ओरण बचाओ पदयात्रा में गूंजा जनसंकल्प, विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कंधों पर उठाया विरासत का मान

Oran Bachao Padayatra: गुरुवार रात इस यात्रा में बाड़मेर के शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने शामिल होकर आंदोलन को नई ऊर्जा दी।

Feb 13, 2026 - 12:56
ओरण बचाओ पदयात्रा में गूंजा जनसंकल्प, विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कंधों पर उठाया विरासत का मान
ओरण बचाओ पदयात्रा में गूंजा जनसंकल्प, विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कंधों पर उठाया विरासत का मान
ओरण बचाओ पदयात्रा में गूंजा जनसंकल्प, विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कंधों पर उठाया विरासत का मान

राजस्थान की तपती रेतीली धरती पर इन दिनों एक अनोखा जनआंदोलन आकार ले रहा है। जैसलमेर के पावन धाम तनोट माता मंदिर से शुरू हुई “ओरण बचाओ पदयात्रा” अब मारवाड़ के हृदय क्षेत्र जोधपुर पहुंच चुकी है। यह यात्रा केवल जमीन बचाने का अभियान नहीं, बल्कि पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का संकल्प बन चुकी है।

गुरुवार रात इस पदयात्रा में शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी शामिल हुए, जिससे आंदोलन को नई ऊर्जा और राजनीतिक समर्थन मिला।

भावुक कर देने वाला दृश्य

जोधपुर के बालेसर में एक अनोखा दृश्य सामने आया, जब विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने आंदोलन के प्रणेता पर्यावरण प्रेमी सुमेर सिंह को अपने कंधों पर बैठाकर लगभग एक किलोमीटर तक पैदल यात्रा की। यह दृश्य प्रतीक था—नई पीढ़ी को अपनी विरासत ‘ओरण’ को अपने कंधों पर उठाकर आगे बढ़ाना होगा।

भाटी ने बालेसर के चामुंडा माता मंदिर में पदयात्रियों के साथ जमीन पर रात बिताई, जिससे यह संदेश गया कि यह आंदोलन राजनीति से परे जनभावनाओं का आंदोलन है।

सभा को संबोधित करते हुए भाटी ने कहा, “मैं न बीजेपी का हूँ, न कांग्रेस का। मुझे जो मिला है, जनता ने दिया है। सच बोलने के लिए सत्ता की आँखों में आँखें डालनी पड़ती हैं।” उन्होंने कहा कि 32 दिनों तक घर-परिवार छोड़कर सड़कों पर बैठना सामान्य बात नहीं है। यह संघर्ष केवल जमीन का नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पर्यावरण को बचाने का है।

क्या है ‘ओरण’ और क्यों हो रहा है आंदोलन?

राजस्थान के ग्रामीण जीवन में ‘ओरण’ केवल खाली भूमि नहीं होती, बल्कि यह पारंपरिक संरक्षित वन क्षेत्र होता है। सदियों से ये क्षेत्र—

पशुओं के लिए चारागाह (गोचर) उपलब्ध कराते हैं,

प्राकृतिक जल स्रोत (आगौर) को सुरक्षित रखते हैं,

देवी-देवताओं के नाम पर संरक्षित होने के कारण जैव विविधता को बचाते हैं।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि विकास और औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर इन पारंपरिक भूमि क्षेत्रों का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है।

सुमेर सिंह और भोपाल सिंह के नेतृत्व में यह 725 किलोमीटर लंबी पदयात्रा जयपुर तक जाएगी, ताकि सरकार तक इस जनआवाज़ को पहुंचाया जा सके।

हर उम्र की भागीदारी

इस पदयात्रा में 10 साल के बच्चों से लेकर 75 साल के बुजुर्ग तक शामिल हैं। कई लोग अब तक 350 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुके हैं।

विधायक रविंद्र सिंह भाटी का इस आंदोलन से जुड़ना यह संकेत देता है कि राजस्थान की नई पीढ़ी अपनी जड़ों और पर्यावरण की रक्षा के लिए सजग हो रही है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह रेगिस्तान से उठी आवाज सत्ता के गलियारों तक गूंज पाएगी और क्या ओरण, गोचर और आगौर की यह विरासत सुरक्षित रह पाएगी। फिलहाल, पदयात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है—संघर्ष और संकल्प के साथ।

Web Desk Web Desk The Khatak