ब्रेकिंग अलर्ट: राजस्थान की सड़कों पर आज रात 12 बजे से 8000 स्लीपर बसें होंगी बंद लाखों यात्री फंसेंगे अंधेरे में.....
राजस्थान में RTO की सख्त कार्रवाई से नाराज ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट बस ओनर एसोसिएशन ने आज रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। इसके तहत पूरे प्रदेश में 8000 स्लीपर बसें ठप हो जाएंगी। जोधपुर समेत कई शहरों में प्राइवेट ट्रेवल्स ने ऑनलाइन बुकिंग बंद कर दी है। लाखों यात्री प्रभावित होंगे, किराया बढ़ेगा और RSRTC की बसें अपर्याप्त साबित होंगी। एसोसिएशन ने जुर्माने में छूट, परमिट नियमों में ढील आदि मांगें रखी हैं।
जयपुर/जोधपुर, 30 अक्टूबर 2025: कल्पना कीजिए, आप दीवाली की चमक-दमक के बीच घर लौटने की तैयारी कर रहे हैं, टिकट बुक हो चुकी है, लेकिन अचानक खबर आती है कि आपकी बस कहीं गायब! जी हां, यह कोई फिल्मी ड्रामा नहीं, बल्कि राजस्थान के निजी बस संचालकों का धमाकेदार विरोध है। ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट बस ओनर एसोसिएशन ने परिवहन विभाग (RTO) की सख्त कार्रवाइयों के खिलाफ अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। नतीजा? पूरे प्रदेश में करीब 8000 स्लीपर बसें आज रात 12 बजे से सड़कों पर नहीं उतरेंगी। लाखों यात्री, खासकर लंबी दूरी के रूट्स पर चलने वाले प्रवासी मजदूर, छात्र और परिवार फंस सकते हैं। यह हड़ताल न सिर्फ यात्रियों की मुश्किलें बढ़ाएगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी झटका देगी – रोजाना करोड़ों का नुकसान तय!
हड़ताल का बैकग्राउंड: RTO की 'क्रूर' कार्रवाई ने उकसाया बवाल
यह सब कुछ हफ्ते भर पहले जैसलमेर में हुई एक भयानक बस दुर्घटना से शुरू हुआ। 14 अक्टूबर को एक प्राइवेट स्लीपर बस में आग लगने से कई यात्रियों को जान गंवानी पड़ी, जिसके बाद RTO ने पूरे राज्य में निजी बसों पर 'ऑपरेशन क्लीन-अप' चला दिया। भारी जुर्माने, अवैध संशोधनों पर चेकिंग, परमिट की सख्ती और ओवरलोडिंग पर तुरंत एक्शन – ये कार्रवाइयां बस मालिकों को 'चिढ़' गईं। एसोसिएशन के मुताबिक, RTO की ये 'एकतरफा' कार्रवाइयां बिना किसी पूर्व चेतावनी के हो रही हैं, जिससे छोटे-मोटे ऑपरेटर दिवालिया होने की कगार पर हैं।एसोसिएशन के सचिव राजेंद्र परिहार ने गुरुवार को एक आधिकारिक आदेश जारी कर हड़ताल की घोषणा की। परिहार ने कहा, "RTO की लगातार छापेमारी से हमारा कारोबार चरमरा गया है। भारी जुर्माने और वाहनों की जब्ती हमें मजबूर कर रही है। हम यात्रियों से क्षमायाचना करते हैं, लेकिन सरकार को जगाना जरूरी है।" दूसरी ओर, अलवर स्थित ऑल इंडिया टूर एंड ट्रेवल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष इशाक खान ने भी समर्थन की घोषणा की, जिसमें सीटिंग और स्लीपर बसें दोनों शामिल हैं।
प्रभाव: कौन-कौन फसेगा इस 'बस ब्लैकआउट' में?
यात्रियों पर कहर: जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर जैसे प्रमुख शहरों से दिल्ली, मुंबई, गुजरात, हरियाणा और मध्य प्रदेश जाने वाले रूट्स सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। अनुमान है कि रोजाना 3 लाख से ज्यादा यात्री प्रभावित होंगे। जोधपुर समेत कई शहरों में प्राइवेट ट्रेवल एजेंसियों ने पहले ही ऑनलाइन बुकिंग बंद कर दी है – redBus, MakeMyTrip जैसी साइट्स पर स्लीपर बसों की उपलब्धता शून्य हो चुकी है।
आर्थिक झटका: हड़ताल से निजी बस उद्योग को रोजाना 2-3 करोड़ का नुकसान हो सकता है। राज्य सरकार को भी राजस्व में कमी का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि ये बसें टैक्स और टोल का बड़ा स्रोत हैं।
वैकल्पिक व्यवस्था? राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) ने अतिरिक्त बसें उतारने का ऐलान किया है, लेकिन 5000 बसों वाली RSRTC की फ्लीट 8000 स्लीपर बसों की भरपाई कैसे करेगी? विशेषज्ञों का कहना है कि किराए में 50-100% उछाल आ सकता है, और प्राइवेट कैब्स व ट्रेनों पर दबाव बढ़ेगा।
एसोसिएशन की मांगें: क्या सरकार सुनेगी?
एसोसिएशन ने साफ शब्दों में पांच प्रमुख मांगें रखी हैं:
RTO कार्रवाइयों में पारदर्शिता – जुर्माने से पहले सुनवाई का मौका।
भारी जुर्मानों पर छूट और पुराने बकायों की माफी।
बस परमिट नियमों में ढील, खासकर पर्यटक रूट्स पर।
दुर्घटना बीमा और सुरक्षा उपकरणों पर सब्सिडी।
किराया बढ़ोतरी की अनुमति, क्योंकि ईंधन और रखरखाव लागत आसमान छू रही है।
परिहार ने चेतावनी दी, "अगर सरकार ने 48 घंटे में बातचीत नहीं शुरू की, तो हड़ताल और तेज होगी।" जयपुर में आज शाम एक आपात बैठक बुलाई गई है, जहां परिवहन मंत्री प्रेम चंद बैरवा से बातचीत की उम्मीद है।
यात्रियों के लिए सलाह: अभी से अलर्ट हो जाइए!
तुरंत चेक करें: RSRTC की वेबसाइट या ऐप पर वैकल्पिक बसें बुक करें। हेल्पलाइन नंबर: 1800-2000-103।
ट्रेन/फ्लाइट: IRCTC पर तुरंत शिफ्ट करें, लेकिन सीटें तेजी से भर रही हैं।
सुरक्षा पहले: अगर प्राइवेट बस ही लें, तो परमिट और फिटनेस चेक करें।
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यह हड़ताल राजस्थान की सड़क परिवहन व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। RTO की सख्ती तो जरूरी है, लेकिन क्या यह यात्रियों की जान जोखिम में डाल देगी? सरकार का अगला कदम क्या होगा – बातचीत या और सख्ती? आने वाले दिनों में यह विवाद और गरमाएगा।