खेजड़ी पेड़ों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया? आखिर क्यों याद आया 1730 का बलिदान

राजस्थान हाईकोर्ट ने खेजड़ी पेड़ों की कटाई को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसने पर्यावरण और विकास की बहस को फिर तेज कर दिया। आखिर क्यों कोर्ट को याद दिलाना पड़ा 1730 का बलिदान?

May 14, 2026 - 11:34
खेजड़ी पेड़ों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया? आखिर क्यों याद आया 1730 का बलिदान

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने खेजड़ी पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी पेड़ को कानून के तहत पूर्व अनुमति के बिना नहीं काटा जाए। साथ ही इसकी जानकारी राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष समिति को भी दी जाए।

न्यायाधीश अरूण मोंगा और न्यायाधीश संदीप शाह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि तकनीकी विकास और बड़े प्रोजेक्ट्स के नाम पर प्रकृति को नुकसान पहुंचाना चिंता का विषय है और इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने याद दिलाया 1730 का खेजड़ली बलिदान

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 1730 में जोधपुर के खेजड़ली गांव में खेजड़ी पेड़ों की रक्षा के लिए हुए ऐतिहासिक बलिदान का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह तत्कालीन महाराजा ने उस समय पेड़ों की रक्षा के लिए कदम उठाए थे, शायद अब फिर वही समय आ गया है जब आज के शासकों को पर्यावरण संतुलन और पेड़ों की सुरक्षा के लिए कठोर निर्णय लेने चाहिए।

खेजड़ली बलिदान राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश के पर्यावरण इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है, जहां सैकड़ों बिश्नोई समाज के लोगों ने पेड़ों की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।

सोलर प्रोजेक्ट्स की आड़ में हरियाली खत्म होने का आरोप

यह जनहित याचिका श्रीजंभेश्वर पर्यावरण एवं जीव रक्षा प्रदेश संस्था की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विजय बिश्नोई ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार की सोलर पावर नीति की आड़ में बड़े स्तर पर खेजड़ी पेड़ों की कटाई की जा रही है।

याचिका में कहा गया कि जिन क्षेत्रों में सोलर प्रोजेक्ट लगाए जा रहे हैं, वहां अधिकांश भूमि बंजर है और खेजड़ी ऐसा दुर्लभ वृक्ष है जो रेगिस्तान की कठोर जलवायु में भी जीवित रह सकता है। ऐसे में इसकी कटाई पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

‘खेजड़ी केवल पेड़ नहीं, रेगिस्तान की जीवनरेखा’

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि खेजड़ी पारिस्थितिकीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण और दुर्लभ रेगिस्तानी वृक्ष है। इसकी संख्या पहले से ही सीमित है, इसके बावजूद इसे काटने की योजनाएं बनाई जा रही हैं। कोर्ट ने इसे “विडंबनापूर्ण स्थिति” बताया।

कोर्ट ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार द्वारा गठित समिति ऐसा समाधान निकालेगी जिससे एक भी पेड़ काटने की नौबत न आए और पर्यावरण को होने वाली अपूरणीय क्षति रोकी जा सके।

धार्मिक और भावनात्मक आस्था से जुड़ा है खेजड़ी

याचिका में यह भी कहा गया कि खेजड़ी का स्थानीय समुदायों, विशेष रूप से बिश्नोई समाज, की धार्मिक और भावनात्मक आस्था से गहरा संबंध है। यह केवल एक पेड़ नहीं बल्कि रेगिस्तानी संस्कृति और पर्यावरण संतुलन का प्रतीक माना जाता है।

हाईकोर्ट ने बताया कि राज्य सरकार पहले ही 9 मार्च को एक विशेष समिति का गठन कर चुकी है। इस समिति को पूरे मामले की जांच करने, सुरक्षा उपाय सुझाने और आवश्यकता पड़ने पर नए कानून का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।

पर्यावरण बनाम विकास पर फिर छिड़ी बहस

हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद राजस्थान में एक बार फिर विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोलर एनर्जी जैसे हरित ऊर्जा प्रोजेक्ट जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए हजारों पेड़ों की कटाई दीर्घकालिक पर्यावरणीय संकट पैदा कर सकती है।

Kashish Sain Bringing truth from the ground राजस्थान और देश-दुनिया की ताज़ा, सटीक और भरोसेमंद खबरें सरल और प्रभावी अंदाज़ में प्रस्तुत करना, ताकि हर पाठक तक सही जानकारी समय पर पहुँच सके।