CJI सूर्यकांत ने 5 नए जजों को दिलाई शपथ...न्यायपालिका को मिली नई मजबूती
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के पांच नवनियुक्त न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाई। इन नियुक्तियों के बाद सर्वोच्च न्यायालय में जजों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना की नियुक्ति से महिला प्रतिनिधित्व को भी मजबूती मिली है।
देश की सर्वोच्च अदालत में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट के पांच नवनियुक्त न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
सुप्रीम कोर्ट में 5 नए जज
उच्चतम न्यायालय परिसर में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। इन नियुक्तियों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई है। हाल ही में केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में जजों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसके बाद इन नियुक्तियों का रास्ता साफ हुआ।
सुप्रीम कोर्ट में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ा
नवनियुक्त न्यायाधीशों में सबसे अधिक चर्चा वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना की नियुक्ति को लेकर है। उन्हें सीधे वकालत से सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया है, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। उनकी नियुक्ति से सर्वोच्च न्यायालय में महिलाओं का प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा। अगस्त 2021 के बाद पहली बार किसी महिला को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना एकमात्र महिला न्यायाधीश थीं। ऐसे में वी. मोहना की नियुक्ति को न्यायपालिका में लैंगिक संतुलन की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी न्यायिक व्यवस्था को अधिक समावेशी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने में मदद करेगी।
चार हाईकोर्ट CJI पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
जिन न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया है, उनमें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, बंबई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली शामिल हैं। केंद्र सरकार ने सोमवार को इन सभी नियुक्तियों को मंजूरी दी थी। कानूनी जानकारों का मानना है कि इन नियुक्तियों से सुप्रीम कोर्ट की कार्यक्षमता और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी। बढ़ते मामलों के बोझ को देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि लंबे समय से आवश्यक मानी जा रही थी। नए जजों के शामिल होने से लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट देश की न्यायिक व्यवस्था का सर्वोच्च स्तंभ माना जाता है और यहां होने वाली हर नियुक्ति का व्यापक प्रभाव न्याय व्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में पांच नए न्यायाधीशों का शपथ ग्रहण न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।