अमेरिका में शिक्षा संकट: भारतीय मूल के गवर्नर उम्मीदवार ने चेतावनी दी - चीनी छात्र अमेरिकी बच्चों से 4 साल आगे, 78% हाई स्कूल स्टूडेंट्स मैथ्स में कमजोर

भारतीय मूल के रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी ने चेताया कि अमेरिका के 78% हाई स्कूल छात्र मैथ्स में कमजोर हैं और औसत चीनी छात्र अमेरिकी छात्र से करीब 4 साल आगे है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय संकट बताया और ओहायो गवर्नर चुनाव में शिक्षा सुधार को बड़ा मुद्दा बनाने का ऐलान किया।

Nov 25, 2025 - 17:42
अमेरिका में शिक्षा संकट: भारतीय मूल के गवर्नर उम्मीदवार ने चेतावनी दी - चीनी छात्र अमेरिकी बच्चों से 4 साल आगे, 78% हाई स्कूल स्टूडेंट्स मैथ्स में कमजोर

वॉशिंगटन/ओहायो, 25 नवंबर 2025 : अमेरिका की शिक्षा प्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। भारतीय मूल के प्रमुख रिपब्लिकन नेता और ओहायो राज्य के गवर्नर पद के मजबूत दावेदार विवेक रामास्वामी ने अमेरिकी शिक्षा के मौजूदा हालातों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने हालिया सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका के हाई स्कूल के 78 प्रतिशत छात्र गणित (मैथ्स) में न्यूनतम स्तर पर भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। रामास्वामी का यह बयान न केवल शिक्षा क्षेत्र में सुधार की मांग करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर भी खतरे की घंटी बजा रहा है।रामास्वामी, जो बायोटेक उद्योग में एक सफल उद्यमी के रूप में जाने जाते हैं, ने पिछले महीने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान यह चौंकाने वाला दावा किया था। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि एक एवरेज चीनी छात्र अमेरिकी छात्र से लगभग चार साल आगे है।" यह बयान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शिक्षा मूल्यांकन रिपोर्ट्स के आधार पर दिया, जिसमें पीस (PISA) और अन्य वैश्विक सर्वेक्षणों का जिक्र था। उनके अनुसार, चीन जैसे देशों में कठोर शिक्षा पाठ्यक्रम और अधिक अभ्यास-केंद्रित दृष्टिकोण के कारण उनके छात्र गणित, विज्ञान और अन्य विषयों में अमेरिकी छात्रों से काफी आगे निकल चुके हैं।

आंकड़ों की सच्चाई: 78% छात्रों का मैथ्स में फेलियर रेट रामास्वामी ने अपने बयान को मजबूत करने के लिए अमेरिकी शिक्षा विभाग (U.S. Department of Education) के ताजा आंकड़ों का सहारा लिया। नेशनल असेसमेंट ऑफ एजुकेशनल प्रोग्रेस (NAEP) की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में अमेरिका के हाई स्कूल (9वीं से 12वीं कक्षा) के छात्रों में से 78 प्रतिशत गणित में 'प्रोफिशिएंट' (निपुण) स्तर पर पहुंचने में असफल रहे। यह आंकड़ा पिछले दशक की तुलना में और भी निराशाजनक है, जब यह दर 70 प्रतिशत के आसपास थी। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के बाद ऑनलाइन शिक्षा और संसाधनों की कमी ने इस अंतर को और बढ़ा दिया है।रामास्वामी ने इसे 'राष्ट्रीय संकट' करार देते हुए कहा, "हमारी शिक्षा प्रणाली अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिका को पीछे धकेल रही है। अगर हम चीनी छात्रों से 4 साल पीछे हैं, तो कल की नौकरियां और नवाचार भी हमसे दूर हो जाएंगे।" उन्होंने उदाहरण के तौर पर बताया कि चीन में प्राथमिक स्तर से ही छात्रों को दैनिक 2-3 घंटे गणित का अभ्यास कराया जाता है, जबकि अमेरिका में यह समय मनोरंजन और अन्य गतिविधियों पर अधिक खर्च होता है।

विवेक रामास्वामी का राजनीतिक सफर और शिक्षा पर उनका एजेंडा विवेक रामास्वामी का जन्म भारत के मूल निवासी माता-पिता के यहां अमेरिका में हुआ था। वह हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से बायोलॉजी में ग्रेजुएट हैं और रोशे नामक फार्मास्यूटिकल कंपनी में काम करने के बाद अपना खुद का बायोटेक स्टार्टअप शुरू किया, जो आज अरबों डॉलर का है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी से नामांकन की कोशिश की थी, लेकिन अब उनका फोकस ओहायो राज्य के गवर्नर पद पर है। वर्तमान में, ओहायो के गवर्नर माइक डेवॉस हैं, और रामास्वामी 2026 के चुनाव में मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहे हैं।शिक्षा सुधार उनके चुनावी एजेंडे का प्रमुख हिस्सा है। रामास्वामी ने प्रस्ताव दिया है कि अमेरिकी स्कूलों में 'मेरिट-बेस्ड' (लाभ अर्जन आधारित) शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए, जिसमें गणित और विज्ञान पर अधिक जोर हो। उन्होंने कहा, "हमारे बच्चे डिजिटल गेम्स में माहिर हैं, लेकिन असली दुनिया की गणनाओं में पिछड़ रहे हैं। हमें चीन की तरह अनुशासन और कौशल पर फोकस करना होगा।" इसके अलावा, वे स्कूलों में एआई और स्टेम (Science, Technology, Engineering, Math) शिक्षा को अनिवार्य बनाने की वकालत कर रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय: क्या अमेरिका वाकई पीछे है? शिक्षा विशेषज्ञों ने रामास्वामी के दावे को आंशिक रूप से सही ठहराया है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर लिंडा डार्लिंग-हैमंड ने कहा, "PISA 2022 रिपोर्ट में अमेरिका 81 देशों में गणित में 34वें स्थान पर था, जबकि चीन (बीजिंग-शंघाई क्षेत्र) शीर्ष पर था। यह अंतर वास्तव में 3-4 शैक्षणिक वर्षों के बराबर है।" हालांकि, कुछ आलोचक मानते हैं कि अमेरिका की शिक्षा प्रणाली रचनात्मकता और नवाचार पर अधिक जोर देती है, जो चीन की रट्टा-प्रथा से अलग है।रिपब्लिकन पार्टी के अंदर रामास्वामी को 'नई पीढ़ी का नेता' माना जा रहा है, जो आप्रवासी मूल्यों और अमेरिकी सपने को जोड़ते हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है, जहां #EducationCrisisAmerica ट्रेंड कर रहा है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने भी जवाब दिया है कि संघीय फंडिंग बढ़ाने से ही समस्या हल होगी।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.