थार की माताओं ने लिखी ममता की नई मिसाल: बाड़मेर के मदर मिल्क बैंक से हजारों नवजातों को मिल रहा जीवनदान

राजस्थान के बाड़मेर में संचालित ‘आंचल मदर मिल्क बैंक’ हजारों नवजातों के लिए उम्मीद बन चुका है। थार की माताएं अपने बच्चों के साथ-साथ जरूरतमंद शिशुओं के लिए भी दूध दान कर रही हैं। अब तक 9 लाख ML से ज्यादा दूध डोनेट किया जा चुका है।

May 10, 2026 - 12:44
थार की माताओं ने लिखी ममता की नई मिसाल: बाड़मेर के मदर मिल्क बैंक से हजारों नवजातों को मिल रहा जीवनदान

राजस्थान के थार रेगिस्तान से एक ऐसी कहानी सामने आ रही है, जो इंसानियत, मातृत्व और संवेदनाओं की नई मिसाल बन चुकी है। तपती रेत और कठिन परिस्थितियों के बीच बाड़मेर की माताएं सिर्फ अपने बच्चों तक ही नहीं, बल्कि उन नवजातों तक भी ममता पहुंचा रही हैं, जिन्हें किसी कारणवश मां का दूध नहीं मिल पाता। बाड़मेर जिला अस्पताल में वर्ष 2018 से संचालित ‘आंचल मदर मिल्क बैंक’ आज हजारों नवजात शिशुओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यहां थार की महिलाएं स्वेच्छा से अपना दूध दान कर रही हैं ताकि कोई भी मासूम मां के दूध से वंचित न रह जाए।

17 हजार से ज्यादा महिलाओं ने कराया पंजीयन

इस मदर मिल्क बैंक की सबसे बड़ी ताकत वे माताएं हैं, जो अपने बच्चों के साथ-साथ दूसरे बच्चों के जीवन को बचाने के लिए भी आगे आ रही हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार अब तक 17,664 महिलाओं ने बैंक में पंजीयन कराया है, जबकि 3,523 महिलाएं सक्रिय डोनर बनकर करीब 9 लाख 13 हजार मिलीलीटर दूध दान कर चुकी हैं। इन दान किए गए दूध से अब तक लगभग 29,882 यूनिट तैयार की जा चुकी हैं, जो जरूरतमंद नवजातों तक पहुंचाई गईं।

नवजातों के लिए अमृत है मां का दूध

बाड़मेर जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. हनुमान चौधरी के निर्देशन और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. महेंद्र चौधरी की देखरेख में यह बैंक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र में संचालित किया जा रहा है। नर्सिंग स्टाफ पुष्पा, मंजू भाटी, गंगा चौधरी और सुशीला चौधरी इस मिशन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार मां का दूध नवजात शिशु के लिए सबसे सुरक्षित और पौष्टिक आहार होता है। जन्म के शुरुआती दिनों में यही दूध बच्चों को संक्रमण और बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है। साथ ही उनके शारीरिक और मानसिक विकास में भी अहम भूमिका निभाता है।

तय गाइडलाइन के अनुसार होता है दूध संग्रह

नर्सिंग स्टाफ मंजू भाटी ने बताया कि इस मदर मिल्क बैंक की शुरुआत 4 मार्च 2018 को हुई थी। बैंक में दूध संग्रह की पूरी प्रक्रिया तय मेडिकल गाइडलाइन के अनुसार की जाती है। सबसे पहले दूध दान करने वाली महिलाओं की स्वास्थ्य जांच होती है। इसमें एचआईवी समेत कई जरूरी टेस्ट शामिल रहते हैं। रिपोर्ट पूरी तरह सुरक्षित आने के बाद ही दूध संग्रहित किया जाता है। इसके बाद जरूरत के अनुसार यह दूध जिला अस्पताल में भर्ती कमजोर, बीमार और प्रीमैच्योर नवजातों को दिया जाता है। साथ ही अनाथालय और कम्युनिटी में उन बच्चों तक भी पहुंचाया जाता है, जिनकी मां बीमारी या अन्य कारणों से स्तनपान नहीं करा पातीं।

6 महीने तक सुरक्षित रहता है दूध

नर्सिंग स्टाफ गंगा चौधरी ने बताया कि संग्रहित दूध को पूरी तरह पाश्चराइज किया जाता है और फिर -20 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले डीप फ्रीजर में सुरक्षित रखा जाता है। इस प्रक्रिया के बाद दूध को 6 महीने तक इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कई महिलाओं के मन में अब भी भ्रांतियां हैं कि दूध दान करने से उनके बच्चे के लिए दूध कम हो जाएगा या उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। डॉक्टरों की निगरानी में किया गया दूध दान पूरी तरह सुरक्षित होता है।

“दूसरे बच्चों को दूध देकर खुशी मिलती है”

मिल्क डोनर पेमी ने बताया कि उन्हें यह जानकर बेहद खुशी होती है कि उनका दूध जरूरतमंद बच्चों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि दूध दान करने से उनके स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा और वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। पेमी पिछले कई दिनों से नियमित रूप से अस्पताल पहुंचकर दूध दान कर रही हैं। अप्रैल महीने में उन्होंने सबसे ज्यादा 2550 ML यानी करीब 85 यूनिट दूध डोनेट किया। इसके अलावा बबीता ने 1500 ML और नूरी ने भी बड़ी मात्रा में दूध दान किया।

आज बैंक में 6600 यूनिट दूध का स्टॉक

अस्पताल प्रशासन के अनुसार फिलहाल बैंक में करीब 6600 यूनिट दूध स्टॉक में मौजूद है। बैंक की स्थापना के समय 2018 में यहां से 1000 यूनिट दूध अजमेर और जोधपुर भी भेजा गया था। आज यह मदर मिल्क बैंक सिर्फ बाड़मेर ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लिए भी उम्मीद का बड़ा केंद्र बन चुका है।

थार की माताएं बन रहीं मानवता की मिसाल

एक ओर आधुनिक जीवनशैली में रिश्तों की संवेदनाएं कम होती नजर आती हैं, वहीं दूसरी ओर थार की ये माताएं अपने आंचल के दूध से अनगिनत मासूमों को नया जीवन देकर मानवता की मिसाल पेश कर रही हैं। रेगिस्तान की कठिन जिंदगी के बीच इन महिलाओं का यह निस्वार्थ समर्पण साबित करता है कि ममता का कोई दायरा नहीं होता। मां का प्यार सिर्फ अपने बच्चे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जरूरत पड़ने पर वह पूरे समाज के बच्चों को भी जीवन दे सकता है।

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