राजस्थान के बानसूर में बाप-बेटे ने दिखाई अनोखी मिसाल: दहेज के 31 लाख रुपये लौटाए, कहा - "बेटी से बड़ा कोई धन नहीं"

राजस्थान के बानसूर (बिलाली गांव) में 10 फरवरी को वीरेंद्र शेखावत की शादी में दूल्हे के पिता जालिम सिंह ने दुल्हन विशाखा के पिता द्वारा दिए गए 31 लाख रुपये दहेज को पूरी तरह ठुकरा दिया और वापस लौटा दिया। उन्होंने कहा कि "बेटी ही सबसे बड़ा दहेज है, कोई धन इससे कीमती नहीं"। यह घटना दहेज प्रथा के खिलाफ मजबूत संदेश दे रही है और इलाके में प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। दूल्हा एयरफोर्स में तैनात है और परिवार साधारण पृष्ठभूमि से है।

Feb 12, 2026 - 15:35
राजस्थान के बानसूर में बाप-बेटे ने दिखाई अनोखी मिसाल: दहेज के 31 लाख रुपये लौटाए, कहा - "बेटी से बड़ा कोई धन नहीं"

कोटपूतली-बहरोड़ जिले के बानसूर क्षेत्र के बिलाली गांव में एक ऐसी शादी हुई, जिसने न केवल इलाके में सुर्खियां बटोरीं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी दिया। यहां दूल्हे और उसके पिता ने दहेज के रूप में दी गई 31 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि को पूरी तरह ठुकरा दिया और उसे वापस लौटा दिया। इस घटना ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत आवाज उठाई है और आसपास के गांवों में इसकी खूब चर्चा हो रही है।

घटना का पूरा विवरण

10 फरवरी को बिलाली गांव के रहने वाले जालिम सिंह ने अपने बेटे वीरेंद्र शेखावत की शादी के लिए बारात नागौर जिले के लुणसरा गांव ले जाई थी। दुल्हन विशाखा राठौड़ के पिता करणी सिंह राठौड़ ने विवाह समारोह के दौरान परंपरा के अनुसार दहेज के तौर पर 31 लाख रुपये देने की पेशकश की।

लेकिन दूल्हे वीरेंद्र और उनके पिता जालिम सिंह ने इस राशि को लेने से साफ इनकार कर दिया। जालिम सिंह ने भावुक होकर कहा, "आपने अपनी बेटी हमें सौंप दी है, यही हमारे लिए सबसे बड़ा और कीमती दहेज है। बेटी किसी भी धन-दौलत से कहीं अधिक मूल्यवान होती है।" उन्होंने दहेज की पूरी रकम दुल्हन के पिता को वापस लौटा दी।इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें जालिम सिंह (पीली पगड़ी में) दुल्हन के पिता को रकम लेने से मना करते दिख रहे हैं। यह वीडियो अब सोशल मीडिया और इलाके में तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे लोगों में दहेज विरोधी भावना और मजबूत हुई है।

परिवार की पृष्ठभूमि

जालिम सिंह (दूल्हे के पिता): एक साधारण रेस्टोरेंट चलाते हैं। वे परिवार के मुखिया हैं और सामाजिक मूल्यों को बहुत महत्व देते हैं।वीरेंद्र शेखावत (दूल्हा): भारतीय वायुसेना (एयरफोर्स) में तैनात हैं। वे देश सेवा में लगे हुए हैं और परिवार में जिम्मेदार सदस्य हैं।परिवार में वीरेंद्र के अलावा दो छोटे भाई-बहन भी हैं, जो फिलहाल पढ़ाई कर रहे हैं।यह परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं होने के बावजूद दहेज जैसी सामाजिक बुराई से पूरी तरह दूर रहा और एक बड़ा उदाहरण पेश किया।

समाज पर प्रभाव

इस घटना की चर्चा अब बानसूर के साथ-साथ कोटपूतली, बहरोड़ और आसपास के कई गांवों में हो रही है। लोग इसे एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं। दहेज प्रथा, जो आज भी कई परिवारों को परेशान करती है, के खिलाफ ऐसे कदम समाज में जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।जालिम सिंह और वीरेंद्र का यह फैसला न केवल उनकी बेटी/बहू के सम्मान को दर्शाता है, बल्कि पूरे समाज को संदेश देता है कि बेटी का आना ही सबसे बड़ा सौभाग्य है, न कि कोई नकदी या संपत्ति।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.