चीन का तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर 'फुजियान' नौसेना में शामिल: हिंद महासागर से ताइवान तक बढ़ेगा चीन का दबदबा

चीन ने अपना सबसे आधुनिक तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर 'फुजियान' नौसेना में शामिल किया। शी जिनपिंग ने हाइनान में समारोह में जहाज सौंपा। स्वदेशी डिजाइन वाला यह कैरियर स्टेल्थ जेट्स से लैस होगा, जिससे हिंद महासागर से ताइवान तक चीन का दबदबा बढ़ेगा।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
November 8, 2025 • 7:34 PM  17
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चीन का तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर 'फुजियान' नौसेना में शामिल: हिंद महासागर से ताइवान तक बढ़ेगा चीन का दबदबा
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चीन का तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर 'फुजियान' नौसेना में शामिल: हिंद महासागर से ताइवान तक बढ़ेगा चीन का दबदबा

चीन: चीन ने अपनी नौसेना की ताकत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। देश ने अपना तीसरा और अब तक का सबसे आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर 'फुजियान' को आधिकारिक तौर पर नौसेना में शामिल कर लिया है। यह घोषणा चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने की, जो इस घटना को चीनी सैन्य क्षमता के विस्तार का प्रतीक बता रही है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने स्वयं इस जहाज को नौसेना को सौंपा, जो चीन की महत्वाकांक्षी नौसैनिक रणनीति का स्पष्ट संकेत देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, 'फुजियान' के शामिल होने से चीन का प्रभाव हिंद महासागर से लेकर ताइवान स्ट्रेट तक फैल जाएगा, और स्टेल्थ फाइटर जेट्स की तैनाती से इसकी हमलावर क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

कमीशनिंग समारोह: शी जिनपिंग की मौजूदगी में ऐतिहासिक क्षण 5 नवंबर 2025 को हainan प्रांत के एक नौसैनिक अड्डे पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 'फुजियान' पर चढ़कर इसका विस्तृत निरीक्षण किया और नौसेना अधिकारियों को इसे तैनात करने के निर्देश दिए। शिन्हुआ के अनुसार, शी ने अपने संबोधन में कहा, "फुजियान न केवल हमारी तकनीकी प्रगति का प्रतीक है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता की रक्षा में एक मजबूत स्तंभ बनेगा।" समारोह में चीनी नौसेना के प्रमुख कमांडरों, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की उपस्थिति थी। जहाज पर चीनी राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और सलामी तोपों से सम्मान दिया गया। यह चीन का पहला पूर्ण रूप से स्वदेशी डिजाइन वाला एयरक्राफ्ट कैरियर है, जो 2017 में शंघाई की जियांगनान शिपयार्ड में निर्माणाधीन होने की घोषणा के बाद से चर्चा का विषय रहा है।

'फुजियान' की तकनीकी विशेषताएं: आधुनिकता का नया अध्याय'फुजियान' चीन के पिछले दो एयरक्राफ्ट कैरियरों—'लियाओनिंग' (2012 में कमीशन) और 'शांदोंग' (2019 में कमीशन)—से कहीं अधिक उन्नत है। जबकि पूर्ववर्ती जहाज रूसी 'कुजनेत्सोव' क्लास की डिजाइन पर आधारित थे, 'फुजियान' पूरी तरह से चीनी इंजीनियरों द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:,आकार और विस्थापन: यह 80,000 टन से अधिक विस्थापन वाला विशालकाय जहाज है, जिसकी लंबाई 316 मीटर और चौड़ाई 73 मीटर है। यह अमेरिकी फोर्ड-क्लास कैरियरों के समकक्ष माना जा रहा है। ,प्रणोदन प्रणाली: परंपरागत स्टील-टर्बाइन इंजन से संचालित, लेकिन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट (EMALS) सिस्टम से लैस, जो विमानों को तेजी से उड़ान भरने में सक्षम बनाता है। इससे पहले के कैरियरों में स्की-जंप रैंप का उपयोग होता था, जो विमानों की लोड क्षमता सीमित करता था। ,हवाई क्षमता: जहाज पर 50 से अधिक विमान ले जाने की क्षमता है, जिसमें स्टेल्थ फाइटर जेट्स जैसे J-35 (चीन का F-35 समकक्ष) और J-15B शामिल होंगे। इनकी तैनाती से 'फुजियान' को हवाई श्रेष्ठता हासिल करने में आसानी होगी। ,रक्षा प्रणाली: उन्नत रडार, मिसाइल डिफेंस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर उपकरणों से सुसज्जित, जो इसे पनडुब्बी और हवाई हमलों से बचाने में सक्षम बनाते हैं। ,चालक दल: लगभग 3,000 नाविक और हवाई कर्मी इसे संचालित करेंगे।

चीन ने इस कैरियर का निर्माण मात्र चार वर्षों में पूरा किया, जो उसकी शिपबिल्डिंग क्षमता का प्रमाण है। परीक्षण चरण में 'फुजियान' ने 2024 में समुद्री परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए थे, जिसमें 10 दिनों तक की लंबी नेविगेशन शामिल थी।रणनीतिक प्रभाव: हिंद महासागर से ताइवान तक नया खतरा'फुजियान' के कमीशन से चीन की 'एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल' (A2/AD) रणनीति मजबूत हो गई है। यह कैरियर दक्षिण चीन सागर, ताइवान स्ट्रेट और हिंद महासागर में चीन के दबदबे को बढ़ाएगा।

 ताइवान पर नजर: ताइवान के निकट 'फुजियान' की तैनाती से चीन की आक्रामक मुद्रा साफ हो जाती है। स्टेल्थ जेट्स के साथ यह ताइवान पर त्वरित हवाई हमले कर सकता है, जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए चिंता का विषय है। अमेरिकी पेंटागन ने इसे "क्षेत्रीय संतुलन बिगाड़ने वाला" बताया है।

हिंद महासागर में विस्तार: भारत के लिए यह सीधा खतरा है। 'फुजियान' को हिंद महासागर में तैनात करने से चीन मालदीव, श्रीलंका और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के निकट निगरानी बढ़ा सकेगा। चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति—जिसमें ग्वादर (पाकिस्तान), हंबनटोटा (श्रीलंका) जैसे अड्डे शामिल हैं—अब अधिक घातक हो जाएगी। भारतीय नौसेना के विशेषज्ञों का कहना है कि इससे 'आईओआर' (Indian Ocean Region) में चीन की पनडुब्बी और कैरियर युद्धक क्षमता दोगुनी हो जाएगी।

वैश्विक संदर्भ: यह कदम अमेरिका के इंडो-पैसिफिक रणनीति को चुनौती देता है। QUAD (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) देशों को अब अपनी नौसैनिक तैनाती बढ़ानी पड़ सकती है।

स्टेल्थ फाइटर जेट्स की तैनाती: हवाई युद्ध में नई ताकत'फुजियान' पर J-35 स्टेल्थ फाइटर जेट्स की तैनाती एक गेम-चेंजर साबित होगी। ये जेट रडार से बचने में सक्षम हैं और लंबी दूरी की मिसाइलें ले जा सकते हैं। चीन ने 2024 में J-35 के प्रोटोटाइप का परीक्षण किया था, और अब 'फुजियान' पर इन्हें एकीकृत किया जा रहा है। इससे जहाज न केवल रक्षात्मक, बल्कि आक्रामक अभियानों के लिए तैयार हो जाएगा। नौसेना के एक अधिकारी ने शिन्हुआ को बताया, "ये जेट्स हिंद महासागर की गहराइयों से ताइवान तक हमारी पहुंच सुनिश्चित करेंगे।"

भारत और दुनिया की प्रतिक्रिया; भारत ने इस कमीशन पर सतर्कता बरतते हुए अपनी नौसेना को हाई अलर्ट पर रखा है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत जैसे भारतीय कैरियरों की तैनाती बढ़ाई जा रही है। अमेरिका ने इसे "चीन की विस्तारवादी महत्वाकांक्षा" करार दिया, जबकि ताइवान ने अपनी वायुसेना को मजबूत करने की योजना की घोषणा की। जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों की रूपरेखा तैयार की है।

निष्कर्ष: एशिया में नया शक्ति संतुलन

'फुजियान' का आगमन चीन को विश्व की दूसरी सबसे बड़ी नौसेना (केवल अमेरिका के बाद) बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर है। 2030 तक चीन के पास छह एयरक्राफ्ट कैरियर होने का लक्ष्य है, जिसमें न्यूक्लियर-पावर्ड वाले भी शामिल होंगे। हालांकि, यह तकनीकी उपलब्धि क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा भी पैदा करती है। भारत जैसे देशों को अब अपनी रणनीति को पुनर्विचार करना होगा, ताकि हिंद महासागर में संतुलन बना रहे। यह घटना न केवल सैन्य, बल्कि भू-राजनीतिक समीकरणों को भी बदल देगी।

 

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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