प्राध्यापक परीक्षा 2025 में बाड़मेर के मनोहर राजपुरोहित ने हासिल की 39वीं रैंक, दूरदराज के गांव से उठकर लिखी सफलता की नई मिसाल
बाड़मेर जिले के बीसू कलां गांव के निवासी मनोहर राजपुरोहित ने प्राध्यापक परीक्षा 2025 (इतिहास विषय) में 39वीं रैंक हासिल कर पूरे गांव और राजपुरोहित समाज का नाम रोशन किया है। कड़ी मेहनत, परिवार के सहयोग और गुरुजनों के मार्गदर्शन से मिली इस सफलता को उन्होंने अपनी निरंतर अभ्यास की देन बताया। यह उपलब्धि दूरदराज के गांवों से आने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।
बाड़मेर/नवलगढ़: राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्राध्यापक (असिस्टेंट प्रोफेसर) परीक्षा 2025 के इतिहास विषय का अंतिम परिणाम सोमवार को घोषित हुआ। कुल 90 पदों वाली इस प्रतिष्ठित परीक्षा में बीसू कलां (बाड़मेर) निवासी मनोहर राजपुरोहित पुत्र पदम सिंह राजपुरोहित ने 39वीं रैंक हासिल करके न सिर्फ अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे राजपुरोहित समाज को गौरवान्वित कर दिया।
दूरदराज के छोटे से गांव बीसू कलां से निकलकर इतनी बड़ी सफलता हासिल करना आसान नहीं था। लेकिन मनोहर की अथक मेहनत, लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण और सही रणनीति ने असंभव को संभव बना दिया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय मुख्य रूप से कड़ी मेहनत, परिवार के अटूट सहयोग, गुरुजनों के मार्गदर्शन और रोजाना के निरंतर अभ्यास को दिया।
मनोहर ने कहा,“सफलता कोई जादू नहीं है। यह सिर्फ सही दिशा में लगातार प्रयास का नतीजा है। कई बार हार लगती है, लेकिन हार मान लेना सबसे बड़ी हार है। अगर आपका लक्ष्य साफ है और आप हर रोज थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ते रहते हैं, तो कोई भी परीक्षा आपके लिए मुश्किल नहीं रह जाती। मैं चाहता हूं कि मेरी यह सफलता उन सभी गांव के युवाओं को प्रेरित करे जो सोचते हैं कि शहरों में रहने वाले ही बड़ी परीक्षाएं पास कर सकते हैं। सपने देखो, मेहनत करो और विश्वास रखो — सफलता जरूर मिलेगी।”
परिवार और गांव वालों में खुशी की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोगों ने मनोहर को बधाई देते हुए कहा कि उनकी इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि चाहे आप किसी भी कोने से हों, अगर इरादा मजबूत हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता आपको खुद ढूंढ लेती है। राजपुरोहित समाज के सदस्यों ने इसे समाज की साझा उपलब्धि बताते हुए मनोहर को शुभकामनाएं दीं और कहा कि वह आने वाली पीढ़ी के लिए रोल मॉडल बन गए हैं।
मनोहर राजपुरोहित से युवाओं के लिए मोटिवेशनल संदेश: असफलता से डरो नहीं, उसे सीख बनाओ।रोजाना का छोटा-छोटा अभ्यास ही बड़ी सफलता की नींव रखता है।परिवार और गुरुजनों का सहयोग सबसे बड़ा ताकत है।अपना लक्ष्य कभी कम मत आंकना, भले ही रास्ता कितना भी लंबा क्यों न लगे।
मनोहर अब साक्षात्कार की तैयारी में जुट गए हैं। उनकी यह उपलब्धि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, खासकर उन छात्रों के लिए जो छोटे गांवों और सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देख रहे हैं।
मनोहर राजपुरोहित की सफलता की मुख्य बातें:परीक्षा: प्राध्यापक (इतिहास विषय) 2025, रैंक: 39वीं, कुल पद: 90, निवास: बीसू कलां, बाड़मेर, राजस्थान, सफलता का मंत्र: निरंतर अभ्यास + सही दिशा + अटूट विश्वास, पूरे बाड़मेर जिले और राजपुरोहित समाज को मनोहर राजपुरोहित की इस शानदार सफलता पर हार्दिक बधाई।
आपका सपना भी पूरा हो सकता है — बस मेहनत रुकनी नहीं चाहिए!