राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: स्टेनोग्राफर और पर्सनल असिस्टेंट ग्रेड-II भर्ती की पूरी मेरिट लिस्ट रद्द, 5% अतिरिक्त छूट को बताया अवैध
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्टेनोग्राफर और पर्सनल असिस्टेंट ग्रेड-II भर्ती की प्रोविजनल (25 सितंबर 2025) एवं फाइनल (21 अक्टूबर 2025) मेरिट लिस्ट को पूरी तरह रद्द कर दिया। कोर्ट ने RSMSSB द्वारा दी गई 5% अतिरिक्त गलती छूट को अवैध बताते हुए कहा कि पर्याप्त योग्य उम्मीदवार मौजूद होने पर नियम बदलना गैरकानूनी है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने 45 दिनों में मूल नियमों (सामान्य: 20%, SC/ST: 25%) के आधार पर नई मेरिट लिस्ट तैयार करने के आदेश दिए। यह फैसला मेरिट की रक्षा और भर्ती में पारदर्शिता का प्रतीक है।
कभी-कभी सिर्फ 5 प्रतिशत का फर्क पूरी जिंदगी बदल देता है... और जब यही 5 प्रतिशत नियमों से बाहर हो, तो न्याय की अदालत उसे पलट भी देती है। राजस्थान हाईकोर्ट ने इसी सिद्धांत को साकार करते हुए हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सख्त फैसला सुनाया है। स्टेनोग्राफर और पर्सनल असिस्टेंट ग्रेड-II की भर्ती प्रक्रिया में दी गई 5% अतिरिक्त छूट को गैरकानूनी करार देते हुए कोर्ट ने पूरी प्रोविजनल और फाइनल मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया है।
भर्ती का पूरा मामला क्या था?
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) ने 26 फरवरी 2024 को स्टेनोग्राफर और पर्सनल असिस्टेंट ग्रेड-II के कुल 444 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। चयन प्रक्रिया दो चरणों में थी:
चरण-1: लिखित परीक्षा
चरण-2: स्टेनोग्राफी स्किल टेस्ट (फेज-II), जो 29 जून 2025 को आयोजित हुई।
नियमों के अनुसार स्टेनोग्राफी स्किल टेस्ट में गलतियों की अधिकतम सीमा (permissible mistakes/errors) तय थी:सामान्य वर्ग (Unreserved): 20% तक गलतियां स्वीकार्य, SC/ST वर्ग: 25% तक गलतियां स्वीकार्य,विज्ञापन में स्पष्ट प्रावधान था कि यदि किसी श्रेणी में पर्याप्त योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होते, तो केवल उसी श्रेणी में 5% अतिरिक्त छूट दी जा सकती है।
विवाद की जड़: बीच भर्ती में 5% अतिरिक्त छूट का फैसला
भर्ती प्रक्रिया चल रही थी कि RSMSSB ने सभी श्रेणियों में अचानक 5% अतिरिक्त छूट दे दी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि यह फैसला मनमाना और नियमों के खिलाफ था। उनके अनुसार:बिना इस अतिरिक्त छूट के ही 643 योग्य उम्मीदवार उपलब्ध थे (जो पदों की संख्या 444 से अधिक थी)।इसके बावजूद 904 उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया।इससे कम अंक वाले उम्मीदवारों को अवसर मिला, जबकि मेरिटोरियस उम्मीदवार प्रभावित हुए।याचिकाकर्ताओं ने इसे मेरिट के साथ समझौता और भर्ती प्रक्रिया में हेरफेर बताया। मामला राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचा।हाईकोर्ट का फैसला: जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ का सख्त रुखहाईकोर्ट की जयपुर पीठ में जस्टिस आनंद शर्मा ने सुनवाई के बाद 18 मार्च 2026 को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा:भर्ती प्रक्रिया के बीच नियम बदलना गलत है।
सभी श्रेणियों में 5% अतिरिक्त छूट देना अवैध है, क्योंकि पर्याप्त योग्य उम्मीदवार मौजूद थे।न्यूनतम मानकों (minimum standards) में ढील देना मेरिट की गुणवत्ता के साथ सीधा समझौता है।
कोर्ट ने आदेश दिए:
25 सितंबर 2025 को जारी प्रोविजनल मेरिट लिस्ट और 21 अक्टूबर 2025 को जारी फाइनल मेरिट लिस्ट को पूरी तरह निरस्त (quashed and set aside) किया जाए।
मूल नियम लागू करते हुए नई मेरिट लिस्ट तैयार की जाए: सामान्य वर्ग में 20% और SC/ST में 25% गलतियों की सीमा, तथा 5% अतिरिक्त छूट केवल उन श्रेणियों में जहां उम्मीदवारों की कमी हो।यह प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी की जाए।
अब क्या होगा?
इस फैसले से हजारों अभ्यर्थियों में उम्मीद जगी है कि अब सच्ची मेरिट के आधार पर चयन होगा। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या नई मेरिट लिस्ट समय पर आएगी और विवाद खत्म होगा, या फिर नई चुनौतियां सामने आएंगी?
यह मामला सिर्फ एक भर्ती का नहीं, बल्कि मेरिट बनाम मैनिपुलेशन की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है। जहां न्याय ने साफ कहा—नियम सबके लिए बराबर होने चाहिए, और छोटा-सा 5% फर्क भी अगर गलत तरीके से इस्तेमाल हो, तो पूरी प्रक्रिया पलट सकती है।