“Rajasthan Politics: गहलोत vs तिवाड़ी आमने-सामने, महिला आरक्षण पर 16 अप्रैल क्यों है अहम?”

महिला आरक्षण पर अशोक गहलोत और घनश्याम तिवाड़ी आमने-सामने। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर सियासी टकराव तेज।

Apr 4, 2026 - 15:06
“Rajasthan Politics: गहलोत vs तिवाड़ी आमने-सामने, महिला आरक्षण पर 16 अप्रैल क्यों है अहम?”

महिला आरक्षण विधेयक पर सियासत तेज, गहलोत और तिवाड़ी आमने-सामने

देश की राजनीति में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। इस मुद्दे पर राजस्थान के दो दिग्गज नेता अशोक गहलोत और घनश्याम तिवाड़ी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

गहलोत ने केंद्र सरकार पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की मूल सोच सोनिया गांधी की थी। गहलोत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के पास पूर्ण बहुमत होने के बावजूद इसे सर्वसम्मति से पारित किया जा सकता था, लेकिन जानबूझकर विवाद की स्थिति बनाई जा रही है।

सरकार पर ‘गुमराह करने’ का आरोप

गहलोत ने कहा कि पहले सरकार ने जनगणना और परिसीमन के बाद महिला आरक्षण लागू करने की बात कही थी, लेकिन अब नया एक्ट लाकर अलग तरीके से इसे लागू करने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, सरकार अपने रुख में बार-बार बदलाव कर रही है, जिससे भ्रम की स्थिति बन रही है।

तिवाड़ी ने किया पलटवार

वहीं बीजेपी के राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने गहलोत के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पहले ही नए संसद भवन में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शुरुआत में इसे जनगणना के बाद लागू करने की योजना थी, लेकिन अब परिस्थितियों को देखते हुए 2011 की जनगणना को आधार बनाकर आगे बढ़ने का फैसला लिया गया है।

16 अप्रैल को बड़ा कदम संभव

तिवाड़ी के अनुसार, संसद सत्र को 16 और 17 अप्रैल तक बढ़ाकर इस दिशा में अहम कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया में समय लगेगा, लेकिन इसे टालने का कोई कारण नहीं है।

चुनाव और क्रेडिट की राजनीति

महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी की सोच लगभग समान नजर आती है, लेकिन इसे लागू करने के तरीके को लेकर मतभेद स्पष्ट हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा क्रेडिट लेने की राजनीति का केंद्र बन सकता है, खासकर चुनावी माहौल में।

Kashish Sain Bringing truth from the ground