राजस्थान में बाड़मेर-बालोतरा जिलों की सीमाओं में फेरबदल: पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी के धरने से गर्माई सियासत

राजस्थान सरकार ने 31 दिसंबर 2025 को बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में फेरबदल किया, जिसमें गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को बालोतरा में तथा बायतु को बाड़मेर में शामिल किया गया। इस फैसले से जनता की सुविधाओं पर असर पड़ने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी धोरीमन्ना में धरने पर बैठे हैं। कांग्रेस इसे जनविरोधी और राजनीतिक स्वार्थ वाला बता रही है, जबकि भाजपा कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं। अशोक गहलोत ने इसे तुगलकी फरमान कहा है। यह मुद्दा सियासी घमासान का रूप ले चुका है।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
January 5, 2026 • 11:36 AM  1.7k
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राजस्थान में बाड़मेर-बालोतरा जिलों की सीमाओं में फेरबदल: पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी के धरने से गर्माई सियासत
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5 Jan 2026
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राजस्थान में बाड़मेर-बालोतरा जिलों की सीमाओं में फेरबदल: पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी के धरने से गर्माई सियासत

राजस्थान सरकार ने 31 दिसंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला लेते हुए बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया। इस अधिसूचना के तहत बाड़मेर जिले से गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंडों को बालोतरा जिले में शामिल कर दिया गया, जबकि बालोतरा से बायतु उपखंड को वापस बाड़मेर में जोड़ा गया। यह बदलाव 2 जनवरी 2026 की रात को सार्वजनिक हुआ, जिसके बाद क्षेत्र में तीव्र विरोध शुरू हो गया।

नए पुनर्गठन की

मुख्य बातें बालोतरा जिला अब: बालोतरा, सिणधरी, सिवाना, धोरीमन्ना और गुड़ामालानी (कुल 5 उपखंड, 9 तहसीलें)।बाड़मेर जिला अब: बाड़मेर, गडरा रोड, चौहटन, रामसर, बायतु, सेडवा और शिव (कुल 7 उपखंड, 11 तहसीलें)।प्रभाव: गुड़ामालानी विधानसभा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा बालोतरा में चला गया, जबकि बायतु पूरी तरह बाड़मेर में। इससे लगभग 2.5 लाख मतदाताओं के राजनीतिक समीकरण प्रभावित होने की चर्चा है।यह बदलाव जनगणना 2027 से पहले प्रशासनिक सीमाओं को फ्रीज करने की समय सीमा (31 दिसंबर 2025) के ठीक पहले किया गया, जिसे विपक्ष ने "मध्यरात्रि का फैसला" करार दिया है।

पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी का अनिश्चितकालीन धरना कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गुड़ामालानी से छह बार के पूर्व विधायक हेमाराम चौधरी (उम्र करीब 75-76 वर्ष) ने इस फैसले के विरोध में धोरीमन्ना मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। वे रविवार रात को धरना स्थल पर ही कड़ाके की ठंड में कंबल ओढ़कर सोए। कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग उनके साथ मौजूद रहे।

हेमाराम चौधरी ने कहा:यह फैसला जमीनी हकीकत, भौगोलिक स्थिति और जनता की सुविधा के पूरी तरह खिलाफ है।धोरीमन्ना और गुड़ामालानी को बालोतरा में शामिल करने से लोगों को जिला मुख्यालय जाने में दूरी बढ़ जाएगी, जिससे समय, पैसा और मेहनत बर्बाद होगी।उदाहरण के तौर पर मांगता गांव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब तहसील और उपखंड स्तर के कामों के लिए लोगों को अलग-अलग दिशाओं में लंबी यात्रा करनी पड़ेगी।यह जनता की सुविधा, सुरक्षा और न्याय से जुड़ा मुद्दा है, राजनीति का नहीं। सरकार से तुरंत पुनर्विचार की मांग की।चौधरी ने सोशल मीडिया पर भी अपनी पीड़ा जाहिर की और कहा कि हर वर्ग में इस फैसले से गहरा आक्रोश है। वे जनता की इस "न्यायपूर्ण लड़ाई" में पूरी मजबूती से साथ खड़े हैं।

कांग्रेस का तीव्र विरोध पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे "तुगलकी फरमान" बताया और कहा कि प्रशासनिक दृष्टि से यह पूरी तरह अतार्किक है। गुड़ामालानी क्षेत्र के लोगों के लिए जिला मुख्यालय की दूरी बढ़ गई, जो आमजन के साथ अन्याय है।बायतु से कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने शायराना अंदाज में विरोध जताया: "तहसीलों को तोड़ा राजनीतिक मकसद से, न डरूंगा, न झुकूंगा, अपने लोगों के साथ खड़ा हूं।"अन्य कांग्रेस नेताओं ने इसे जनविरोधी और राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित बताया।

भाजपा की खुशी और जश्न दूसरी तरफ, भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस फैसले पर खुशी जाहिर की। धोरीमन्ना और अन्य क्षेत्रों में वाहन रैलियां निकाली गईं, पटाखे फोड़े गए और जश्न मनाया गया। भाजपा इसे प्रशासनिक सुधार मान रही है।

पृष्ठभूमि और राजनीतिक निहितार्थ बालोतरा जिला 2023 में कांग्रेस सरकार के समय बाड़मेर से अलग कर बनाया गया था। अब भाजपा सरकार ने सीमाओं में फेरबदल कर राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। विश्लेषकों के अनुसार, यह आगामी विधानसभा परिसीमन और स्थानीय चुनावों को प्रभावित कर सकता है। गुड़ामालानी में भाजपा मंत्री केके विश्नोई का प्रभाव क्षेत्र है, जबकि बायतु कांग्रेस के हरीश चौधरी का गढ़।

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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