मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का प्रस्ताव अभी विचाराधीन नहीं: केंद्र सरकार का इनकार, फिल्म या वेब सीरीज बनाने की भी कोई योजना नहीं

केंद्र सरकार ने राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के प्रस्ताव को फिलहाल विचाराधीन नहीं माना है। लोकसभा में भाजपा सांसद मन्नालाल रावत के सवाल पर संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट किया कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक बनाने या भगवान बिरसा मुंडा-मानगढ़ जैसे जनजातीय बलिदानों पर फिल्म/वेब सीरीज बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। 1913 में गोविंद गुरु के नेतृत्व में हुई सभा पर ब्रिटिश पुलिस की गोलीबारी में 1500 से अधिक आदिवासी शहीद हुए थे। 2022 में राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण की सिफारिश और प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के बावजूद अभी कोई प्रगति नहीं हुई है।

Mar 25, 2026 - 14:46
मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का प्रस्ताव अभी विचाराधीन नहीं: केंद्र सरकार का इनकार, फिल्म या वेब सीरीज बनाने की भी कोई योजना नहीं

केंद्र सरकार ने राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के प्रस्ताव को फिलहाल विचाराधीन नहीं माना है। साथ ही भगवान बिरसा मुंडा या मानगढ़ धाम जैसे ऐतिहासिक जनजातीय बलिदानों पर कोई फिल्म या वेब सीरीज बनाने की भी कोई योजना नहीं है। यह जानकारी लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दी।

लोकसभा में उठा सवाल, मंत्री का स्पष्ट जवाब

उदयपुर से भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने 23 मार्च को लोकसभा में मानगढ़ धाम से जुड़े तीन महत्वपूर्ण सवाल पूछे थे:क्या सरकार मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के प्रस्ताव पर कोई कार्रवाई कर रही है? क्या भगवान बिरसा मुंडा या मानगढ़ धाम जैसे जनजातीय बलिदानों पर फिल्म/वेब सीरीज बनाने की कोई योजना है? इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र द्वारा ‘जनजातीय गौरव’ पुस्तक लिखी गई है या नहीं? तथा जनजातीय नायकों के शहादत स्थलों की सुरक्षा और साहित्य सृजन के लिए क्या कोई परियोजना चल रही है?

मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के जवाब संक्षिप्त और स्पष्ट थे:“वर्तमान में मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।”“भगवान बिरसा मुंडा या मानगढ़ धाम जैसे ऐतिहासिक जनजातीय बलिदानों पर कोई फिल्म या वेब सीरीज बनाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।”‘जनजातीय गौरव’ नामक पुस्तक लिखी गई है, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है।जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 10 राज्यों में 11 जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों को मंजूरी दी है। इसके अलावा नृवंशविज्ञान संग्रहालयों की भी मंजूरी दी गई है, जहां जनजातीय जीवन, संस्कृति, कलाकृतियां, पोशाकें, आभूषण और हथियार प्रदर्शित किए जाते हैं।

मानगढ़ धाम का ऐतिहासिक महत्व

मानगढ़ धाम राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के भील आदिवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। 17 नवंबर 1913 को स्वतंत्रता सेनानी गोविंद गुरु के नेतृत्व में करीब 1.5 लाख से अधिक भील आदिवासियों ने मानगढ़ पहाड़ी पर सभा की थी। ब्रिटिश पुलिस ने इस सभा पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिसमें लगभग 1500 आदिवासी शहीद हो गए। इस घटना को राजस्थान का जलियांवाला बाग भी कहा जाता है।

2022 में हुई थी राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण की सिफारिश

राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) ने 6 जुलाई 2022 को मानगढ़ पहाड़ी को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की सिफारिश की थी। तत्कालीन कला एवं संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को रिपोर्ट सौंपी गई थी। उन्होंने कहा था कि गुमनाम नायकों और मानगढ़ को इतिहास में वह स्थान नहीं मिला, जिसके वे हकदार हैं। आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान रिपोर्ट को सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाने की बात कही गई थी।

1 नवंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद मानगढ़ धाम का दौरा किया था। वहां उन्होंने कहा था:“17 नवंबर 1913 को मानगढ़ में जो नरसंहार हुआ, वह अंग्रेजी हुकूमत की क्रूरता की पराकाष्ठा थी। दुर्भाग्य से आदिवासी समाज के इस बलिदान को इतिहास में जो जगह मिलनी चाहिए, वह नहीं मिली। आज देश उस कमी को पूरा कर रहा है।”उस समय राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मध्य प्रदेश के तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान और गुजरात के तत्कालीन सीएम भूपेंद्र पटेल भी मौजूद थे।

वर्तमान स्थिति

हालांकि 2022 में सिफारिश और प्रधानमंत्री के दौरे के बावजूद, अब 2026 में केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट कर दिया है कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक बनाने का कोई प्रस्ताव वर्तमान में विचाराधीन नहीं है। फिल्म या वेब सीरीज बनाने की भी कोई योजना नहीं है।आदिवासी समुदाय लंबे समय से मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने और उनके बलिदान को मुख्यधारा के इतिहास में उचित स्थान देने की मांग कर रहा है। सरकार की ओर से जनजातीय संग्रहालयों और साहित्य सृजन पर काम जारी है, लेकिन मानगढ़ धाम के मामले में अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.