बाड़मेर के सीमावर्ती गांवों में मानसून का असामान्य बदलाव: सर्दी और कोहरा ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुश्किलें

बाड़मेर के सीमावर्ती गांवों में मानसून के दौरान असामान्य ठंड और घना कोहरा छा गया, जिससे फसलों को भारी नुकसान पहुंचा और ग्रामीणों का दैनिक जीवन प्रभावित हुआ।

Nov 5, 2025 - 10:34
बाड़मेर के सीमावर्ती गांवों में मानसून का असामान्य बदलाव: सर्दी और कोहरा ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुश्किलें

बाड़मेर, 5 नवंबर 2025: राजस्थान के बाड़मेर जिले के सीमावर्ती इलाकों में इस बार मानसून ने अप्रत्याशित रूप से अपना रंग बदल लिया है। जहां आमतौर पर मानसून का मतलब तेज बारिश, उमस और गर्मी से राहत होता है, वहीं इस साल सर्द हवाओं के साथ घना कोहरा देखने को मिल रहा है। जिले के विभिन्न गांवों में सुबह के समय हल्की ठंडक और कोहरे की चादर ने ग्रामीणों के जीवन को प्रभावित कर दिया है। इस असामान्य मौसमी बदलाव से किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, जबकि दैनिक जीवन भी अस्त-व्यस्त हो गया है।

कोहरा और ठंड का समय और प्रभाव;  मौसम विभाग के अनुसार, बाड़मेर के सीमावर्ती गांवों जैसे गडरारोड, कवास, बायतु और आसपास के इलाकों में सुबह करीब 6 बजे से 7 बजे के बीच घना कोहरा छा रहा है। यह कोहरा इतना घना है कि दृश्यता मात्र 50-100 मीटर तक सीमित हो जा रही है। सामान्य तापमान में गिरावट के साथ हल्की सर्दी महसूस हो रही है, जो मानसून के मौसम में दुर्लभ है। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह के समय घर से निकलना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि कोहरे के कारण रास्ते धुंधले हो जाते है।

फसलों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नुकसान; यह मौसमी बदलाव किसानों के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हो रहा है। बाड़मेर जिला मुख्य रूप से बाजरा, ज्वार, मूंगफली और ग्वार जैसी फसलों पर निर्भर है। मानसून की बारिश के बाद फसलें पकने की अवस्था में हैं, लेकिन अचानक आई ठंड और कोहरे से नमी बढ़ गई है, जिससे फसलों में फफूंद और कीटों का प्रकोप बढ़ रहा है। जिले के कृषि विभाग के एक अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया, "कोहरे के कारण सूर्य की रोशनी कम पहुंच रही है, जिससे फसलों की वृद्धि रुक गई है। अनुमान है कि सीमावर्ती गांवों में कम से कम 20-30 प्रतिशत फसलें प्रभावित हुई हैं। अगर यह स्थिति 4-5 दिन और रही, तो नुकसान दोगुना हो सकता है।" ग्रामीणों ने बताया कि बाजरे की बालियों में कालापन आ रहा है, जबकि मूंगफली की फलियां सड़ने लगी हैं। इससे न केवल उत्पादन कम होगा, बल्कि बाजार मूल्य भी प्रभावित होंगे।

दैनिक जीवन और सुरक्षा पर असर;  कोहरे के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। जिले की मुख्य सड़कें और गांवों को जोड़ने वाले रास्ते सुबह के समय धुंध से ढके रहते हैं। पुलिस थानों से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले तीन दिनों में कोहरे के कारण दो छोटी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें वाहन चालक रास्ता भटक गए। महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं। सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों को देरी हो रही है, जबकि पशुपालक अपने मवेशियों को चराने में असमर्थ है।

मौसम विशेषज्ञों की राय; यह बदलाव जलवायु परिवर्तन और पश्चिमी विक्षोभ का असर हो सकता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) की जयपुर इकाई के अनुसार, पाकिस्तान सीमा से सटे इलाकों में ठंडी हवाएं प्रवेश कर रही हैं, जो मानसून की नमी के साथ मिलकर कोहरा पैदा कर रही हैं।

यह असामान्य है, लेकिन वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण ऐसे बदलाव बढ़ रहे हैं। विभाग ने अगले 48 घंटों में कोहरे की स्थिति बने रहने की चेतावनी दी है।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.