राजस्थान में साल का पहला चंद्रग्रहण: आज लग रहा है पूर्ण चंद्रग्रहण, जयपुर में केवल 20-25 मिनट दिखेगा 'ब्लड मून' का नजारा

राजस्थान में 3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण/खंडग्रास चंद्रग्रहण लग रहा है, जो दोपहर 3:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा। सूतक सुबह 6:20-6:55 बजे से लागू हो गया, जिससे मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए और पूजा-पाठ रोका गया। जयपुर में चंद्रोदय शाम 6:22-6:33 बजे के आसपास होगा, इसलिए केवल अंतिम 15-25 मिनट का हिस्सा (ब्लड मून सहित) दिखेगा। गोविंददेवजी मंदिर में विशेष दर्शन व्यवस्था की गई है, लेकिन कुछ दर्शन रद्द हैं। ग्रहण के बाद शुद्धिकरण कर 4 मार्च को धुलंडी मनाई जाएगी। यह घटना धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण है।

Mar 3, 2026 - 09:10
Mar 3, 2026 - 09:10
राजस्थान में साल का पहला चंद्रग्रहण: आज लग रहा है पूर्ण चंद्रग्रहण, जयपुर में केवल 20-25 मिनट दिखेगा 'ब्लड मून' का नजारा

राजस्थान सहित पूरे भारत में 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को साल का पहला चंद्रग्रहण (Lunar Eclipse) लग रहा है। यह पूर्ण चंद्रग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है, जो होली के आसपास है। धार्मिक महत्व के कारण सुबह से ही सूतक काल शुरू होने पर मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं। कई जगहों पर 'ब्लड मून' (लाल चंद्रमा) का खूबसूरत नजारा दिखाई दे सकता है।

ग्रहण के मुख्य समय (भारतीय समयानुसार - IST)

ग्रहण की शुरुआत: दोपहर 3 बजकर 20-21 मिनट,पूर्ण ग्रहण (Totality) की शुरुआत: शाम लगभग 4 बजकर 34 मिनट,पूर्ण ग्रहण की समाप्ति: शाम लगभग 5 बजकर 33 मिनट,ग्रहण की समाप्ति: शाम 6 बजकर 46-48 मिनट, कुल अवधि: लगभग 3 घंटे 27 मिनट से 4 घंटे 26 मिनट (विभिन्न स्रोतों के अनुसार थोड़ा अंतर, लेकिन कुल मिलाकर 3-4 घंटे), भारत में ग्रहण दोपहर से शुरू होता है, लेकिन चंद्रमा उदय शाम को होने के कारण अधिकांश हिस्सों में केवल अंतिम चरण दिखाई देगा।

जयपुर और राजस्थान में दृश्यता

जयपुर में चंद्रोदय शाम लगभग 6 बजकर 22-28 मिनट पर होगा। ग्रहण की समाप्ति 6:46-6:47 बजे के आसपास है। इसलिए यहां केवल अंतिम 20-25 मिनट का हिस्सा दिखेगा, जिसमें चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया का अंतिम चरण और संभवतः लालिमा (ब्लड मून) नजर आएगी। मौसम साफ रहने पर यह नजारा खासा आकर्षक होगा। राजस्थान के अन्य हिस्सों में भी यही स्थिति है - केवल अंतिम चरण दृश्यमान।

सूतक काल और धार्मिक प्रभाव

सूतक काल: सुबह 6 बजकर 55 मिनट (कुछ स्रोतों में 6:20 या 9:20 बजे) से शुरू हो गया। यह ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लागू होता है।सूतक लगते ही अधिकांश मंदिरों में नियमित पूजा-पाठ रोक दिया गया। मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। सुबह की झांकियां और दर्शन के बाद ही बंदी हुई।परंपरा के अनुसार: सूतक और ग्रहण काल में पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श, खाना-पीना वर्जित माना जाता है।ग्रहण समाप्त होने के बाद शाम को शुद्धिकरण और स्नान किया जाएगा। इसके बाद 4 मार्च को रंगों की होली (धुलंडी) मनाई जाएगी।

गोविंददेवजी मंदिर (जयपुर) में विशेष व्यवस्था

ग्रहण के बावजूद गोविंददेवजी मंदिर में विशेष इंतजाम किए गए हैं: मंगला झांकी: सुबह 4:00 से 6:30 बजे तक, धूप दर्शन: 7:00 से 8:45 बजे तक,श्रृंगार: 9:30 से 10:15 बजे तक, राजभोग: 10:45 से 11:30 बजे तक, विशेष दर्शन (ग्रहण काल में): दोपहर 3:15 बजे से शाम 6:50 बजे तक, ग्वाल, संध्या और शयन दर्शन ग्रहण के कारण नहीं होंगे। श्रद्धालु निर्धारित समय में विशेष दर्शन कर सकेंगे।

चंद्रग्रहण क्या होता है? वैज्ञानिक व्याख्या

चंद्रग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं। पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता। पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा अंधकारमय या लाल दिखाई देता है (रेफ्रैक्शन के कारण 'ब्लड मून')।यह घटना केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव है, क्योंकि तभी चंद्रमा और सूर्य पृथ्वी के विपरीत दिशा में होते हैं। चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर 27 दिनों में चक्कर लगाता है, जबकि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर 365 दिनों में।

ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या नहीं?

न करें: खाना-पीना (विशेषकर अनाज), पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श, नई शुरुआत, यात्रा आदि।करें: ध्यान, जप, दान, शुद्धिकरण। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और पूजा।वैज्ञानिक दृष्टि से: ग्रहण देखने के लिए सुरक्षित तरीके अपनाएं, लेकिन चंद्रग्रहण में आंखों को नुकसान नहीं होता, इसलिए नंगी आंखों से देख सकते हैं।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.