RBSE 10वीं रिजल्ट: 94.23% पास, भीलवाड़ा से आई दो तस्वीरें—एक ने बढ़ाया हौसला, दूसरी ने झकझोरा

राजस्थान बोर्ड 10वीं रिजल्ट 2026 में 94.23% छात्र सफल रहे। भीलवाड़ा से आई दो कहानियों में एक ने संघर्ष से 98% अंक हासिल कर प्रेरणा दी, जबकि दूसरी घटना ने परीक्षा के दबाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

Mar 25, 2026 - 14:28
RBSE 10वीं रिजल्ट: 94.23% पास, भीलवाड़ा से आई दो तस्वीरें—एक ने बढ़ाया हौसला, दूसरी ने झकझोरा
RBSE 10वीं रिजल्ट: 94.23% पास, भीलवाड़ा से आई दो तस्वीरें—एक ने बढ़ाया हौसला, दूसरी ने झकझोरा

“हौसलों के आगे आसमां भी झुक जाता है, लेकिन कभी-कभी एक छोटी सी हार जिंदगी पर भारी पड़ जाती है…” राजस्थान के 10वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम ने इस बार प्रदेश को दो ऐसी कहानियाँ दी हैं, जो दिल को छू लेने के साथ-साथ सोचने पर मजबूर भी करती हैं।राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी किए गए 10वीं के परिणाम में इस वर्ष कुल 94.23% छात्र सफल रहे हैं। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में बेहतर है। हर बार की तरह इस बार भी बेटियों ने बाजी मारी—

  • छात्राएं: 94.90%
  • छात्र: 93.63%

लेकिन इन आंकड़ों के पीछे छिपी कहानियाँ ही इस रिजल्ट को खास बनाती हैं।

पहली कहानी: संघर्ष से सफलता तक

भीलवाड़ा जिले के लखुला गांव के 16 वर्षीय ईश्वर जाट ने अपनी मेहनत से मिसाल कायम की है।
दो साल पहले पिता का निधन हो गया, जो आइसक्रीम की लारी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। घर में आर्थिक तंगी थी, लेकिन सपने बड़े थे—कलेक्टर बनने का सपना।

मां और सात बहनों ने मजदूरी और खेती करके ईश्वर की पढ़ाई जारी रखी। आज उसी मेहनत का परिणाम है—ईश्वर ने 98% अंक हासिल किए। यह कहानी साबित करती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर हौसले मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है।

दूसरी कहानी: एक हार, और सब खत्म

भीलवाड़ा के करेड़ा क्षेत्र से एक दर्दनाक खबर भी सामने आई। वंशिका रेगर, जो इस परीक्षा में असफल रही, उसने आत्महत्या कर ली। यह घटना कई सवाल खड़े करती है— क्या एक परीक्षा किसी की जिंदगी से ज्यादा बड़ी हो सकती है? क्या हम अपने बच्चों को असफलता झेलना सिखा पा रहे हैं? यह समय है ऐसे छात्रों के साथ खड़े होने का, जो आज निराश हैं। उन्हें यह समझाने का कि असफलता अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत है।

टॉपर्स और अन्य आंकड़े

  • सीकर की प्रियांशी ने 99.83% अंक हासिल कर प्रदेश में टॉप किया
  • कई छात्रों ने गणित, विज्ञान और संस्कृत में 100/100 अंक प्राप्त किए
  • 5वीं का परिणाम: 97.75%
  • 8वीं का परिणाम: 97%

यह रिजल्ट सिर्फ नंबरों की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, उम्मीद और संवेदनशीलता का आईना है।
जहां एक ओर ईश्वर जैसे छात्र प्रेरणा बनते हैं, वहीं वंशिका की कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि बच्चों पर दबाव कम करना कितना जरूरी है। आज 'द खटक' की टीम उन सभी छात्रों को बधाई देती है जिन्होंने सफलता पाई है। और जो किसी कारणवश पीछे रह गए हैं, उनसे बस इतना कहना है—थक कर मत बैठिए, क्योंकि असली योद्धा वही है जो ठोकर खाकर संभलना जानता है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground