दहेज नहीं, बेटी चाहिए: श्रीगंगानगर में वर पक्ष ने लौटाया 1 करोड़ 1 लाख 51 हजार का दहेज, सिर्फ एक रुपया और नारियल लेकर दिया सामाजिक संदेश

श्रीगंगानगर के रायसिंहनगर में वर पक्ष ने दुल्हन पक्ष से मिले 1 करोड़ 1 लाख 51 हजार रुपये के दहेज को पूरी तरह लौटा दिया और सिर्फ एक रुपया व नारियल लेकर भावुक संदेश दिया - "हमें दहेज नहीं, बेटी चाहिए।" यह घटना समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ मजबूत मिसाल बन गई है।

Feb 7, 2026 - 15:17
दहेज नहीं, बेटी चाहिए: श्रीगंगानगर में वर पक्ष ने लौटाया 1 करोड़ 1 लाख 51 हजार का दहेज, सिर्फ एक रुपया और नारियल लेकर दिया सामाजिक संदेश

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में एक ऐसी शादी हुई है, जिसने समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत और प्रेरणादायक संदेश दिया है। जहां एक ओर दहेज के नाम पर बेटियों और बहुओं को प्रताड़ित करने की घटनाएं आम हो गई हैं, वहीं यहां वर पक्ष ने न केवल दहेज लेने से इनकार किया, बल्कि दुल्हन पक्ष से मिले करोड़ों रुपये के उपहार और नकदी को पूरी तरह लौटा दिया। इस घटना ने मौजूद सभी लोगों की आंखें नम कर दीं और अब यह खबर सोशल मीडिया से लेकर समाचारों में व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई है।

घटना का विवरण

श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर क्षेत्र में स्थित गांव 3 एनपी के निवासी प्रमोद थालोड़ की पुत्री मानसी का विवाह शुक्रवार को गांव 63 एलएनपी निवासी वीपी सिंह के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। यह विवाह दोनों परिवारों की सहमति से एक अरेंज मैरिज के रूप में हुआ था।

शादी समारोह के दौरान वधू पक्ष (दुल्हन पक्ष) ने परंपरा के अनुसार दहेज के रूप में 1 करोड़ 1 लाख 51 हजार रुपये मूल्य की अचल संपत्ति, नकद राशि और कीमती सामान प्रस्तुत किया। यह राशि और सामान काफी मूल्यवान था, जो लगभग डेढ़ करोड़ के आसपास आंका जा सकता है।

लेकिन यहां हुआ कुछ ऐसा, जो कम ही देखने को मिलता है। दूल्हे के पिता सुभाष चन्द्र गोदारा ने पूरे सम्मान के साथ यह सारा दहेज लौटा दिया। उन्होंने भावुक होकर कहा, "हमें दहेज नहीं, बेटी चाहिए।" उन्होंने उस राशि को पल भर के लिए भी अपने हाथ में नहीं रखा और पूरी संपत्ति, नकदी तथा कीमती सामान वधू पक्ष को वापस कर दिया। सिर्फ परंपरा निभाने के लिए उन्होंने एक रुपया और नारियल शगुन के रूप में स्वीकार किया।इस दृश्य को देखकर दोनों परिवारों के सदस्यों के साथ-साथ मौजूद रिश्तेदार और ग्रामीण भावुक हो उठे। कई लोगों की आंखें नम हो गईं और इस घटना की तारीफ हर तरफ होने लगी।

दूल्हा-दुल्हन की पृष्ठभूमि

दूल्हा वीपी सिंह एक प्रोफेशनल अकाउंटिंग में एमबीए डिग्रीधारी हैं। वे एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं और पढ़ाई के साथ-साथ अपनी खेती-बाड़ी खुद संभालते हैं। वे मेहनत को ही जीवन का आधार मानते हैं।दुल्हन मानसी कृषि विज्ञान में एमएससी तक शिक्षित हैं। वे संस्कारों और आधुनिक शिक्षा के सुंदर संतुलन का उदाहरण हैं।दुल्हन के पिता एक निजी बैंक में अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। परिवार की जड़ें आज भी गांव से जुड़ी हुई हैं, जहां दादा देवीलाल थालौड़ खेत में बनी ढाणी में रहकर खेती-बाड़ी संभालते हैं।

सामाजिक संदेश और प्रेरणा

यह घटना दहेज प्रथा के खिलाफ एक बड़ी मिसाल पेश करती है। सुभाष चन्द्र गोदारा का यह कदम न केवल उनके परिवार की सोच को दर्शाता है, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश देता है कि बेटी का सम्मान और उसकी खुशी से बड़ा कोई दहेज नहीं होता। ऐसे कदम समाज में दहेज जैसी कुरीति को जड़ से खत्म करने में मदद कर सकते हैं।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.