भारत में अमेरिकी सोयाबीन और अन्य कृषि उत्पाद बेचने की इजाजत जल्द मिल सकती है: अमेरिकी अधिकारी बोले – “भारत ने अब तक का सबसे अच्छा ऑफर दिया”
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में बड़ी प्रगति: अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर ने कहा कि भारत ने कृषि क्षेत्र में अब तक का सबसे अच्छा ऑफर दिया है। अमेरिकी सोयाबीन, ज्वार और एथेनॉल को भारत में बेचने का रास्ता जल्द खुल सकता है। दिल्ली में चल रही बातचीत में पहले चरण की द्विपक्षीय ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की कोशिश हो रही है। 2026 के पहले यह डील हो सकती है।
नई दिल्ली में चल रही भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के बीच एक बड़ा और सकारात्मक अपडेट सामने आया है। अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीयर ने कहा है कि भारत ने कृषि क्षेत्र में बाजार खोलने को लेकर अब तक का “सबसे अच्छा प्रस्ताव” (best offer so far) दिया है। इसके चलते अमेरिकी सोयाबीन, मक्का (ज्वार), एथेनॉल और अन्य कृषि उत्पादों को भारत में बेचने का रास्ता जल्द साफ हो सकता है।
मुख्य बिंदु:भारत ने दिखाई दिलचस्पी; ग्रीयर के मुताबिक, भारत ने पहली बार कृषि बाजार को खोलने में वास्तविक रुचि दिखाई है। खासकर अमेरिकी सोयाबीन और ज्वार (sorghum) के लिए भारत टैरिफ कम करने या कोटा बढ़ाने पर तैयार नजर आ रहा है।
अमेरिकी किसानों के लिए बड़ा मौका;चीन के साथ व्यापार युद्ध की वजह से अमेरिकी किसानों का बड़ा स्टॉक पड़ा है। चीन ने अमेरिकी सोयाबीन की खरीद बहुत कम कर दी है। ऐसे में 1.4 अरब की आबादी वाला भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों का नया और बहुत बड़ा बाजार बन सकता है।
एथेनॉल में भी संभावना;अमेरिकी सीनेट की कृषि समिति के चेयरमैन सीनेटर जेरी मोरन ने कहा कि भारत मक्का और सोयाबीन से बनने वाले अमेरिकी एथेनॉल का भी बड़ा खरीदार बन सकता है। भारत सरकार 2030 तक 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रख रही है, जिससे अमेरिकी एथेनॉल के लिए बड़ी मांग पैदा हो सकती है।
पहले चरण की ट्रेड डील करीब;अभी अमेरिकी डिप्टी ट्रेड प्रतिनिधि रिक स्विट्जर के नेतृत्व में एक हाई-लेवल टीम दिल्ली में है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित “मिनी ट्रेड डील” या “पहले चरण की द्विपक्षीय व्यापार संधि” (Bilateral Trade Agreement – Phase 1) को अंतिम रूप देना है। उम्मीद है कि 2026 के पहले छमाही में यह डील हो जाएगी।
दूसरे क्षेत्रों में भी प्रगति 1979 एयरक्राफ्ट एग्रीमेंट के तहत विमान के पुर्जों और पार्ट्स पर दोनों देश जीरो टैरिफ (0% आयात शुल्क) लागू करने के बहुत करीब हैं। भारत अगर अपने बाजार में अमेरिकी सामान पर कम टैरिफ देगा तो बदले में अमेरिका भी भारतीय सामान (जैसे कपड़ा, ज्वेलरी, फार्मा आदि) पर छूट देगा।
पृष्ठभूमि में तनाव भी था पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते खटास भरे रहे हैं:अमेरिका का मानना है कि भारत बहुत ऊंचे टैरिफ लगाता है और व्यापार असंतुलित है (भारत अमेरिका को ज्यादा बेचता है, अमेरिका भारत को कम)। ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25% तक अतिरिक्त टैरिफ लगा दिए थे। अब ट्रंप 2.0 सरकार आने के बाद दोनों देश इन पुरानी शिकायतों को सुलझाकर नई शुरुआत करना चाहते हैं।
निष्कर्ष अमेरिकी अधिकारियों का यह बयान बताता है कि भारत अब कृषि क्षेत्र में भी बाजार खोलने को तैयार है, जो पहले राजनीतिक रूप से बहुत संवेदनशील मुद्दा माना जाता था। अगर यह डील हो गई तो:अमेरिकी किसानों को चीन के नुकसान की भरपाई मिलेगी,भारत को सस्ता सोयाबीन तेल और एथेनॉल मिलेगा,दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा कम होगा,और कुल द्विपक्षीय व्यापार (वर्तमान में करीब 200 अरब डॉलर) में भारी बढ़ोतरी होगी।