को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एक ओर जहां वे प्रशासन में सुशासन सुनिश्चित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर साहित्य के माध्यम से समाज की संवेदनाओं को व्यक्त कर रहे हैं। यह दुर्लभ संयोजन राजस्थान के युवा अधिकारियों और साहित्य प्रेमियों के लिए प्रेरणा स्रोत है।