45 लाख खर्च कर अमेरिका गया युवक, वापस आया केवल शव: परिवार के सपने चूर-चूर, मां-बहनें आखिरी बार छू भी नहीं सकीं
राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के 24 वर्षीय विपिन चौधरी जून 2024 में 45 लाख रुपये (पुश्तैनी जमीन बेचकर और कर्ज लेकर) खर्च कर अमेरिका के जॉर्जिया गए थे। शॉपिंग मॉल में बिलिंग का काम करते हुए 30 दिसंबर 2025 को साइलेंट हार्ट अटैक से उनकी अचानक मौत हो गई। 12 दिन बाद शव गांव पहुंचा तो संक्रमण के डर से परिवार (मां, बहनें, दादी) दूर से ही दर्शन कर सके, छू नहीं पाए। परिवार अब 20 लाख से ज्यादा कर्ज में डूबा है, पिता सदमे में अस्पताल में भर्ती रहे थे। सरकार और समाज से आर्थिक मदद की अपील।
राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के जाट बहरोड़ गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। 24 वर्षीय विपिन चौधरी पुत्र हवा सिंह, जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में 45 लाख रुपये खर्च कर अमेरिका गए थे, वहां अचानक साइलेंट हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। मौत के 12 दिन बाद शनिवार को उनका शव गांव पहुंचा, लेकिन परिवार वाले उसे संक्रमण के डर से दूर से ही देख सके। मां, बहनें और दादी बिलखते हुए भी आखिरी बार अपने बेटे-भाई को छू नहीं पाईं।
अमेरिका जाने के लिए बेची पुश्तैनी जमीन
विपिन जून 2024 में अमेरिका के जॉर्जिया राज्य पहुंचे थे। परिवार ने उनके लिए डेढ़ बीघा पुश्तैनी जमीन बेची थी और कर्ज भी लिया था। कुल 45 लाख रुपये का भारी खर्च कर वे वहां नौकरी करने गए। वहां एक शॉपिंग मॉल में बिलिंग का काम करते थे। परिवार को उम्मीद थी कि विपिन कुछ सालों में अच्छा पैसा कमाकर कर्ज चुकाएंगे और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारेंगे।
लेकिन किस्मत ने कुछ और ही लिखा था। 29 दिसंबर 2025 की रात विपिन ने परिवार से वीडियो कॉल पर बात की थी। वे पूरी तरह स्वस्थ लग रहे थे और मां को कहा था कि नींद आ रही है, सोने जा रहा हूं। अगली सुबह 30 दिसंबर को जब वे नहीं उठे, तो साथ रहने वाले दोस्त ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत का कारण साइलेंट हार्ट अटैक बताया गया।
शव पहुंचने पर परिवार का दर्दनाक मंजर
शव भारत पहुंचने में 12 दिन लगे। गांव पहुंचने पर शव पुराना होने के कारण संक्रमण का खतरा था, इसलिए सभी को मास्क पहनने पड़े। परिवार के सदस्यों ने दूर से ही अंतिम दर्शन किए। दोनों बहनें अर्चना और निशा बिलखते हुए भाई की तरफ बढ़ीं, लेकिन उन्हें छूने नहीं दिया गया। दिव्यांग मां पहले से ही मानसिक रूप से कमजोर हैं और सदमे में बेसुध हैं। दादी भी दूर से पोते को देखती रहीं।
पिता, जो बेटे की मौत की खबर मिलते ही सदमे में तीन दिन अस्पताल में भर्ती रहे थे, एक दिन पहले डिस्चार्ज होकर आए और उन्होंने ही मुखाग्नि दी।
परिवार पर भारी कर्ज का बोझ
परिवार के सदस्य नरेश चौधरी ने बताया कि अब परिवार पर 20 लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज है। जमीन बेचने के बाद अब केवल आधा बीघा जमीन बची है। गांव के मनोज कुमार और नवदीप ने बताया कि परिवार पूरी तरह टूट चुका है। सबके सपने चकनाचूर हो गए। विपिन परिवार का सहारा थे, लेकिन अब स्थिति ऐसी है कि परिवार को आर्थिक सहयोग की सख्त जरूरत है।
शव भारत लाने में भारत सरकार के इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड ने करीब 7.5 लाख रुपये का खर्च वहन किया। इस प्रक्रिया में राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नार्थ अमेरिका (RANA), न्यूयॉर्क के अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने अहम भूमिका निभाई। भारतीय दूतावास ने भी पूरा सहयोग किया।