NEET-2026 पेपर लीक का 45 लाख वाला ‘खेल’ कैसे हुआ बेनकाब? 8 महीने पहले बनी डील और 120 सवालों के मेल ने खोली माफिया की पोल

NEET-2026 पेपर लीक मामले में 45 लाख की डील, 8 महीने की साजिश और 120 सवालों के मिलान ने पूरे माफिया नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है। जांच में कई राज्यों तक फैला लिंक सामने आया है।

May 14, 2026 - 15:01
NEET-2026 पेपर लीक का 45 लाख वाला ‘खेल’ कैसे हुआ बेनकाब? 8 महीने पहले बनी डील और 120 सवालों के मेल ने खोली माफिया की पोल

NEET-2026 पेपर लीक मामले में अब एक-एक कर चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे खेल की योजना परीक्षा से करीब 8 महीने पहले ही तैयार कर ली गई थी। राजस्थान में इस पेपर लीक नेटवर्क के लिए करीब 45 लाख रुपये में डील हुई थी, जिसमें कई राज्यों के लोग शामिल थे।

45 लाख की डील और 30 लाख का एडवांस

जांच में सामने आया है कि जयपुर के जमवारामगढ़ के दो भाइयों ने माफिया को करीब 30 लाख रुपये एडवांस दिए थे। बाकी रकम परीक्षा के बाद देने की बात तय थी। गिरोह ने भरोसा दिलाया था कि उनके बताए 143 प्रश्न परीक्षा में आएंगे।

हालांकि, वास्तविक परीक्षा में इनमें से करीब 120 प्रश्न मिलते-जुलते पाए गए, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया और जांच एजेंसियों को बड़ा सुराग मिला।

महाराष्ट्र से राजस्थान तक फैला नेटवर्क

पूरे रैकेट की कड़ी महाराष्ट्र से शुरू होकर राजस्थान तक जुड़ती दिख रही है।

  • सबसे पहले धनंजय नामक व्यक्ति ने नासिक के शुभम खैरनार को पेपर पहुंचाया
  • शुभम ने यह पेपर हरियाणा के यश यादव तक पहुंचाया
  • यश यादव पहले सीकर में पढ़ाई कर चुका था और वहीं से उसका संपर्क राजस्थान के जमवारामगढ़ के दो भाइयों से हुआ

इसके बाद यही नेटवर्क पूरे पेपर डील का मुख्य केंद्र बन गया।

‘गेस पेपर’ के नाम पर छिपाया गया खेल

जांच में यह भी सामने आया कि इस बार माफिया ने खुद को बचाने के लिए “गेस पेपर” का नाम इस्तेमाल किया। परीक्षा से पहले यह पेपर छात्रों तक पहुंचाया गया, ताकि इसे लीकेज की बजाय अनुमानित पेपर बताया जा सके।

लेकिन जब परीक्षा में वही सवाल सामने आए, तो पूरा मामला उजागर हो गया।

गिरफ्तारियां और जांच

अब तक इस मामले में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • नासिक का शुभम खैरनार
  • जयपुर के दो भाई दिनेश बिवाल और मांगीलाल बिवाल
  • सीकर के राकेश मंडावरिया
  • हरियाणा के यश यादव

इन सभी से CBI और SOG की टीमें लगातार पूछताछ कर रही हैं।

कैसे फैला पूरा पेपर नेटवर्क

सूत्रों के अनुसार यह नेटवर्क टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए भी फैलाया गया था। कई छात्रों तक यह पेपर परीक्षा से पहले पहुंच गया था, जिसकी जांच अभी जारी है।

जांच का अगला फोकस

अब एजेंसियों की नजर इस बात पर है कि: 

  • पेपर लीक का असली मास्टरमाइंड कौन है
  • कोचिंग संस्थानों की क्या भूमिका रही
  • और पैसा किन-किन खातों में ट्रांसफर हुआ

CBI अब इस पूरे मामले को अंतरराज्यीय संगठित रैकेट मानकर जांच आगे बढ़ा रही है।

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