पूर्व CM गहलोत बोले- विधायक को खुद पर पेट्रोल उड़ेलने तक मजबूर होना पड़ा, भाजपा शासन लोकतंत्र पर कलंक

बाड़मेर के गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन ने मंगलवार को बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कलेक्ट्रेट परिसर में खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया। मजदूरों की मांगों को लेकर प्रशासन के साथ पांच घंटे चली वार्ता भी बेनतीजा रही।

May 20, 2026 - 14:20
पूर्व CM गहलोत बोले- विधायक को खुद पर पेट्रोल उड़ेलने तक मजबूर होना पड़ा, भाजपा शासन लोकतंत्र पर कलंक

राजस्थान के बाड़मेर जिले में गिरल लिग्नाइट माइंस को लेकर चल रहा मजदूर आंदोलन अब और उग्र होता दिखाई दे रहा है। मंगलवार को शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कलेक्ट्रेट परिसर में खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया, जिससे पूरे प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई।

हालांकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और समर्थकों ने तुरंत हस्तक्षेप कर उन्हें रोक लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद प्रशासन और सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

38 दिनों से जारी है मजदूरों का धरना

दरअसल, बाड़मेर के गिरल गांव में पिछले 38 दिनों से स्थानीय श्रमिक, ड्राइवर और ग्रामीण धरने पर बैठे हैं। आंदोलनकारी राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) की गिरल लिग्नाइट माइंस में स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने और 8 घंटे की ड्यूटी लागू करने की मांग कर रहे हैं।

विधायक रविंद्र सिंह भाटी पिछले 15 दिनों से खुद भी धरना स्थल पर मजदूरों के साथ बैठे हुए हैं। इससे पहले 13 मई को भीषण गर्मी के कारण उनकी तबीयत भी बिगड़ गई थी।

प्रशासन के नहीं पहुंचने पर कलेक्ट्रेट कूच

मंगलवार को गिरल गांव में मजदूर रैली और जनसभा आयोजित की गई थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन और सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि बातचीत के लिए नहीं पहुंचा। इसके बाद विधायक भाटी के नेतृत्व में आंदोलनकारियों ने कलेक्ट्रेट की ओर कूच कर दिया।

रैली को रोकने के लिए प्रशासन ने बीएसएफ गेट के पास बसें खड़ी कर रास्ता बंद करने का प्रयास किया, लेकिन इसके बावजूद विधायक और समर्थक पैदल कलेक्ट्रेट पहुंच गए।

कलेक्ट्रेट परिसर में आत्मदाह का प्रयास

कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद एक प्रतिनिधिमंडल अधिकारियों से वार्ता के लिए अंदर गया। इसी दौरान विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने अपने बैग से पेट्रोल की बोतल निकाली और खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया।

मौके पर मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों ने तुरंत उन्हें पकड़ लिया और आग लगाने से रोक दिया। इस घटना के बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

पांच घंटे चली वार्ता, समाधान नहीं

घटना के बाद कलेक्टर चिन्मयी गोपाल, एसपी चुनाराम जाट और अन्य अधिकारियों के साथ विधायक भाटी की करीब पांच घंटे तक वार्ता चली। बातचीत के दौरान कुछ मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन प्रमुख मांगों पर कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका।

वार्ता बेनतीजा रहने के बाद विधायक भाटी एक बार फिर गिरल गांव लौट गए और रात धरना स्थल पर ही बिताई।

कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरा

घटना के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि एक विधायक का खुद पर पेट्रोल उड़ेलना लोकतंत्र पर कलंक है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन की उदासीनता के कारण हालात इतने बिगड़ गए कि विधायक और मजदूरों को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा। गहलोत ने कहा कि यदि एक विधायक की बात नहीं सुनी जा रही तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

क्यों हो रहा है विरोध?

गिरल और थुम्बली क्षेत्र में RSMML की ओर से लिग्नाइट खनन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण के समय रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन अब स्थानीय युवाओं को नौकरी से हटाया जा रहा है और बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।

आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें हैं:

  • स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता
  • 8 घंटे की शिफ्ट लागू करना
  • श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा
  • हटाए गए कर्मचारियों की बहाली

क्या है RSMML और गिरल माइंस?

राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) राजस्थान सरकार का सार्वजनिक उपक्रम (PSU) है। यह रॉक फॉस्फेट, लिग्नाइट, जिप्सम और लाइमस्टोन के खनन का कार्य करता है।

गिरल लिग्नाइट माइंस राजस्थान की पहली आधुनिक ओपनकास्ट लिग्नाइट खदान मानी जाती है, जिसकी शुरुआत 1994 में हुई थी। यहां से निकाला गया लिग्नाइट गिरल लिग्नाइट पावर प्लांट को सप्लाई किया जाता है।

आंदोलन से बढ़ी राजनीतिक हलचल

विधायक रविंद्र सिंह भाटी के आत्मदाह प्रयास के बाद यह आंदोलन अब सिर्फ मजदूरों का मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि राज्य की राजनीति का बड़ा विषय बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रशासन पर समाधान निकालने का दबाव और बढ़ सकता है।

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