सीमावर्ती राजस्थान में ‘धीमा जहर’ बना पेयजल: शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी का विधानसभा में तीखा प्रहार, RO प्लांट बंद होने और बजट पर भी उठाए गंभीर सवाल
राजस्थान विधानसभा में शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा के सीमावर्ती गांवों में पेयजल की गंभीर समस्या को उठाया। कई जगहों पर TDS 7000 ppm से अधिक और फ्लोराइड 10 mg/l तक पहुंच गया है, जो स्वास्थ्य के लिए 'धीमा जहर' साबित हो रहा है। इससे नवजात शिशुओं में विकलांगता, फ्लोरोसिस, हड्डी विकृति जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। क्षेत्र में 55 RO प्लांट में से 30 बंद हैं। विधायक ने सरकार की लापरवाही पर सवाल उठाए, बजट को 'फैंसी' बताया और मुख्यमंत्री से जनता के बीच जाकर स्थिति देखने की अपील की। साथ ही संविदा कर्मियों के शोषण और भूमि आवंटन पर भी चिंता जताई।
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में हाल ही में विशेष उल्लेख प्रस्ताव के दौरान वातावरण अचानक गंभीर हो उठा, जब शिव (बाड़मेर) के स्वतंत्र विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में पेयजल की भयावह स्थिति को सदन के सामने रखा। उन्होंने बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा जिलों के कई गांवों में पानी की गुणवत्ता को "धीमा जहर" करार देते हुए सरकार की लापरवाही पर जमकर निशाना साधा। भाटी ने तथ्यों और आंकड़ों के साथ स्थिति की गहराई को उजागर किया, जिससे सदन में सन्नाटा छा गया और यह मुद्दा मानवीय संकट के रूप में उभरा।
पानी में TDS और फ्लोराइड की खतरनाक मात्रा
विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सदन को बताया कि सीमावर्ती गांवों में पेयजल की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। कई स्थानों पर पानी में TDS (Total Dissolved Solids) का स्तर 7000 ppm से भी अधिक पाया जा रहा है, जबकि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार स्वीकार्य सीमा मात्र 500 ppm तक है (आदर्श रूप से 50-150 ppm के बीच)। इससे कई गुना अधिक TDS वाले पानी को पीने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
इसी तरह, पानी में फ्लोराइड की मात्रा 10 mg/l तक पहुंच गई है, जबकि BIS की अनुमन्य सीमा 1.5 mg/l और आदर्श सीमा 1 mg/l है। भाटी ने इसे "धीमा जहर" बताते हुए कहा कि वर्षों से मजबूरी में ऐसा पानी पीने वाले लोग धीरे-धीरे स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। इससे शरीर के अंदरूनी अंग प्रभावित हो रहे हैं और बीमारियां फैल रही हैं।
नवजात शिशुओं और बच्चों पर गहरा असर, बढ़ रही विकलांगता
भाटी ने शिव विधानसभा क्षेत्र के गांवों जैसे पादरिया, रामसर, छोटी खड़ीन, हुक्म सिंह की ढाणी आदि का जिक्र करते हुए बताया कि यहां नवजात शिशुओं में जन्मजात विकलांगता की समस्या तेजी से बढ़ रही है। बच्चों और युवाओं में शारीरिक विकृति, मानसिक दुर्बलता, समय से पहले बुढ़ापे के लक्षण, दांतों की सड़न, घुटनों की समस्या, हड्डियों में विकृति और फ्लोरोसिस जैसी गंभीर बीमारियां आम हो गई हैं।उन्होंने इसे केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर गहरा आघात बताया। भाटी का कहना था कि यह प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि एक बड़े मानवीय संकट का संकेत है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
55 RO प्लांट में से 30 बंद: प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता सबूत
विधायक ने सदन को चौंकाने वाला खुलासा किया कि क्षेत्र में स्थापित 55 RO प्लांट में से 30 लंबे समय से बंद पड़े हैं। इससे स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। भाटी ने इसे गंभीर लापरवाही करार देते हुए PHED (Public Health Engineering Department) मंत्री से तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि RO प्लांट बंद रहने से ग्रामीण मजबूरी में दूषित पानी पीने को विवश हैं, जो उनके जीवन को सीधे खतरे में डाल रहा है।
संविदा कर्मियों के शोषण पर स्थगन प्रस्ताव
पेयजल मुद्दे के अलावा भाटी ने प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों की स्थिति पर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे ये कर्मचारी वेतन असमानता, नौकरी की असुरक्षा और अनिश्चित भविष्य से जूझ रहे हैं। यह किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
बजट को ‘फैंसी बजट’ कहा, मूलभूत मुद्दों पर ठोस घोषणा की कमी
मीडिया से बातचीत में भाटी ने हाल ही में पेश मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बजट को "फैंसी बजट" करार दिया। उन्होंने कहा कि जनता को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन ज्यादातर घोषणाएं पुरानी योजनाओं के नाम बदलकर दोहराई गई हैं। पिछली बार "हरित बजट" आया था, लेकिन अरावली में पेड़ कटे और पर्यावरण प्रभावित हुआ। इस बार "विकसित राजस्थान" की बात हुई, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और बुनियादी ढांचे जैसे मूल क्षेत्रों में कोई ठोस, नई घोषणा नहीं दिखी।युवाओं को "नौकरी देने वाला" बनाने के दावे पर सवाल उठाते हुए भाटी ने कहा कि जब संस्थान, प्रशिक्षित मैनपावर और स्थिर रोजगार संरचना ही स्पष्ट नहीं, तो ऐसे दावे कितने व्यावहारिक हैं?
मुख्यमंत्री से भावनात्मक अपील: वेश बदलकर जनता के बीच जाएं
भाटी ने मुख्यमंत्री से अपील की कि प्राचीन काल की तरह वेश बदलकर आमजन के बीच जाएं और वास्तविक स्थिति का आकलन करें। उन्होंने रिन्यूएबल एनर्जी के नाम पर पश्चिमी जिलों (बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर) में बड़े पैमाने पर भूमि आवंटन पर भी सवाल उठाए। आरोप लगाया कि कैबिनेट में ज्यादातर चर्चा भूमि आवंटन पर ही होती है, जिससे स्थानीय लोगों का पलायन बढ़ रहा है, पशुधन प्रभावित हो रहा है और सीमा क्षेत्र अंदर से कमजोर हो रहा है।
उन्होंने गाय संरक्षण के नाम पर सत्ता में आई सरकार के दौर में पशुधन की चिंताजनक स्थिति का भी जिक्र किया। साथ ही, जैसलमेर के तनोट क्षेत्र में ओरण बचाने के लिए पैदल यात्रा कर रहे लोगों की मांग को सुनने की अपील की और बताया कि वे स्वयं शाम को बालेसर पहुंचकर इस यात्रा में शामिल होंगे।विधायक रविंद्र सिंह भाटी का यह प्रहार न केवल पेयजल संकट को उजागर करता है, बल्कि सीमावर्ती राजस्थान की समग्र विकास चुनौतियों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। उम्मीद है कि सरकार इस मुद्दे पर तत्काल और प्रभावी कदम उठाएगी।