TMC में बगावत के बड़े संकेत! 59 विधायकों के समर्थन का दावा, ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाने की तैयारी?
पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर होने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही खींचतान चर्चा का विषय बनी हुई है। सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के नेतृत्व में एक बागी गुट सक्रिय दिखाई दे रहा है, जिसने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
सूत्रों के मुताबिक, बागी गुट दावा कर रहा है कि उसे TMC के बड़ी संख्या में विधायकों का समर्थन हासिल है। इसी के चलते पार्टी में टूट और नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाने की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नया नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि कई विधायक विधानसभा पहुंचे और इस संबंध में रणनीति बनाई गई। बागी गुट के नेताओं का कहना है कि वे पार्टी विरोधी नहीं हैं, लेकिन विधानसभा में एक अनुभवी और वरिष्ठ नेता को विपक्ष का चेहरा बनाना चाहते हैं।
इसी सिलसिले में विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की संभावना भी जताई जा रही है।
पार्टी बैठक से दूरी ने बढ़ाई अटकलें
राजनीतिक हलकों में उस समय चर्चाएं और तेज हो गईं जब बड़ी संख्या में विधायक ममता बनर्जी की बैठक में शामिल नहीं हुए। इसके बाद बागी नेताओं की सक्रियता ने पार्टी के भीतर असंतोष की खबरों को और मजबूती दी।
ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा द्वारा कई विधायकों से मुलाकात किए जाने की खबरों ने संकेत दिया कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं।
अभिषेक बनर्जी को लेकर भी उठ रहे सवाल
TMC के भीतर कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी अभिषेक बनर्जी को लेकर भी सामने आ रही है। पार्टी के कुछ असंतुष्ट नेताओं का आरोप है कि वरिष्ठ नेताओं की भूमिका लगातार कम होती गई और निर्णय लेने की प्रक्रिया कुछ लोगों तक सीमित हो गई।
हालांकि पार्टी की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अंदरूनी मतभेदों की चर्चा लगातार जारी है।
धरने में कम दिखी मौजूदगी
ममता बनर्जी द्वारा आयोजित हालिया विरोध प्रदर्शन में भी अपेक्षित संख्या में विधायक और सांसद नजर नहीं आए। इससे राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह सवाल उठने लगा कि क्या पार्टी के भीतर असंतोष पहले से ज्यादा गहरा हो चुका है।
धरने में सीमित जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी को भी पार्टी की मौजूदा स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या TMC में टूट का खतरा है?
फिलहाल TMC की ओर से किसी बड़े विभाजन की संभावना को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन बागी विधायकों की गतिविधियां, नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवाल और पार्टी बैठकों से दूरी जैसे घटनाक्रम यह संकेत जरूर दे रहे हैं कि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में विधायकों की संख्या, विधानसभा में शक्ति संतुलन और पार्टी नेतृत्व के फैसले इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC के भीतर बढ़ता असंतोष ममता बनर्जी के लिए नई चुनौती बनता दिख रहा है। बागी नेताओं की सक्रियता और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व इस स्थिति से कैसे निपटता है और क्या बागी गुट अपनी ताकत साबित कर पाता है या नहीं।