पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी की भाजपा संगठन में वापसी: राजस्थान किसान मोर्चा की कमान फिर सौंपी गई

राजस्थान भाजपा ने पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी को दूसरी बार किसान मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। 2024 लोकसभा चुनाव में बाड़मेर सीट हारने के बावजूद पार्टी ने उन पर भरोसा कायम रखा। यह नियुक्ति संगठन को मजबूत करने और किसान वर्ग में पहुंच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। अन्य मोर्चों में भी नए अध्यक्षों की घोषणा की गई।

Dec 30, 2025 - 12:42
पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी की भाजपा संगठन में वापसी: राजस्थान किसान मोर्चा की कमान फिर सौंपी गई

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राजस्थान में अपने विभिन्न मोर्चों की संगठनात्मक संरचना को मजबूत करने के उद्देश्य से बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने सोमवार (29 दिसंबर 2025) को छह प्रमुख मोर्चों के प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा की, जिसमें पूर्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी को राजस्थान भाजपा किसान मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह कैलाश चौधरी के लिए इस पद की दूसरी पारी है। इससे पहले वे 2013 से 2017 तक इसी मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं।राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के नेतृत्व में की गई इन नियुक्तियों से पार्टी का फोकस विभिन्न वर्गों, विशेषकर किसान समुदाय, तक अपनी पहुंच मजबूत करने पर है। लोकसभा चुनाव 2024 में हार के बावजूद कैलाश चौधरी पर पार्टी का भरोसा कायम रहना यह दर्शाता है कि भाजपा अपने अनुभवी नेताओं को संगठन में सक्रिय भूमिका देकर जमीनी स्तर पर मजबूती लाना चाहती है।

अन्य मोर्चों की नियुक्तियां भाजपा ने एक साथ छह मोर्चों के अध्यक्षों की घोषणा की है:युवा मोर्चा: शंकर लाल गौरा,अनुसूचित जाति (एससी) मोर्चा: पूर्व सांसद निहालचंद मेघवाल,अनुसूचित जनजाति (एसटी) मोर्चा: गोपीचंद मीणा,ओबीसी मोर्चा: महेंद्र कुमावत,किसान मोर्चा: कैलाश चौधरी,अल्पसंख्यक मोर्चा: हामिद खान मेवाती।ये नियुक्तियां पार्टी की संगठनात्मक मजबूती और विभिन्न सामाजिक वर्गों में पैठ बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं। आने वाले समय में स्थानीय निकाय चुनावों या अन्य राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए इन मोर्चों की सक्रियता महत्वपूर्ण होगी।

कैलाश चौधरी का राजनीतिक सफर कैलाश चौधरी राजस्थान के बाड़मेर जिले से ताल्लुक रखते हैं और लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए हैं। उनका राजनीतिक करियर संघर्षपूर्ण रहा है:वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे और छात्र राजनीति से सक्रिय हुए।2013 में बायतु विधानसभा सीट से विधायक बने।2018 में इसी सीट से चुनाव हार गए।2019 लोकसभा चुनाव में बाड़मेर-जैसलमेर सीट से बड़ी जीत हासिल की और मोदी सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री बने।2024 लोकसभा चुनाव में फिर बाड़मेर से मैदान में उतरे, लेकिन त्रिकोणीय मुकाबले (कांग्रेस के उम्मेदाराम बेनीवाल और निर्दलीय रविंद्र सिंह भाटी) में तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस उम्मीदवार विजयी हुए।चुनावी हार के बावजूद पार्टी ने चौधरी पर भरोसा जताया है। किसान मोर्चा की जिम्मेदारी सौंपकर भाजपा ने किसान वोट बैंक को साधने की कोशिश की है, खासकर पश्चिमी राजस्थान में जहां चौधरी की अच्छी पकड़ मानी जाती है।

नियुक्ति का राजनीतिक महत्व यह नियुक्ति भाजपा की उस रणनीति को दर्शाती है जिसमें चुनावी हार के बाद भी अनुभवी नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका देकर सक्रिय रखा जाता है। कैलाश चौधरी का किसान मोर्चा से पुराना जुड़ाव और केंद्रीय मंत्री रहते हुए कृषि क्षेत्र में अनुभव उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन मोर्चों के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार की किसान कल्याण योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य है।राजस्थान में भाजपा की भजनलाल शर्मा सरकार को दो वर्ष पूरे होने वाले हैं, ऐसे में संगठनात्मक स्तर पर ये बदलाव सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और विपक्ष के हमलों का जवाब देने में मदद करेंगे।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.