राजस्थान में एसिड अटैक पीड़ितों को प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त इलाज की नई गाइडलाइन: विस्तृत जानकारी
राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने नई गाइडलाइन जारी की है, जिसमें एसिड अटैक पीड़ितों को सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में पूरा मुफ्त इलाज अनिवार्य किया गया है। इसमें प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी भी शामिल है। इलाज से मना करने पर प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ CrPC के तहत आपराधिक कार्रवाई होगी। यह गाइडलाइन सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों (दिसंबर 2025) पर आधारित है, जो एसिड सर्वाइवर्स साहस फाउंडेशन की PIL से निकले हैं।
राजस्थान में एसिड अटैक पीड़ितों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत अब न केवल सरकारी अस्पतालों में, बल्कि निजी (प्राइवेट) अस्पतालों में भी एसिड अटैक पीड़ितों का पूरा इलाज मुफ्त में किया जाएगा। इसमें जरूरत पड़ने पर प्लास्टिक सर्जरी और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की फीस भी नहीं ली जाएगी। यदि कोई प्राइवेट अस्पताल इलाज करने से मना करता है, तो उसके खिलाफ क्रिमिनल प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह गाइडलाइन विभाग की प्रमुख शासन सचिव द्वारा जारी की गई है और यह सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों पर आधारित है। सर्कुलर में स्पष्ट रूप से सुप्रीम कोर्ट के दो महत्वपूर्ण आदेशों का हवाला दिया गया है, जिनमें एसिड अटैक पीड़ितों को तत्काल और मुफ्त चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के निर्देश हैं। विशेष रूप से, एसिड सर्वाइवर्स साहस फाउंडेशन (Acid Survivors Saahas Foundation) और केंद्र सरकार के बीच चल रहे मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में एक अहम फैसला दिया, जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रधान स्वास्थ्य सचिवों को निर्देश दिया गया कि वे निजी अस्पतालों की अनुपालन सुनिश्चित करें। कोर्ट ने कहा कि निजी अस्पतालों द्वारा इलाज से इनकार करना अदालती आदेशों की अवमानना माना जाएगा और इसके लिए आपराधिक दायित्व लगाया जा सकता है।
क्यों जरूरी है यह गाइडलाइन? एसिड अटैक एक बेहद क्रूर अपराध है, जो ज्यादातर युवा महिलाओं को निशाना बनाता है। इससे पीड़ितों को शारीरिक विकृति, मानसिक आघात और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। इलाज में कई सर्जरी, दवाइयां, भोजन और लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है, जो बहुत महंगा होता है। पहले कई मामलों में निजी अस्पताल पीड़ितों को भर्ती करने से मना कर देते थे या पहले पेमेंट की मांग करते थे, जिससे पीड़ितों की हालत बिगड़ जाती थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी (2015 से) निर्देश दिए थे कि निजी अस्पतालों को मुफ्त इलाज प्रदान करना अनिवार्य है, लेकिन कई जगहों पर इसका पालन नहीं हो रहा था। अब राजस्थान सरकार ने इस पर सख्ती से अमल करने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है।
मुख्य बिंदु गाइडलाइन के: मुफ्त इलाज का दायरा: पूरा इलाज मुफ्त, जिसमें इमरजेंसी केयर, दवाइयां, भोजन, बेड चार्ज और प्लास्टिक/रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी शामिल।सरकारी और निजी दोनों अस्पताल: सभी अस्पतालों पर लागू।इनकार पर सजा: CrPC के तहत आपराधिक कार्रवाई, जिसमें अस्पताल प्रशासन के खिलाफ केस दर्ज हो सकता है।सुप्रीम कोर्ट का आधार: हालिया आदेश में कोर्ट ने मुआवजे में देरी और निजी अस्पतालों की लापरवाही पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे फंड्स का त्वरित हस्तांतरण सुनिश्चित करें और निजी अस्पतालों का अनुपालन करवाएं।
व्यापक संदर्भ में स्थिति सुप्रीम कोर्ट लंबे समय से इस मुद्दे पर सक्रिय है। 2006 में लक्ष्मी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस से शुरू हुई इस लड़ाई में कोर्ट ने एसिड की बिक्री पर प्रतिबंध, न्यूनतम 3 लाख रुपये मुआवजा (जिसमें 1 लाख तुरंत) और मुफ्त इलाज के निर्देश दिए थे। लेकिन कई राज्यों में अभी भी देरी और अनुपालन की कमी है। एसिड सर्वाइवर्स साहस फाउंडेशन जैसी संस्थाएं लगातार PIL दाखिल कर रही हैं, ताकि पीड़ितों को न्याय मिले। राजस्थान की यह गाइडलाइन इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकती है।