राजस्थान में कांग्रेस का 'अरावली बचाओ' अभियान: बीजेपी पर चंदा लेकर खनन की अनुमति देने का आरोप
राजस्थान में कांग्रेस ने 'अरावली बचाओ' अभियान के तहत प्रदेशव्यापी पैदल मार्च और प्रदर्शन किए। सीकर, दौसा, अजमेर, अलवर, पाली सहित कई जिलों में कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। कांग्रेस ने बीजेपी पर वेदांता, जेके सीमेंट और वंडर सीमेंट को चंदा लेकर अरावली की पहाड़ियां खनन के लिए देने का गंभीर आरोप लगाया। नेताओं ने नारा दिया - "चंदा दो, धंधा लो" और "अरावली की दलाली बंद करो"।
राजस्थान में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद अब सड़कों पर उतर आया है। कांग्रेस पार्टी ने 'अरावली बचाओ' अभियान के तहत प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किया है, जिसमें बीजेपी सरकार पर अरावली की पहाड़ियों को खनन कंपनियों को सौंपने का गंभीर आरोप लगाया जा रहा है। यह अभियान 27 दिसंबर 2025 को विशेष रूप से जोर पकड़ रहा है, जब प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर पैदल मार्च और रैलियां निकाली जा रही हैं।
प्रदर्शनों की झलक: कई जिलों में सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता 'अरावली बचाओ' अभियान के तहत शनिवार (27 दिसंबर) को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर पैदल मार्च निकाले। सीकर, दौसा, अजमेर, अलवर, पाली सहित कई जिलों में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकजुटता दिखाई। बड़ी संख्या में बैनर-पोस्टर लेकर सड़कों पर उतरे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए और केंद्र व राज्य की बीजेपी सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया।सीकर: अंबेडकर पार्क से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला गया। यहां निवर्तमान सभापति जीवण खां और जिला अध्यक्ष सुनीता गिठाला ने मुख्य भूमिका निभाई।दौसा: नेहरू गार्डन से गांधी तिराहे तक मार्च।अजमेर: ज्योतिबा फुले सर्किल से मदार गेट तक।पाली: कांग्रेस भवन से कलेक्ट्रेट तक।अलवर: दोपहर 2 बजे कटी घाटी से मिनी सचिवालय तक मार्च।इन प्रदर्शनों में कार्यकर्ताओं ने अरावली को राजस्थान की 'जीवन रेखा' बताते हुए इसे बचाने की मांग की। अरावली पर्वतमाला रेगिस्तान के विस्तार को रोकती है, धूल भरी आंधियों से बचाव करती है और जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कांग्रेस के आरोप: 'चंदा दो, धंधा लो' की नीति कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला। सीकर में जिला अध्यक्ष सुनीता गिठाला ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने वेदांता ग्रुप से चंदा लेकर उन्हें अरावली की पहाड़ियां सौंप दीं। इसी तरह जेके सीमेंट और वंडर सीमेंट को भी पहाड़ियां दे दी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी का नियम है - 'चंदा दो, धंधा लो'। जो कंपनी चंदा देती है, उसके लिए सरकार मेहरबान हो जाती है।निवर्तमान सभापति जीवण खां ने कहा, "अरावली की दलाली बंद करो।" कांग्रेस का दावा है कि केंद्र सरकार की नई परिभाषा (100 मीटर ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली मानना) से 90% से अधिक अरावली क्षेत्र खनन के लिए खुल जाएगा, जो पर्यावरण के लिए घातक है।
पृष्ठभूमि: अरावली विवाद का कारण यह अभियान सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से जुड़ा है, जिसमें अरावली की परिभाषा को एकसमान करने के लिए 100 मीटर ऊंचाई का मानक अपनाया गया। कांग्रेस और पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे छोटी पहाड़ियां संरक्षण से बाहर हो जाएंगी और खनन माफिया को फायदा पहुंचेगा। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट जैसे नेता इस मुद्दे पर सक्रिय हैं। जयपुर में NSUI ने भी पैदल मार्च निकाला, जिसमें पायलट अपने बेटे के साथ शामिल हुए।हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि अरावली में नए खनन पट्टे नहीं दिए जाएंगे और केवल 0.19% क्षेत्र ही खनन के लिए योग्य है। अवैध खनन पर सख्ती का दावा भी किया गया है।
आगे की योजना कांग्रेस ने ऐलान किया है कि यह अभियान जारी रहेगा। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर सभी जिलों में जन जागरण और प्रदर्शन होंगे। साथ ही मनरेगा में बदलाव के खिलाफ भी विरोध किया जा रहा है।अरावली बचाओ अभियान अब सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का बड़ा जन आंदोलन बनता दिख रहा है। राजस्थान की जीवन रेखा को बचाने की यह लड़ाई आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।